भारत-EU व्यापार समझौते से बढ़ेंगे निर्यात और निवेश

भारत-EU व्यापार समझौते से बढ़ेंगे निर्यात और निवेश

भारत-EU व्यापार समझौते से बढ़ेंगे निर्यात और निवेश
भारत और यूरोपीय संघ ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर ऐतिहासिक व्यापार समझौता किया है। इस डील से व्यापार, तकनीकी सहयोग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में कई सालों की बातचीत के बाद आखिरकार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है, क्योंकि यह कई मायनों में ऐतिहासिक है। पहला, यह भारत और EU जैसे दो बड़े आर्थिक क्षेत्रों के बीच अभूतपूर्व बाजार पहुंच देता है। दूसरा, यह समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब दुनिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ी हुई है।

इस समझौते के तहत टैरिफ में कटौती, बाजार तक आसान पहुंच और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर सहमति बनी है, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाएं और करीब आएंगी।

भारत-EU व्यापार की स्थिति

EU भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-EU के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार ₹11.5 लाख करोड़ (136.54 अरब डॉलर) रहा। इसमें भारत का निर्यात ₹6.4 लाख करोड़ और आयात ₹5.1 लाख करोड़ था। सेवाओं के क्षेत्र में भारत-EU व्यापार ₹7.2 लाख करोड़ (83.10 अरब डॉलर) तक पहुंच गया।

भारत और EU क्रमशः दुनिया की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों मिलकर वैश्विक GDP का करीब 25% और वैश्विक व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रखते हैं। इन दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का एकीकरण व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा करेगा।

टैरिफ और बाजार पहुंच
इस समझौते के तहत भारत को EU बाजार में 97% टैरिफ लाइनों पर प्राथमिक पहुंच मिली है, जो कुल व्यापार मूल्य का 99.5% कवर करती है। वहीं भारत EU के निर्यात के लिए 92.1% टैरिफ लाइनों पर रियायत दे रहा है, जो 97.5% EU निर्यात को कवर करती हैं।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

एडलवाइस म्यूचुअल फंड के प्रेसिडेंट और CIO इक्विटीज त्रिदीप भट्टाचार्य के अनुसार,“वैश्विक व्यापार में बिखराव, बढ़ते संरक्षणवाद और भू-राजनीतिक तनाव के दौर में यह FTA भारत के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बन सकता है। EU भारत के कुल निर्यात का लगभग 17% हिस्सा है और यह समझौता 2031 तक भारत के EU को निर्यात में करीब 50 अरब डॉलर की बढ़ोतरी कर सकता है।”

तकनीक पर खास जोर

यह FTA तकनीकी सहयोग के लिए भी मजबूत आधार तैयार करता है। समझौते में सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्लीन टेक और बायोटेक जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर सहमति बनी है।

भारत और EU, ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) के जरिए उभरती तकनीकों, डिजिटल गवर्नेंस, ग्रीन टेक्नोलॉजी और मजबूत सप्लाई चेन पर सहयोग करेंगे। इसके तहत नए India-EU Innovation Hubs बनाए जाएंगे, जहां सरकार, उद्योग, स्टार्टअप, निवेशक और शोध संस्थान मिलकर काम करेंगे।

एआई AI के क्षेत्र में दोनों पक्ष लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स, बहुभाषी डेटा, हेल्थकेयर, कृषि और जलवायु से जुड़े AI समाधान विकसित करेंगे। साथ ही सुरक्षित और मानव-केंद्रित AI पर भी जोर दिया जाएगा।

स्टार्टअप और एमएसएमई को फायदा

इस समझौते से भारतीय IT कंपनियों, स्टार्टअप्स और MSMEs को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। NASSCOM के अनुसार, इससे भारत के IT सेक्टर में EU निवेश बढ़ेगा, संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures) होंगे और रिसर्च व इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा।

FTA में MSMEs के लिए अलग अध्याय शामिल हैं, जिससे छोटे कारोबारों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मौके मिलेंगे। यह समझौता वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय IT निर्यातकों के लिए नए बाजार खोलता है।

रणनीतिक महत्व

फ्यूचर शिफ्ट लैब्स की सीनियर जियो-पॉलिटिकल एनालिस्ट सुनंदा आर. मराक के अनुसार, करीब दो दशकों बाद इस समझौते का पूरा होना केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक बदलाव भी दर्शाता है। यह समझौता ऐसे समय में आया है जब वैश्वीकरण पर सवाल उठ रहे हैं और सप्लाई चेन को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

भारत के लिए यह EU जैसे हाई-इनकम बाजार तक आसान पहुंच देता है और मैन्युफैक्चरिंग व सेवाओं की प्रतिस्पर्धा बढ़ाता है। वहीं EU के लिए यह चीन पर निर्भरता कम करने और व्यापार में विविधता लाने का जरिया है।

निष्कर्ष

भारत-EU FTA दोनों पक्षों के लिए विन-विन समझौता है। यह व्यापार, तकनीक, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई देगा। यही वजह है कि इसे सही मायनों में “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है।

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