Amazon और Tata Motors ने भारत में Amazon के परिवहन नेटवर्क में 3,000 इलेक्ट्रिक ट्रक तैनात करने के लिए साझेदारी की घोषणा की है। यह देश में किसी ई-कॉमर्स कंपनी द्वारा इलेक्ट्रिक ट्रकों की अब तक की सबसे बड़ी तैनाती होगी। इस पहल के साथ Amazon ने लास्ट-माइल डिलीवरी से आगे बढ़कर अपने परिवहन बेड़े को इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने दिल्ली में इलेक्ट्रिक ट्रकों के पहले बैच को हरी झंडी दिखाई।
इस साझेदारी के तहत Tata Motors इलेक्ट्रिक ट्रकों की आपूर्ति करेगी, जबकि Amazon के परिवहन साझेदार इन ट्रकों के मालिक होंगे और उनका संचालन करेंगे। इसकी शुरुआत त्योहारी सीजन के दौरान दिल्ली से होगी, जब माल ढुलाई की मांग सबसे अधिक रहती है। शुरुआती चरण में Amazon के मिडिल-माइल नेटवर्क में हल्के और मध्यम श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रक शामिल किए जाएंगे। इनमें Tata Ultra E.7 से शुरुआत होगी।
2,800 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को इलेक्ट्रिक बनाने का लक्ष्य
अगले चरण में इस पहल का विस्तार राष्ट्रीय राजमार्गों तक किया जाएगा। इसके तहत NH48 पर दिल्ली-बेंगलुरु-चेन्नई के बीच 2,800 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को इलेक्ट्रिक ट्रकों के अनुकूल बनाने का लक्ष्य है। यह भारत का सबसे लंबा माल ढुलाई कॉरिडोर है, जो सात राज्यों और ई-कॉमर्स के छह प्रमुख क्षेत्रों से होकर गुजरता है। इसके लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने वाली कंपनी Yahhvi के साथ मिलकर चार्जिंग हब विकसित किए जा रहे हैं।
यह पहल दिल्ली की 2026 की इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति के बाद शुरू की जा रही है। इस नीति के तहत, लॉन्च के बाद तीन महीनों में पंजीकृत होने वाले शुरुआती 1,000 निजी स्वामित्व वाले मध्यम श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों को अगले 10 वर्षों तक दिन के किसी भी समय दिल्ली में प्रवेश की अनुमति मिलेगी। उन्हें निर्धारित ‘नो एंट्री’ समय की पाबंदियों से छूट दी जाएगी।
Tata Ultra E.7 में मिलेंगी आधुनिक सुरक्षा और चार्जिंग सुविधाएं
Tata Ultra E.7 में इंटीग्रेटेड ई-एक्सल, CCS2 फास्ट चार्जिंग और रीजनरेटिव ब्रेकिंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं। इसके अलावा, ट्रक में क्रैश टेस्ट से प्रमाणित केबिन और हाई-वोल्टेज सुरक्षा प्रणालियां भी शामिल हैं।
यह साझेदारी Amazon की पहले से चल रही पहलों को आगे बढ़ाती है। इनमें Yahhvi की मदद से विकसित किए गए 10 चार्जिंग यार्ड, C40 Cities के साथ मिलकर शुरू किया गया Laneshift कार्यक्रम और SUPEREV डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं। Laneshift कार्यक्रम के तहत बेंगलुरु-चेन्नई कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक ट्रकों का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था। वहीं, The Climate Pledge की ओर से विकसित SUPEREV प्लेटफॉर्म का उद्देश्य व्यावसायिक इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
15,000 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन पहले से संचालित: Amazon
Amazon APAC, मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और तुर्की के ऑपरेशंस के वाइस प्रेसिडेंट अभिनव सिंह ने कहा, “भारत में हमने महत्वपूर्ण प्रगति की है। वर्तमान में 500 से अधिक शहरों में 15,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन संचालित हो रहे हैं। अब हम इलेक्ट्रिक ट्रकिंग को बड़े स्तर पर बढ़ाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इसके जरिए परिवहन क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन कम करने की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।”
Tata Motors के ट्रक्स बिजनेस के वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड राजेश कौल ने कहा, “Amazon India के साथ काम करते हुए हम केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की तैनाती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विसिंग और संचालन से जुड़ा सहयोग भी उपलब्ध करा रहे हैं।”