इस पहल के तहत विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को नई तकनीकों के विकास, परीक्षण और कार्यान्वयन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे जल सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकें।
नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित जल अनुसंधान एवं विकास पर राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस मिशन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन, वरिष्ठ वैज्ञानिक, शिक्षाविद, शोधकर्ता और उद्योग प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
अनुसंधान वित्तपोषण को अधिक समावेशी बनाने की पहल
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ANRF का प्रमुख उद्देश्य अनुसंधान वित्तपोषण का लोकतंत्रीकरण करना है। उन्होंने बताया कि लंबे समय से शोध अनुदान का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा संस्थानों तक सीमित रह जाता था, जबकि छोटे विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और युवा नवप्रवर्तकों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते थे। ANRF इस व्यवस्था को बदलते हुए देशभर के शोधकर्ताओं और संस्थानों को समान अवसर प्रदान करने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मिशनों, वैज्ञानिक संसाधनों और नवाचार समर्थन तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है। इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद प्रतिभाओं को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा और अनुसंधान संस्कृति को मजबूत आधार प्राप्त होगा।
मिशन मोड में आगे बढ़ेगा नवाचार
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि ANRF ने जल, इलेक्ट्रिक वाहन, ड्रोन, चिकित्सा प्रौद्योगिकी और 6जी संचार जैसे क्षेत्रों में मिशन एडवांसिंग हाई-इम्पैक्ट एरियाज (MAHA) कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन मिशनों का उद्देश्य केवल अकादमिक शोध तक सीमित न रहकर तकनीकों को प्रयोगशाला से समाज तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि महा जल मिशन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह शिक्षा जगत, उद्योग, स्टार्टअप्स और सरकारी संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा तथा जल प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं के लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित करेगा।
छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर
मंत्री ने कहा कि यह मिशन उच्च शिक्षा संस्थानों के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए भी बड़े अवसर लेकर आएगा। जल संसाधन प्रबंधन, जल गुणवत्ता, पेयजल, जलवायु परिवर्तन और जल संरक्षण जैसे विषयों पर अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रह सकती। छात्रों को वास्तविक समस्याओं पर काम करने और समाज के लिए उपयोगी समाधान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। महा जल मिशन उन्हें इसी प्रकार के अवसर प्रदान करेगा।
200 करोड़ रुपये का बजट और 20 करोड़ तक की सहायता
महा जल मिशन को अगले पांच वर्षों में 200 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट के साथ लागू किया जाएगा। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं, अनुसंधान संगठनों, स्टार्टअप्स और उद्योग भागीदारों के बहु-विषयक समूहों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
चयनित परियोजनाओं को 20 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। यह सहायता तकनीकी विकास, क्षेत्रीय परीक्षण, सत्यापन और बड़े स्तर पर कार्यान्वयन के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। इससे शोध को प्रयोगशाला से निकालकर जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
इसरो की तकनीक का मिलेगा लाभ
कार्यक्रम के दौरान जल शक्ति मंत्रालय और अंतरिक्ष विभाग/इसरो के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर भी किए गए। इसके तहत उपग्रह तकनीक, भू-स्थानिक डेटा और वैज्ञानिक विश्लेषण का उपयोग जल संसाधनों की मैपिंग, भूजल आकलन, सिंचाई योजना और जल अवसंरचना विकास में किया जाएगा।
इस सहयोग से शोधकर्ताओं और छात्रों को अत्याधुनिक तकनीकों के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। साथ ही जल क्षेत्र में डेटा आधारित निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होगी।
स्टार्टअप्स और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है। एक दशक पहले जहां देश में कुछ सौ स्टार्टअप थे, वहीं आज उनकी संख्या दो लाख से अधिक हो चुकी है। इन स्टार्टअप्स ने लाखों रोजगार सृजित किए हैं और नवाचार आधारित विकास को नई दिशा दी है।
उन्होंने कहा कि महा जल मिशन का उद्देश्य भी युवा उद्यमियों, शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों को राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान से जोड़ना है। इससे रोजगार, तकनीकी विकास और अनुसंधान के नए अवसर पैदा होंगे।
शिक्षा और जल सुरक्षा को जोड़ने वाली पहल
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि जल सुरक्षा भारत के विकास की आधारशिला है। उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और जनभागीदारी को जल प्रबंधन की सफलता के लिए आवश्यक बताया।
विशेषज्ञों के अनुसार, महा जल मिशन केवल एक अनुसंधान कार्यक्रम नहीं बल्कि शिक्षा, विज्ञान, उद्योग और उद्यमिता को एक मंच पर लाने वाली राष्ट्रीय पहल है। इससे विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, स्टार्टअप्स और छात्रों को नई संभावनाएं मिलेंगी। साथ ही यह मिशन भारत को जल प्रबंधन, वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।