बैटरी से AI तक: भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की नई उड़ान

बैटरी से AI तक: भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की नई उड़ान

बैटरी से AI तक: भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की नई उड़ान
भारत का ईवी उद्योग अब अपनाने के दौर से आगे बढ़कर वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। नवाचार, स्थानीय विनिर्माण, बैटरी तकनीक और सहयोग इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बन रहे हैं।

 

ऑन्त्रेप्रेन्योर इंडिया ईवी  एक्सपो और कॉन्फ्रेंस 2026  के अवसर पर ऑन्त्रेप्रेन्योर इंडिया मीडिया की सीईओ एवं कंसल्टीग एडिटर आशिता मार्या ने कहा कि भारत का इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग अब प्रयोग के दौर से निकलकर एक मजबूत और परिपक्व उद्योग बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाला दशक केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने का नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक ईवी नेतृत्व दिलाने का होगा।

अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर होने वाली चर्चाओं का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। जहां पहले सवाल यह होता था कि क्या भारत EV अपनाने के लिए तैयार है, वहीं आज चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में वैश्विक नेतृत्व कैसे हासिल कर सकता है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि इलेक्ट्रिक वाहन अब भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुके हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में भारत में 24 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हुआ और नई वाहन बिक्री में EV की हिस्सेदारी लगभग 8.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। उनके अनुसार ये आंकड़े केवल बिक्री नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के बढ़ते विश्वास, उद्योग के आत्मविश्वास और सरकार की दीर्घकालिक नीतियों का परिणाम हैं।

भारत की EV यात्रा दुनिया से अलग

आशिता मार्या ने कहा कि भारत की ईवी कहानी दुनिया के अन्य देशों से अलग रही है। जहां अधिकांश देशों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की शुरुआत प्रीमियम और लग्जरी कारों से हुई, वहीं भारत में दोपहिया, तिपहिया, ई-रिक्शा, लास्ट माइल डिलीवरी और फ्लीट ऑपरेशंस ने इस परिवर्तन का नेतृत्व किया।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में मेट्रो से निकलने वाले यात्रियों की यात्रा अब ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक वाहनों के माध्यम से पूरी होती है। वहीं ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कंपनियों की अधिकांश डिलीवरी इलेक्ट्रिक वाहनों से होने लगी है। नगर निकायों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कई सफाई वाहन भी अब इलेक्ट्रिक हो चुके हैं। उनका मानना है कि यह मॉडल अन्य उभरते देशों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

केवल वाहन नहीं, एक संपूर्ण इकोसिस्टम

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब केवल ऑटोमोबाइल उद्योग नहीं रह गई है, बल्कि यह बैटरी तकनीक, सॉफ्टवेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा प्रबंधन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय सेवाओं और सार्वजनिक नीतियों का एक व्यापक इकोसिस्टम बन चुका है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इतना बड़ा इकोसिस्टम कोई एक कंपनी अकेले विकसित नहीं कर सकती। इसके लिए उद्योग, स्टार्टअप, सरकार, निवेशकों, शिक्षण संस्थानों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच मजबूत सहयोग आवश्यक है।

अगला लक्ष्य: स्थानीय क्षमता निर्माण

आशिता मार्या ने कहा कि भारत आज भी बैटरी सेल, सेमीकंडक्टर और कई महत्वपूर्ण कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में EV उद्योग का अगला चरण केवल अधिक वाहन बेचने का नहीं, बल्कि घरेलू विनिर्माण क्षमता विकसित करने का होगा।

उन्होंने कहा कि बैटरी निर्माण, एडवांस केमिस्ट्री, बैटरी रीसाइक्लिंग, मजबूत सप्लाई चेन और स्वदेशी तकनीक विकसित करना भारत की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता तय करेगा। उनका मानना है कि भविष्य में वही देश अग्रणी होंगे जो तकनीक और निर्माण क्षमता दोनों पर नियंत्रण रखेंगे।

तमिलनाडु क्यों है EV उद्योग का केंद्र?

