जनजातीय कार्य मंत्रालय की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के लाभार्थियों के एक समूह ने 2 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने जनजातीय युवाओं को शिक्षा, कौशल और प्रौद्योगिकी के माध्यम से आगे बढ़ने तथा देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
लाभार्थी छात्रों और युवाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल सही मार्गदर्शन, सहयोग और अवसर उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति योजनाओं के लाभार्थियों की सफलता यह साबित करती है कि यदि उचित अवसर दिए जाएं तो गांवों, दूरदराज के इलाकों और जनजातीय क्षेत्रों से आने वाले युवा भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
छात्रवृत्ति योजनाएं बना रही हैं सपनों को साकार
राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय समुदायों के सामाजिक और शैक्षिक विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति योजनाएं केवल आर्थिक सहायता देने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने का कार्य करती हैं। इन योजनाओं के माध्यम से ऐसे छात्रों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है जिनमें प्रतिभा तो भरपूर होती है, लेकिन संसाधनों की कमी उनके विकास में बाधा बन जाती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, छात्रवृत्ति और मार्गदर्शन के माध्यम से जनजातीय युवाओं के लिए उच्च शिक्षा, शोध, कौशल विकास और रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं। इससे वे अपने जीवन के साथ-साथ अपने समुदाय और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
शिक्षा है सशक्तिकरण की सबसे बड़ी ताकत
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति को आत्मनिर्भर, जागरूक और सक्षम बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनकी सफलता की यात्रा में शिक्षा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शिक्षा ने उन्हें चुनौतियों का सामना करने, आत्मविश्वास विकसित करने और समाज की सेवा करने की शक्ति प्रदान की।
उन्होंने लाभार्थी युवाओं से कहा कि उनकी उपलब्धियां उन लाखों बच्चों के लिए प्रेरणा बन सकती हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। यदि सफल युवा दूसरों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे, तो देश में समावेशी विकास का लक्ष्य और मजबूत होगा।
अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहें युवा
राष्ट्रपति ने कहा कि युवा देश की शक्ति, आशा और उज्ज्वल भविष्य के प्रतीक हैं। उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय समुदायों से आने वाले युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों को कभी न भूलें। आधुनिक शिक्षा और तकनीक को अपनाने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि भारत की जनजातीय परंपराएं, ज्ञान और जीवनशैली देश की अमूल्य धरोहर हैं। युवा यदि अपनी पहचान और विरासत पर गर्व करेंगे, तो वे आधुनिकता और परंपरा के बीच बेहतर संतुलन स्थापित कर सकेंगे।
शिक्षा और तकनीक से बनेगा विकसित भारत
राष्ट्रपति ने कहा कि जब युवा शिक्षा और प्रौद्योगिकी की शक्ति के साथ आगे बढ़ेंगे, तो वे एक मजबूत, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है और इस लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने युवाओं को विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, उद्यमिता, प्रशासन, शोध और सामाजिक सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित किया। राष्ट्रपति ने कहा कि युवा जिस भी क्षेत्र को चुनें, वे अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकते हैं।
जनजातीय शिक्षा को मिल रहा नया बल
विशेषज्ञों का मानना है कि जनजातीय छात्रों के लिए संचालित छात्रवृत्ति योजनाएं शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन योजनाओं के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उच्च अध्ययन और कौशल विकास के अवसर मिल रहे हैं। इससे जनजातीय समुदायों में शिक्षा का स्तर बढ़ने के साथ-साथ देश के समग्र विकास को भी नई गति मिल रही है।
राष्ट्रपति और छात्रवृत्ति लाभार्थियों की यह मुलाकात इस बात का प्रतीक है कि शिक्षा, अवसर और सही मार्गदर्शन के माध्यम से देश का प्रत्येक युवा अपनी क्षमता को पहचान सकता है और राष्ट्र निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकता है।