इंटरनेट की बढ़ती पहुंच, बेहतर डिलीवरी सिस्टम और ऑनलाइन पेमेंट पर बढ़ते भरोसे की वजह से यह बदलाव देखने को मिल रहा है। खासतौर पर D2C (डायरेक्ट-टू-कस्टमर) सेगमेंट में यह ट्रेंड ज्यादा नजर आ रहा है, जहां ब्रांड सीधे अपने ग्राहकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए प्रोडक्ट बेचते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में करीब 66% नए D2C ऑर्डर टियर-2 और टियर-3 शहरों से आए हैं। यह दिखाता है कि अब मांग केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहर भी तेजी से ई-कॉमर्स ग्रोथ में योगदान दे रहे हैं। इन छोटे शहरों ने पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कुल ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) में करीब 60% की बढ़ोतरी में योगदान दिया है, जो इनके बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
D2C सेक्टर में भी अच्छी वृद्धि देखने को मिली है। इस दौरान ऑर्डर की संख्या में 33% और GMV में 32% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह आंकड़े Uniware प्लेटफॉर्म पर अप्रैल 2024 से फरवरी 2026 के बीच प्रोसेस किए गए 40 करोड़ से ज्यादा ऑर्डर आइटम्स पर आधारित हैं। इसमें 6,000 से ज्यादा डिजिटल ब्रांड्स के डेटा का विश्लेषण किया गया है।
जैसे-जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से मांग बढ़ रही है, कंपनियां अपनी डिलीवरी और सप्लाई सिस्टम को भी बेहतर बना रही हैं। Shipway के डेटा के अनुसार, नवंबर 2025 के फेस्टिव सीजन में जहां रिटर्न-टू-ओरिजिन (RTO) रेट करीब 39% था, वह फरवरी 2026 तक घटकर लगभग 21% रह गया। यह गिरावट दिखाती है कि अब कंपनियां ऑर्डर वेरिफिकेशन और डिलीवरी प्रक्रिया को ज्यादा बेहतर तरीके से मैनेज कर रही हैं।
टेक्नोलॉजी भी ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए प्रोडक्ट सुझाव, चैट सपोर्ट और पर्सनलाइज्ड सर्विसेज दी जा रही हैं, जिससे ग्राहक की जरूरतों को समझना आसान हो गया है और ब्रांड बेहतर सर्विस दे पा रहे हैं।
भारत का D2C बाजार फिलहाल 10–12 बिलियन डॉलर का माना जाता है, जो 2030 तक बढ़कर करीब 60 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। आने वाले समय में इस सेक्टर में सफलता के लिए बेहतर ऑपरेशंस, ग्राहक बनाए रखना (रिटेंशन) और अच्छी सर्विस क्वालिटी सबसे महत्वपूर्ण होंगे। छोटे शहरों में ई-कॉमर्स का बढ़ता विस्तार और नई टेक्नोलॉजी मिलकर इस क्षेत्र के भविष्य को और मजबूत बनाएंगे।