एंटरप्रेन्योर इंडिया ईवी एक्सपो और कॉन्फ्रेंस 2026 में आयोजित "Electrifying Commerce: Scaling EVs across Fleets and Logistics" विषय पर एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा में भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर के प्रमुख विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस सत्र में कमर्शियल ईवी अपनाने की संभावनाओं और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस सत्र का संचालन फॉक्स एनर्जी के को-फ़ाउंडर कार्तिक गणेश ने किया। पैनल में आर्क इलेक्ट्रिक के सीईओ और को-फ़ाउंडर अभिनव कालिया, एक्सपोनेंट एनर्जी के हेड – स्ट्रैटेजिक ग्रोथ एंड पार्टनरशिप्स अक्षत मोदी, ट्रेवेल के सह-संस्थापक और सीईओ मिशू अहलूवालिया और रेडीअसिस्ट के फाउंडर एंड सीईओ विमल सिंह शामिल रहे।
चर्चा के दौरान फ्लीट इलेक्ट्रिफिकेशन, फास्ट-चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रीमियम इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऑपरेशनल एफिशिएंसी, आफ्टर-सेल्स सर्विस और फाइनेंसिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए गए। विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों के आधार पर विशेषज्ञों ने बताया कि इनोवेशन, सहयोग और ग्राहक-केंद्रित समाधान भारत में स्मार्ट, स्वच्छ और टिकाऊ कमर्शियल ईवी इकोसिस्टम को तेज़ी से आगे बढ़ा रहे हैं।
कॉर्पोरेट ग्राहक ईवी फ्लीट अपनाते समय किन बातों को प्राथमिकता देते हैं?
अभिनव कालिया: कॉर्पोरेट ग्राहक सबसे पहले लागत नहीं, बल्कि ऑपरेशनल विश्वसनीयता (Operational Reliability) को महत्व देते हैं। वे फ्लीट की उपलब्धता, तकनीक, सर्विस लेवल एग्रीमेंट (SLA), स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), बिजनेस कंटिन्युटी प्लान और रिस्पॉन्स टाइम का मूल्यांकन करते हैं। ESG लक्ष्यों का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कंपनियां भरोसेमंद चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षित ड्राइवर और निर्बाध संचालन चाहती हैं। लागत पर विचार तब किया जाता है जब ऑपरेशनल प्रदर्शन पर भरोसा बन जाता है।
एक्सपोनेंट एनर्जी ईवी अपनाने की सबसे बड़ी चुनौती का समाधान कैसे कर रही है?
अक्षत मोदी: हमारा मानना है कि ईवी अपनाने की सबसे बड़ी चुनौती वाहन नहीं, बल्कि ऊर्जा (Energy) है। एक्सपोनेंट एनर्जी बैटरी, चार्जिंग तकनीक और सॉफ्टवेयर को एकीकृत करने वाले फुल-स्टैक मॉडल पर काम करती है, जिससे तेज़, भरोसेमंद और किफायती चार्जिंग संभव होती है। कमर्शियल फ्लीट ऑपरेटरों को ऐसी सुविधा चाहिए कि वे किसी भी समय और किसी भी स्थान पर बिना संचालन प्रभावित किए वाहन चार्ज कर सकें। पूरे चार्जिंग इकोसिस्टम पर नियंत्रण के कारण हम बैटरी की सेहत बनाए रखते हुए तेज़ चार्जिंग अनुभव उपलब्ध कराते हैं।
Trevel ने प्रीमियम इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बाजार में प्रवेश क्यों किया?
मिशू अहलूवालिया: हमारी यह सोच हाल के बाजार बदलावों से पहले की है। हमने प्रीमियम, भरोसेमंद और सुरक्षित इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में एक बड़ा अवसर देखा। Trevel चार प्रमुख स्तंभों—विश्वसनीयता, सुरक्षा, प्रीमियम ग्राहक अनुभव और तकनीक—पर आधारित है। हम जीरो-कैंसिलेशन सेवा, AI आधारित सुरक्षा प्रणाली, प्रीमियम EVs और टेक्नोलॉजी-फर्स्ट प्लेटफॉर्म प्रदान करते हैं, जिससे ग्राहकों को हर बार एक समान और उच्च गुणवत्ता वाला यात्रा अनुभव मिलता है।
ईवी अपनाने में आफ्टर-सेल्स सर्विस कितनी महत्वपूर्ण है?
विमल सिंह: उत्पाद नवाचार और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर महत्वपूर्ण हैं, लेकिन दीर्घकालिक सफलता का आधार मजबूत आफ्टर-सेल्स सर्विस है। ग्राहकों का भरोसा तभी बढ़ता है जब उन्हें यह विश्वास हो कि यात्रा के दौरान कहीं भी सहायता उपलब्ध होगी। ReadyAssist वर्तमान में देश के 19,000 से अधिक पिन कोड्स में सेवाएं प्रदान कर रही है और भारत के शीर्ष 10 EV निर्माताओं में से 8 के साथ साझेदारी कर चुकी है। एक मजबूत राष्ट्रीय सर्विस नेटवर्क EV अपनाने में विश्वास बढ़ाने के लिए बेहद आवश्यक है।
फ्लीट ऑपरेटर अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी कैसे बढ़ा सकते हैं?
अभिनव कालिया: हमने अपने संचालन क्षेत्रों के भीतर 5–7 किलोमीटर की दूरी पर रणनीतिक रूप से चार्जिंग हब विकसित किए हैं, जिससे वाहनों की अनावश्यक आवाजाही कम हुई और फ्लीट उपयोग क्षमता में सुधार आया। अगली बड़ी चुनौती टियर-2 और टियर-3 शहरों में भरोसेमंद चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करना है, जिससे रेंज एंग्जायटी कम होगी और कमर्शियल EV संचालन अधिक प्रभावी बनेगा।
प्रीमियम EV फ्लीट्स के विस्तार में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
मिशू अहलूवालिया: सबसे बड़ी चुनौती पूंजी (Capital) तक आसान पहुंच है। वर्तमान में EV फ्लीट्स के लिए फाइनेंसिंग पारंपरिक वाहनों की तुलना में महंगी है क्योंकि ऋणदाता (Lenders) अभी भी EV के रेसिडुअल वैल्यू को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। यदि आसान फाइनेंसिंग, कम ब्याज दरें और सभी राज्यों में एक समान सरकारी प्रोत्साहन उपलब्ध हों, तो कमर्शियल ईवी अपनाने की गति काफी तेज़ हो सकती है।
निष्कर्ष
पैनल चर्चा का निष्कर्ष यह रहा कि भारत का कमर्शियल ईवी इकोसिस्टम अब विकास के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है। वाहन तकनीक लगातार बेहतर हो रही है, लेकिन उद्योग का भविष्य केवल वाहनों पर नहीं, बल्कि मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर फाइनेंसिंग, प्रीमियम मोबिलिटी समाधान और प्रभावी आफ्टर-सेल्स सपोर्ट पर भी समान रूप से निर्भर करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि OEMs, फ्लीट ऑपरेटरों, ऊर्जा प्रदाताओं, सर्विस पार्टनर्स और नीति-निर्माताओं के बीच मजबूत सहयोग ही बड़े पैमाने पर ईवी अपनाने और भारत में एक टिकाऊ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम के निर्माण की कुंजी होगा।