बजट 2026 से संगठित रिटेल और MSMEs की उम्मीदें

बजट 2026 से संगठित रिटेल और MSMEs की उम्मीदें

बजट 2026 से संगठित रिटेल और MSMEs की उम्मीदें
भारत का रिटेल रियल एस्टेट सेक्टर 2026 में स्वस्थ स्थिति में प्रवेश कर चुका है। संगठित रिटेल न सिर्फ मेट्रो शहरों में बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी फैल रहा है और प्रमुख ब्रांड उभरते बाजारों में अधिक स्टोर खोल रहे हैं।


हालांकि बजट सभी संरचनात्मक समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता, लेकिन यह टैक्स, ड्यूटी, इंसेंटिव और सार्वजनिक खर्च को समायोजित कर व्यवसाय करना आसान बना सकता है, खपत को बढ़ावा दे सकता है और छोटे शहरों में विस्तार का समर्थन कर सकता है।

भारत का रिटेल रियल एस्टेट सेक्टर 2026 में स्वस्थ स्थिति में प्रवेश कर चुका है। संगठित रिटेल न सिर्फ मेट्रो शहरों में बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी फैल रहा है और प्रमुख ब्रांड उभरते बाजारों में अधिक स्टोर खोल रहे हैं। अच्छे मॉल शहरी ग्राहकों के लिए वीकेंड पर लोकप्रिय स्थान बने हुए हैं, जबकि हाई स्ट्रीट्स प्रीमियम शॉपर्स को आकर्षित करती रहती हैं।

ANAROCK ग्रुप के रिटेल लीजिंग और इंडस्ट्रियल एवं लॉजिस्टिक्स के सीईओ अनुज केजरीवाल कहते हैं, “जैसे-जैसे भारत ग्लोबल ट्रेड इकोसिस्टम के करीब आता है, यह चरण भारतीय रिटेल के लिए अवसर और समायोजन दोनों लेकर आता है। भारतीय रिटेल को घरेलू खपत की वास्तविकताओं में बने रहना होगा, साथ ही अधिक प्रतिस्पर्धात्मक अंतरराष्ट्रीय माहौल के लिए खुद को ढालना होगा।”

नए भारत-ईयू व्यापार समझौते से फैशन, लाइफस्टाइल और फूड ब्रांड्स के लिए दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार करना धीरे-धीरे आसान और सस्ता होगा। इससे भारतीय मॉल में और अधिक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड आएंगे और भारतीय ब्रांड्स के लिए एक्सपोर्ट के अवसर भी बढ़ेंगे। हालांकि, इससे घरेलू रिटेलर्स पर भी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, खासकर कॉस्मेटिक्स, स्पिरिट्स, प्रीमियम फूड, कपड़े, टेक्सटाइल्स, लेदर और कंज्यूमर गुड्स में, क्योंकि वैश्विक ब्रांड अब कम लागत पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

व्यापार समझौतों में गुणवत्ता, लेबलिंग, REACH नियम, फायर सेफ्टी, सततता और एथिकल सोर्सिंग जैसी अनुपालन आवश्यकताएं भी आती हैं। इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए लागत बढ़ सकती है, जो प्रिफरेंशियल टैरिफ का लाभ उठाना चाहते हैं। ऑरिजिन सर्टिफिकेशन, लॉजिस्टिक्स जटिलताएं और कार्बन टैक्स का खतरा भी सप्लाई चेन पर दबाव डाल सकता है, खासकर छोटे रिटेलर्स और MSMEs के लिए।

इस संदर्भ में, रिटेल सेक्टर यूनियन बजट 2026 से एक अधिक समान व्यावसायिक वातावरण बनाने की उम्मीद करता है। हालांकि बजट सभी संरचनात्मक समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता, लेकिन यह टैक्स, ड्यूटी, इंसेंटिव और सार्वजनिक खर्च को बेहतर बना सकता है, जिससे व्यवसाय करना आसान हो और छोटे शहरों में विस्तार को समर्थन मिले।

Hettich India SAARC Middle East और Africa के मैनेजिंग डायरेक्टर आंद्रे एकहोल्ट (Andre Eckholt) भी इसी उम्मीद को साझा करते हैं। वे कहते हैं कि जैसे-जैसे भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनता जा रहा है, फर्नीचर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स को बढ़ती कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स लागत से राहत की जरूरत है। इसके लिए ड्यूटी में सुधार, इनपुट लागत में स्थिरता, वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग के लिए इंसेंटिव और इंफ्रास्ट्रक्चर व ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस पर ध्यान जरूरी है।

व्यापार के को-फाउंडर और सीईओ सुमित अग्रवाल MSME और अनुपालन के नजरिए से कहते हैं कि MSMEs को जटिल पॉलिसी की बजाय सरलता, तरलता और स्थिर तकनीक-सक्षम अनुपालन फ्रेमवर्क चाहिए। उनके अनुसार, इनवॉइसिंग, बुककीपिंग, जीएसटी अनुपालन और टैक्स मैनेजमेंट में डिजिटल अपनाने से रुकावटें कम होंगी, क्रेडिट आकलन में मदद मिलेगी, वर्किंग कैपिटल तक तेजी से पहुंच बनेगी और छोटे व्यवसायों के लिए एक्सपोर्ट से जुड़े नियम आसान होंगे।

