प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के सलाहकार Tarun Kapoor ने कहा है कि भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए सभी क्षेत्रों पर समान रूप से ध्यान देने के बजाय ज्यादा उपयोग वाले क्षेत्रों जैसे खनन, बंदरगाह और कमर्शियल परिवहन पर केंद्रित लक्षित रणनीति अपनानी चाहिए।
एसोचैम (ASSOCHAM) द्वारा आयोजित 'Building India an Electric Mobility Hub' राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कपूर ने कहा कि ऐसे विशेष सेक्टर और कॉरिडोर की पहचान की जानी चाहिए, जहां पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतिगत समर्थन के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों का तेजी से विस्तार किया जा सके।
उन्होंने कहा कि जहां चार्जिंग सुविधाएं उपलब्ध हों, वहां इलेक्ट्रिक वाहन बिना किसी बाधा के संचालित हो सकते हैं। इसलिए भारत को "वन-साइज-फिट्स-ऑल" मॉडल के बजाय सेक्टर-विशिष्ट रणनीति अपनाने की आवश्यकता है।
कपूर ने इलेक्ट्रिक वाहनों की शुरुआती लागत कम करने पर भी जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि बैटरी को वाहन से अलग खरीदने या थर्ड-पार्टी बैटरी ओनरशिप जैसे नवाचारी वित्तीय मॉडल अपनाकर EV को आम खरीदारों और फ्लीट ऑपरेटरों के लिए अधिक किफायती बनाया जा सकता है।
उन्होंने बड़े ट्रक फ्लीट संचालित करने वाली कंपनियों से भी अपील की कि जैसे-जैसे व्यावसायिक रूप से उपयुक्त इलेक्ट्रिक ट्रक उपलब्ध हों, वे अपनी खरीद में इलेक्ट्रिक ट्रकों की हिस्सेदारी बढ़ाएं। उनके अनुसार, यदि ऐसा मॉडल तैयार किया जाए जिससे यह आर्थिक बोझ न बने, तो उद्योग निश्चित रूप से इसे अपनाएगा।
कपूर ने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का दायरा केवल सरकारी वाहनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। स्कूल बसों, कर्मचारियों के परिवहन और निजी बस ऑपरेटरों को भी इस परिवर्तन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इसके लिए प्रभावी नियमों, प्रोत्साहनों और मजबूत चार्जिंग नेटवर्क की आवश्यकता होगी।
उन्होंने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में यह तकनीक सबसे अधिक प्रभावी है, वहां तेजी से इसका विस्तार किया जाना चाहिए। साथ ही उद्योगों को नए उत्पादों, मैन्युफैक्चरीग क्षमता और नवाचारी बिजनेस मॉडल में निवेश बढ़ाना चाहिए, ताकि देश स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की ओर तेजी से आगे बढ़ सके।