उच्च लागत, बदलती ग्राहक अपेक्षाएँ और तकनीकी बदलाव के दौर में, पारंपरिक “बड़े मेन्यू” की दीवारें टूट रही हैं। दुनिया भर के रेस्टोरेंट अब अपने मेन्यू को छोटा और सटीक बनाने की ओर बढ़ रहे हैं, ताकि उच्च गुणवत्ता वाले व्यंजन पेश किए जा सकें और मुनाफा बढ़ाया जा सके। मुंबई, पुणे, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में कई रेस्टोरेंट इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
“कम ही अब ज्यादा है”
आधुनिक ग्राहक अब मात्रा से ज्यादा विशेषज्ञता की तलाश कर रहे हैं। संक्षिप्त मेन्यू से "निर्णय थकान" कम होती है और हर व्यंजन विश्व-स्तरीय अनुभव देता है, कहते हैं सुंधीप रेड्डी, को-फाउंडर, Mirth Cocktail Conservatory।
सटीक मेन्यू शेफ द्वारा तैयार विशेष व्यंजन पेश करने का मौका देता है। अधिकांश रेस्टोरेंट में 40–60 मुख्य व्यंजन होते हैं और 70–80% व्यंजन मौसमी सामग्री पर आधारित बदलते रहते हैं। Woodside Inn के को-फाउंडर सुमित गंभीर के अनुसार, कम व्यंजन बेहतर स्थिरता, स्टाफ़ की आत्मविश्वास, कम वेस्टेज और ताजगी सुनिश्चित करते हैं, साथ ही इन्वेंट्री और लागत नियंत्रण मजबूत बनाते हैं।
बेहतर ग्राहक अनुभव
छोटा मेन्यू रेस्टोरेंट को अधिक लचीला बनाता है और मौसमी उत्पाद या फूड ट्रेंड्स के अनुसार तेजी से अनुकूलन करने में मदद करता है। Kojak के फाउंडर खालिद अंसारी के अनुसार, यह ग्राहकों को व्यक्तिगत अनुभव देता है और किचन और डाइनर के बीच दूरी कम करता है।
रेड्डी कहते हैं, “कम विकल्प होने पर ग्राहक महसूस करते हैं कि हर व्यंजन पर विशेष ध्यान दिया गया है।” कई रेस्टोरेंट्स मेन्यू इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर प्रत्येक व्यंजन की मांग और मुनाफे का मूल्यांकन करते हैं। Lygon St. की शेफ और फाउंडर स्नेहा उपाध्याय कहती हैं, “डायनामिक प्राइसिंग और सामग्री के आधार पर मेन्यू डिजाइन करने से व्यय कम होता है और व्यवसाय टिकाऊ बनता है।”
व्यवसाय पर प्रभाव
क्यूरेटेड और सीमित मेन्यू से वेस्टेज कम होता है और मार्जिन बढ़ता है। रेस्टोरेंट्स स्टाफ़, खाद्य लागत और सामग्री में 40–45% तक बचत कर रहे हैं। Mirth में इसका असर फूड और ड्रिंक के बीच तालमेल में दिखता है।
भविष्य की दिशा है हाइपर-स्पेशलाइजेशन। रेस्टोरेंट्स अब "माइक्रो मेन्यू" पेश करेंगे जो बाजार उपलब्धता के अनुसार सप्ताह दर सप्ताह बदलेंगे। “एक-दो चीज़ों में बेहतरीन” करने वाले ब्रांड ही भविष्य में सफल होंगे।