बाजार की स्थिति  

भारतीय रिटेल रियल एस्टेट सेक्टर में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है , जो नेता हैं और जो पीछे हैं। अच्छी लोकेशन वाले, पेशेवर तरीके से मैनेज किए गए मॉल, मजबूत ब्रांड मिश्रण, फूड और एंटरटेनमेंट विकल्प और सुरक्षित वातावरण वाले मॉल अच्छी परफॉर्मेंस दे रहे हैं। पुराने या खराब डिज़ाइन वाले मॉल, जहां एक्सेस और पार्किंग की समस्या है, अप्रासंगिक होते जा रहे हैं क्योंकि ग्राहक बेहतर विकल्प या ऑनलाइन खरीदारी की ओर जा रहे हैं।

छोटे शहरों में भी बड़ी बढ़ोतरी दिखाई दे रही है। रिटेलर्स इन बाजारों में फिजिकल स्टोर, फ्रेंचाइजी और डार्क स्टोर्स के माध्यम से प्रवेश कर रहे हैं, जो ऑनलाइन डिलीवरी का समर्थन करते हैं। इससे रिटेल डेवलपमेंट की प्रकृति प्रभावित हो रही है और मध्यम आकार के शॉपिंग सेंटर, रिटेल वेयरहाउस हब और ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

बजट से टैक्स की उम्मीदें : रिटेलर्स चाहते हैं कि बजट में ऐसे व्यावहारिक टैक्स सुधार किए जाएं, जो मांग बढ़ाएं लेकिन वित्तीय संतुलन को प्रभावित न करें।

- किफायती कपड़े, जूते और रोज़मर्रा की चीज़ों पर जीएसटी में थोड़ी कमी संगठित रिटेल को अनौपचारिक सेक्टर के साथ प्रतिस्पर्धा करने में मदद कर सकती है और छोटे शहरों में मांग को बढ़ावा दे सकती है।

- डेवलपर्स के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट नियमों को स्पष्ट करने से फिट-आउट, सामान्य क्षेत्रों और पेशेवर सेवाओं पर प्रोजेक्ट लागत कम हो सकती है और बेहतर क्वालिटी वाले रिटेल डेवलपमेंट को प्रोत्साहन मिलेगा।

उपभोक्ताओं के लिए मामूली आयकर राहत से फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और फूड सर्विस में खर्च बढ़ सकता है।

रिटेल ग्रोथ के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर: रिटेल विकास का सीधा संबंध कनेक्टिविटी और मोबिलिटी से है।

- मेट्रो, रेलवे, हाईवे और एयरपोर्ट का विस्तार नए रिटेल क्षेत्रों का निर्माण करता है।

- इंसेंटिव या तेज़ अप्रूवल के माध्यम से सतत रिटेल डेवलपमेंट को प्रोत्साहित करना भविष्य के तैयार मॉल को बढ़ावा दे सकता है।

- विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में मजबूत डिजिटल और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर से रिटेलर्स को वास्तविक ओमनीचैनल ऑपरेशन अपनाने में मदद मिलेगी।

ब्रांड्स, MSMEs और सप्लाई चेन का समर्थन: मॉल और हाई स्ट्रीट्स उतने ही मजबूत हैं जितने मजबूत उनके अंदर के ब्रांड और निर्माता हैं।

- कपड़े, जूते, लेदर और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर के लिए इंसेंटिव घरेलू ब्रांड की मौजूदगी को मजबूत कर सकते हैं और रोजगार पैदा कर सकते हैं।

- संगठित रिटेल को सप्लाई करने वाले MSMEs के लिए बेहतर क्रेडिट और वर्किंग कैपिटल सपोर्ट वित्तीय दबाव कम कर सकता है।

- डिजिटल और एक्सपोर्ट अनुपालन प्रणाली को सरल बनाने से भारतीय ब्रांड्स और MSMEs रिटेल स्पेस का उपयोग ग्लोबल खरीदारों के लिए शोरूम की तरह कर सकते हैं और नियमों का बोझ कम हो सकता है।

ANAROCK ग्रुप के अनुज केजरीवाल के अनुसार, आगे का जोर दक्षता और गुणवत्ता वाले एसेट्स पर होगा, जो पॉलिसी सपोर्ट और बढ़ी हुई खपत को बेहतर प्रदर्शन में बदल सकें।

भारतीय आधार के साथ ग्लोबल दृष्टिकोण 

भारत-ईयू ट्रेड डील के बाद, भारतीय रिटेल रियल एस्टेट अधिक ग्लोबल बनने की ओर बढ़ रहा है, लेकिन भारतीय खपत व्यवहार में गहराई से जड़ा हुआ है। सफल मॉल वे होंगे जो एक्सेसिबिलिटी, सुरक्षा, अनुभव और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स का संतुलित मिश्रण प्रदान करें।

अब रिटेल सेक्टर यूनियन बजट 2026 से एक पूर्वानुमेय और सहायक माहौल बनाने की उम्मीद करता है, जहां गुणवत्ता वाले एसेट्स, कुशल ऑपरेटर, गंभीर रिटेलर्स और सशक्त MSMEs लगातार स्थिर विकास कर सकें।

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