भारत में लॉजिस्टिक्स सेक्टर से तेज़ हुई इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति

भारत में लॉजिस्टिक्स सेक्टर से तेज़ हुई इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति

भारत में लॉजिस्टिक्स सेक्टर से तेज़ हुई इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति
मैक्सन लुईस के अनुसार भारत में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के माध्यम से तेज़ी से आगे बढ़ रही है। कम लागत, बेहतर तकनीक और डेटा-आधारित संचालन के कारण ईवी अब लाभदायक व्यावसायिक समाधान बन चुके हैं।

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब भविष्य की कल्पना नहीं, बल्कि तेजी से आकार लेती वास्तविकता बन चुकी है। लॉजिस्टिक्स सेक्टर में हो रहा यह बदलाव न केवल परिवहन की लागत और दक्षता को नए स्तर पर ले जा रहा है, बल्कि उद्योग की कार्यप्रणाली को भी पूरी तरह पुनर्परिभाषित कर रहा है। इसी परिवर्तनशील दौर पर प्रकाश डालते हुए उद्योग विशेषज्ञों ने बताया कि ई-मोबिलिटी अब विकल्प नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धात्मक आवश्यकता बन चुकी है जहाँ तकनीक, डेटा और टिकाऊ ऊर्जा मिलकर परिवहन के नए युग की नींव रख रहे हैं।

17 फरवरी 2026 को मुंबई के होटल जेडब्ल्यू मैरियट सहार में आयोजित Mile 2026 & Mile Honours 2026- West Edition  में मैजेंटा मोबिलिटी के फाउंडर और चेयरमैन मैक्ससन लुईस ने “लॉजिस्टिक्स ट्रांसफॉर्मेशन: ई-मोबिलिटी के लिए तात्कालिकता, प्रभावशीलता और अवसर” विषय पर बताते हुए कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति पहले ही शुरू हो चुकी है, लेकिन हम अक्सर इसे केवल निजी चार-पहिया वाहनों तक सीमित समझते हैं। वास्तविक परिवर्तन लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में तेजी से हो रहा है, जहाँ इलेक्ट्रिक तीन-पहिया और हल्के ट्रक तेजी से अपनाए जा रहे हैं। जनवरी में कुल 27 लाख वाहनों में से 2.18 लाख इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हुए, जो लगभग 10% हिस्सेदारी दर्शाता है। माल ढुलाई में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती हिस्सेदारी का मुख्य कारण उनकी कम परिचालन लागत और बेहतर व्यावसायिक लाभ है।

उन्होंने बताया कि लॉजिस्टिक्स में इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल स्वामित्व लागत (TCO) अब व्यावहारिक रूप से लाभकारी हो चुकी है। पहले जहाँ इलेक्ट्रिक चार-पहिया वाहनों की कीमत पारंपरिक वाहनों से लगभग 30% अधिक होती थी, वहीं कार्गो सेगमेंट में यह अंतर घटकर लगभग 15% रह गया है, जिससे तीन वर्षों में लागत संतुलन संभव हो जाता है। बेहतर बैटरी तकनीक, तेज़ चार्जिंग, वित्तीय सहायता और डेटा-आधारित संचालन ने इस परिवर्तन को और तेज किया है।

मैक्सन लुईस ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन अब केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि लाभदायक व्यावसायिक विकल्प बन चुके हैं। कंपनियाँ अब केवल ई-कॉमर्स ही नहीं, बल्कि दवाइयाँ, खाद्य पदार्थ, औद्योगिक सामान और अन्य उत्पाद भी इलेक्ट्रिक वाहनों से परिवहन कर रही हैं। भविष्य में डेटा-आधारित सेवाएँ, ऊर्जा प्रबंधन और स्मार्ट ट्रैकिंग लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को पूरी तरह बदल देंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ वर्ष पहले लोग पूछते थे “EV क्या है?”, फिर प्रश्न बना “EV क्यों खरीदें?”, और आने वाले समय में लोग पूछेंगे “ICE वाहन क्या है?”। उनके अनुसार, भारत में परिवहन का भविष्य तेजी से इलेक्ट्रिक की ओर बढ़ रहा है और यह परिवर्तन अब रुकने वाला नहीं है।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मैजेंटा मोबिलिटी वर्तमान में लगभग 3,000 इलेक्ट्रिक कार्गो वाहनों का संचालन कर रही है, जिनमें 2,200 इलेक्ट्रिक तिपहिया और करीब 800 इलेक्ट्रिक चार-पहिया वाहन शामिल हैं। कंपनी के पास 100 से अधिक चार्जिंग स्टेशन हैं और एक समर्पित तकनीकी टीम पूरे फ्लीट की निगरानी करती है। उन्होंने कहा कि पहले ड्राइवर और छोटे ऑपरेटर वित्त, तकनीक और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभाव में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से हिचकते थे, लेकिन अब वित्तीय संस्थानों के सपोर्ट और सस्ती पूंजी उपलब्ध होने से अपनाने की गति बढ़ रही है। इस संदर्भ में उन्होंने हाल ही में हरित वित्त पहल शुरू करने वाले Bank of Baroda का उल्लेख किया।

अपने संबोधन में मैक्ससन लुईस ने इलेक्ट्रिक वाहनों को “पहियों वाला मोबाइल फोन” बताते हुए कहा कि ये वाहन डेटा, कनेक्टिविटी और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से लैस होते हैं। इससे रूट ऑप्टिमाइजेशन, बैटरी स्वास्थ्य निगरानी और परिचालन दक्षता में बड़ा सुधार संभव होता है, जो पारंपरिक डीजल वाहनों में सीमित है। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में ऊर्जा-सेवा और डेटा-सेवा आधारित मॉडल लॉजिस्टिक्स उद्योग को नई दिशा देंगे।

इस कार्यक्रम में उद्योग विशेषज्ञों ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बढ़ते प्रभाव और पश्चिमी भारत में इसके विस्तार पर चर्चा की। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने शुरुआती स्तर पर चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर देश में ई-मोबिलिटी को गति दी है, जिससे उद्योग को मजबूत आधार मिला है।

अंत में उन्होंने कहा कि आज लॉजिस्टिक्स कंपनियाँ केवल पर्यावरणीय कारणों से नहीं, बल्कि बेहतर लागत और दक्षता के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दे रही हैं। ई-कॉमर्स और सप्लाई चेन कंपनियों द्वारा व्यापक उपयोग से यह परिवर्तन और तेज हुआ है। उनके अनुसार, आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक परिवहन भारत की आर्थिक और औद्योगिक प्रगति का प्रमुख स्तंभ बनने जा रहा है।

Subscribe Newsletter
Submit your email address to receive the latest updates on news & host of opportunities