भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। पहले लोग ईवी को केवल शहरों के अंदर छोटी दूरी की यात्रा के लिए बेहतर मानते थे, लेकिन अब तकनीक और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ इलेक्ट्रिक वाहन लंबी दूरी की यात्रा के लिए भी तैयार हो रहे हैं। ऐसे में “इंटरसिटी ईवी चार्जिंग” यानी एक शहर से दूसरे शहर के बीच चार्जिंग नेटवर्क का मजबूत होना बेहद जरूरी बन गया है।
आज भी कई लोग इलेक्ट्रिक कार खरीदने से इसलिए हिचकते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि लंबी यात्रा के दौरान बैटरी खत्म हो सकती है और रास्ते में चार्जिंग स्टेशन नहीं मिलेगा। इसे ही “रेंज एंग्जायटी” कहा जाता है। अगर हाईवे और प्रमुख मार्गों पर भरोसेमंद चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हों, तो लोग बिना चिंता के ईवी से लंबी दूरी तय कर सकेंगे।
सरकार और निजी कंपनियां मिलकर देशभर में ईवी चार्जिंग नेटवर्क को तेजी से बढ़ा रही हैं। आज कई कंपनियां हाईवे, होटल, मॉल, पेट्रोल पंप और फूड कोर्ट जैसी जगहों पर फास्ट चार्जर लगा रही हैं। इससे यात्रियों को सफर के दौरान आसानी से चार्जिंग सुविधा मिल रही है।
फास्ट चार्जिंग तकनीक की वजह से अब ईवी को घंटों तक चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती। कई आधुनिक चार्जर 20–30 मिनट में बैटरी का बड़ा हिस्सा चार्ज कर देते हैं। इससे लंबी दूरी की यात्रा पहले की तुलना में काफी आसान हो गई है।
स्टेटिक के फाउंडर और सीईओ अक्षित बंसल ने कहा कि भारत में इंटरसिटी ईवी चार्जिंग अब सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर की नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे की चुनौती बन गई है। असली समस्या यह नहीं है कि चार्जर मौजूद हैं या नहीं, बल्कि यह है कि लोग लंबी यात्रा के दौरान उन पर लगातार भरोसा कर सकें। जब परिवार, फ्लीट ऑपरेटर और बिजनेस ट्रैवलर उसी भरोसे के साथ ईवी से यात्रा करने लगेंगे जैसे वे पेट्रोल-डीजल गाड़ियों से करते हैं, तब ईवी अपनाना लोगों की आदत बन जाएगा।
उन्होंने कहा कि स्टेटिक (Statiq) ने अपना नेटवर्क भारत की वास्तविक यात्रा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया है। आज कंपनी 1,000 से ज्यादा शहरों में 10,000 से ज्यादा ईवी चार्जर चला रही है, जिससे यह देश के सबसे बड़े और सुलभ चार्जिंग नेटवर्क में से एक बन गया है। कंपनी का ध्यान शहरों के साथ-साथ हाईवे और प्रमुख ट्रैवल रूट्स पर फास्ट चार्जर लगाने पर भी है, ताकि लंबी दूरी की यात्रा आसान हो सके।
अक्षित बंसल ने कहा कि ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर का अगला चरण सिर्फ ज्यादा चार्जर लगाने का नहीं, बल्कि बेहतर और भरोसेमंद अनुभव देने का है। इंटरसिटी यात्रा के लिए चार्जर उन जगहों पर होने चाहिए जहां लोग सामान्य रूप से रुकते हैं, जैसे हाईवे, फूड कोर्ट, होटल और सुरक्षित रेस्ट ज़ोन। साथ ही चार्जर का सही तरीके से काम करना और तेजी से चार्जिंग देना भी बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि स्टेटिक (Statiq) इसे एक पूरे इकोसिस्टम के रूप में देखता है, जहां हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, वाहन कंपनियां, फ्लीट पार्टनर, रियल एस्टेट और सरकारी संस्थाएं मिलकर काम करें, ताकि ईवी यात्रा को बड़े स्तर पर आसान बनाया जा सके।
अक्षित बंसल के अनुसार, यदि भारत इंटरसिटी ईवी चार्जिंग नेटवर्क को सही तरीके से विकसित कर लेता है, तो इसका असर सिर्फ आसान रोड ट्रिप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा। यही भरोसा Tier-2 और Tier-3 शहरों में ईवी अपनाने को तेज करेगा और लाखों भारतीयों के लिए इलेक्ट्रिक यात्रा को व्यावहारिक, भरोसेमंद और सामान्य बना देगा।