तमिलनाडु आज भारत की ऑटोमोबाइल राजधानी के रूप में उभर चुका है। राज्य में विश्वस्तरीय विनिर्माण, कुशल इंजीनियरिंग प्रतिभा, मजबूत सप्लायर नेटवर्क, निर्यात अवसंरचना और औद्योगिक विशेषज्ञता मौजूद है। यही कारण है कि Entrepreneur India ने EV Expo & Conference के आयोजन के लिए चेन्नई को चुना।

उनके अनुसार वैश्विक कंपनियां जब नई सप्लाई चेन और इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन निवेश गंतव्य तलाश रही हैं, तब तमिलनाडु इलेक्ट्रिक मोबिलिटी निर्माण और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

बैटरी और चार्जिंग होंगे सबसे बड़े बदलाव के केंद्र

उन्होंने कहा कि भविष्य में बैटरी तकनीक, फास्ट चार्जिंग, ऊर्जा भंडारण और रीसाइक्लिंग EV उद्योग की दिशा तय करेंगे। बैटरी ही वाहन की लागत, रेंज, चार्जिंग स्पीड, सुरक्षा और प्रदर्शन को निर्धारित करती है। इसलिए इस क्षेत्र में अनुसंधान और निवेश बेहद महत्वपूर्ण है।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार EV उद्योग की सफलता की सबसे महत्वपूर्ण शर्त है। यदि पर्याप्त चार्जिंग नेटवर्क उपलब्ध नहीं होगा तो उपभोक्ता और फ्लीट ऑपरेटर दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। आज कई कंपनियां चार्जिंग स्टेशन फ्रेंचाइज़ मॉडल के माध्यम से उद्यमिता के नए अवसर भी तैयार कर रही हैं।

AI और सॉफ्टवेयर बनेंगे भविष्य की पहचान

आने वाले वर्षों में वाहन केवल मशीन नहीं, बल्कि "कंप्यूटर ऑन व्हील्स" बन जाएंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर, कनेक्टिविटी, बैटरी मैनेजमेंट, प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस और फ्लीट मैनेजमेंट वाहन उद्योग के सबसे महत्वपूर्ण घटक होंगे। उन्होंने कहा कि भारत के पास विश्वस्तरीय सॉफ्टवेयर प्रतिभा है और यदि इसका सही उपयोग किया जाए तो देश EV तकनीक में भी वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकता है।

निवेश और स्टार्टअप्स के लिए बड़े अवसर

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम में निवेश लगातार बढ़ रहा है। बैटरी निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्यात, फ्लीट इलेक्ट्रिफिकेशन और AI आधारित समाधान ऐसे पांच प्रमुख क्षेत्र हैं जहां आने वाले वर्षों में सबसे अधिक अवसर दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने निवेशकों से आग्रह किया कि वे उभरते स्टार्टअप्स और नवाचारों को समर्थन दें ताकि भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और मजबूत बन सके।

सहयोग से बनेगा भविष्य

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत सहयोग (Collaboration) रही है और EV उद्योग का भविष्य भी साझेदारी पर ही निर्भर करेगा। स्टार्टअप्स, उद्योग, सरकार, शिक्षण संस्थानों और निवेशकों के बीच मजबूत सहयोग ही भारत को वैश्विक ईवी नेतृत्व तक पहुंचा सकता है।

उन्होंने कहा कि Entrepreneur India EV Expo & Conference का उद्देश्य केवल प्रदर्शनी आयोजित करना नहीं, बल्कि ऐसा मंच तैयार करना है जहां उद्योग जगत एक-दूसरे से जुड़े, निवेश के अवसर बनें, नई साझेदारियां विकसित हों और भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यात्रा को नई गति मिले।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों से प्रदर्शनी में मौजूद कंपनियों और प्रदर्शकों के साथ सार्थक संवाद करने, नए व्यावसायिक अवसर तलाशने और भविष्य की साझेदारियों की नींव रखने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2030 तक भारत का लक्ष्य केवल EV अपनाने वाला देश बनने का नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तकनीक, निर्माण और नवाचार में विश्व नेतृत्व स्थापित करने का होना चाहिए।

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