ऑमोवियो इंडिया(AUMOVIO India) के प्रेज़िडेंट और सीईओ प्रशांत डोरेस्वामीने कहा कि दुनिया तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर बढ़ रही है और इसके साथ ही सुरक्षा, बेहतर परफॉरमेंस और लंबी दूरी की यात्रा से जुड़ी तकनीकों में भी बड़ा बदलाव देखा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (BEVs) में एडवांस सेंसर सिस्टम बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, हाई-वोल्टेज सिस्टम, थर्मल मैनेजमेंट और इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। AI आधारित डायग्नोस्टिक्स, IoT मॉनिटरिंग और स्मार्ट सेफ्टी तकनीकों की मदद से वाहनों की कार्यक्षमता, ऊर्जा बचत और लंबे समय तक भरोसेमंद प्रदर्शन बेहतर हो रहा है।
प्रशांत डोरेस्वामी ने कहा कि ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तेजी से मजबूत हो रहा है। फास्ट चार्जिंग, हाई-पावर चार्जिंग और स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट जैसी तकनीकों से अब शहरों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों से यात्रा करना अधिक आसान और भरोसेमंद बन रहा है।
उन्होंने कहा कि ये सभी नई तकनीकें मिलकर भविष्य में सुरक्षित, स्मार्ट और पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
सरकार का बड़ा कदम
इंटरसिटी ईवी चार्जिंग को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार भी तेजी से काम कर रही है। हाल ही में भारी उद्योग मंत्रालय ने बेंगलुरु में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इस दौरान केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने प्रधानमंत्री ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना के तहत देशभर में 4,874 ईवी चार्जरों की स्थापना के लिए 503.86 करोड़ रुपये की मंजूरी की घोषणा की।
इस योजना के तहत कर्नाटक में 1,243 चार्जर लगाने के लिए 123.26 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, तेलंगाना, तमिलनाडु और अन्य राज्यों में भी चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।
सरकार ने बताया कि इस परियोजना में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी प्रमुख तेल कंपनियां अहम भूमिका निभाएंगी। यह नेटवर्क इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, कार, बस और ट्रकों को सपोर्ट करेगा।
PM E-DRIVE योजना से मिलेगा बड़ा फायदा
पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना का कुल बजट 10,900 करोड़ रुपये रखा गया है। इसमें से 2,000 करोड़ रुपये सार्वजनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 3,679 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि तय की गई है। वहीं देशभर में 14,028 इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती के लिए 4,391 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार वाहन परीक्षण एजेंसियों के आधुनिकीकरण पर भी 780 करोड़ रुपये खर्च करेगी, ताकि ईवी इकोसिस्टम को और मजबूत बनाया जा सके।
निष्कर्ष
भारत में इंटरसिटी ईवी चार्जिंग नेटवर्क का तेजी से विस्तार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के भविष्य को मजबूत बना रहा है। सरकार, निजी कंपनियों और टेक्नोलॉजी कंपनियों के संयुक्त प्रयासों से अब इलेक्ट्रिक वाहनों से लंबी दूरी की यात्रा पहले से अधिक आसान, सुरक्षित और भरोसेमंद बनती जा रही है।
फास्ट चार्जिंग, स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट, AI आधारित तकनीक और मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर न केवल लोगों की “रेंज एंग्जायटी” को कम करेंगे, बल्कि Tier-2 और Tier-3 शहरों में भी EV अपनाने को तेज करेंगे। आने वाले समय में यह बदलाव भारत को स्वच्छ, स्मार्ट और टिकाऊ परिवहन प्रणाली की ओर तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।