सरकार का बड़ा कदम: EV चार्जिंग नेटवर्क को मिलेगा डिजिटल प्लेटफॉर्म

सरकार का बड़ा कदम: EV चार्जिंग नेटवर्क को मिलेगा डिजिटल प्लेटफॉर्म

सरकार का बड़ा कदम: EV चार्जिंग नेटवर्क को मिलेगा डिजिटल प्लेटफॉर्म
भारत सरकार यूनिफाइड भारत ई-चार्ज (UBC) प्लेटफॉर्म के जरिए देश के ईवी चार्जिंग नेटवर्क को एकीकृत और आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है। इस पहल से यूजर्स को एक ही ऐप पर चार्जिंग स्टेशन, बुकिंग और पेमेंट की सुविधा मिलेगी, जिससे ईवी अपनाने की रफ्तार बढ़ेगी।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच केंद्र सरकार जल्द ही यूनिफाइड भारत ई-चार्ज (Unified Bharat e-Charge - UBC) नामक एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म लाने की तैयारी में है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देशभर में फैले ईवी चार्जिंग नेटवर्क को एकीकृत करना और उपयोगकर्ताओं को एक आसान, पारदर्शी और भरोसेमंद चार्जिंग अनुभव प्रदान करना है।

अब तक ईवी उपयोगकर्ताओं को अलग-अलग कंपनियों के चार्जिंग स्टेशनों की जानकारी पाने के लिए कई मोबाइल ऐप डाउनलोड करने पड़ते थे। यदि किसी को टाटा मोटर्स के चार्जर की जानकारी चाहिए होती थी, तो अलग ऐप की जरूरत पड़ती थी, वहीं निजी ऑपरेटर्स जैसे स्टेटिक या चार्जज़ोन के लिए अलग प्लेटफॉर्म उपयोग करना पड़ता था। यही अव्यवस्था ईवी उपयोगकर्ताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन रही थी।

यूबीसी (UBC) प्लेटफॉर्म इस समस्या का समाधान एक सेंट्रल डिजिटल हब के रूप में करेगा। इसके जरिए ईवी चालक देशभर में विभिन्न ऑपरेटर्स के चार्जिंग स्टेशनों को एक ही ऐप पर खोज सकेंगे, स्लॉट बुक कर सकेंगे और डिजिटल भुगतान भी कर पाएंगे। इस प्लेटफॉर्म पर मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki), महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) और टाटा मोटर्स (Tata Motors) जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ-साथ इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corporation) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Bharat Petroleum Corporation Limited) जैसी सरकारी तेल कंपनियों के चार्जिंग नेटवर्क भी एक साथ उपलब्ध होंगे।

यह नया सरकारी ऐप ईवी उपयोगकर्ताओं को रियल-टाइम जानकारी भी देगा। ऐप के माध्यम से लोग यह जान सकेंगे कि कौन सा चार्जर खाली है, कहां लंबी लाइन लगी है, कौन सा स्टेशन फिलहाल काम नहीं कर रहा है और किस चार्जर की स्पीड कितनी है। साथ ही, चार्जिंग टैरिफ और अपटाइम जैसी जानकारी भी लाइव उपलब्ध होगी, जिससे उपयोगकर्ताओं को बेहतर निर्णय लेने में आसानी होगी।

ईवी  उपयोगकर्ताओं के बीच “रेंज एंग्जायटी” यानी चार्ज खत्म होने की चिंता एक बड़ी समस्या मानी जाती है। कई बार ड्राइवर चार्जिंग स्टेशन पहुंचते हैं और पता चलता है कि चार्जर खराब है या पहले से लंबी कतार लगी हुई है। यूबीसी (UBC) प्लेटफॉर्म इस परेशानी को काफी हद तक कम करेगा, क्योंकि ऐप पर चार्जर की स्थिति और उपलब्धता की सटीक जानकारी मिलेगी।

BHEL निभा रहा है अहम भूमिका

भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (BHEL) इस यूनिफाइड डिजिटल ऐप को विकसित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। यह प्लेटफॉर्म ईवी उपयोगकर्ताओं को एक ही ऐप पर कई सुविधाएं उपलब्ध कराएगा, जिनमें नजदीकी चार्जिंग स्टेशन ढूंढना, रियल-टाइम में चार्जर की उपलब्धता देखना, स्लॉट बुक करना और डिजिटल पेमेंट करना शामिल है। इस एकीकृत सिस्टम के जरिए यूजर्स को अलग-अलग ऐप्स और पेमेंट प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करना पड़ेगा, जिससे ईवी चार्जिंग अनुभव पहले से ज्यादा आसान और सुविधाजनक बन जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत के ईवी  इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। जिस तरह यूपीआई (UPI) ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम को सरल और व्यापक बनाया, उसी तरह यूबीसी ईवी (UBC EV) चार्जिंग नेटवर्क को ज्यादा इंटरऑपरेबल और यूजर-फ्रेंडली बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

उद्योग की राय

काज़म के सीईओ और को-फाउंडर अक्षय शेखर ने कहा “भारत में हर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव का एक जैसा पैटर्न रहा है  पहले बाजार बिखरा हुआ होता है, फिर एक साझा और एकीकृत सिस्टम आता है और उसके बाद तेजी से विकास होता है। UPI ने डिजिटल पेमेंट्स के लिए यही किया और ONDC ई-कॉमर्स के लिए कर रहा है। अब यूनिफाइड भारत ई-चार्ज (UBC) EV चार्जिंग सेक्टर में वही बदलाव लाएगा।

काज़म (Kazam ) ईवी चार्जिंग नेटवर्क के तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करता है, जिससे ईवी ड्राइवर और चार्जिंग स्टेशन ऑपरेटर दोनों आसानी से UBC नेटवर्क से जुड़ सकें। हम ऐसे प्लेटफॉर्म तैयार कर रहे हैं, जिनकी मदद से चार्जिंग कंपनियां बिना अपना पूरा डिजिटल सिस्टम बदले सीधे राष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा बन सकें। इसमें रियल-टाइम चार्जर डेटा, आसान बिलिंग, डिजिटल पेमेंट और ऑटोमैटिक सेटलमेंट जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

इस पहल में हमारी भागीदारी इस सोच को दर्शाती है कि भारत का ईवी चार्जिंग नेटवर्क ओपन सिस्टम, साझा प्रोटोकॉल और इंटरऑपरेबल टेक्नोलॉजी पर आधारित होना चाहिए, ताकि यह पूरे देश में बड़े स्तर पर आसानी से काम कर सके।”

ज़ेनर्जाइज़ के को-फाउंडर और सीईओ नवनीत डागा ने कहा “यूनिफाइड भारत ई-चार्ज (UBC) का लॉन्च भारत के ईवी  सेक्टर के लिए एक बहुत अच्छा और सही समय पर उठाया गया कदम है। अभी तक ईवी यूजर्स को चार्जिंग के दौरान कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अलग-अलग चार्जिंग कंपनियों के लिए कई ऐप उपयोग करने पड़ते थे, चार्जर उपलब्ध है या नहीं इसकी सही जानकारी नहीं मिलती थी और हर जगह पेमेंट का तरीका भी अलग होता था। इससे रोजमर्रा की चार्जिंग प्रक्रिया जरूरत से ज्यादा मुश्किल बन जाती थी।

यूबीसी (UBC) इस समस्या का समाधान करेगा, क्योंकि यह एक ऐसा साझा प्लेटफॉर्म है जो सभी कंपनियों के चार्जिंग स्टेशनों को एक ही ऐप से जोड़ देगा। इससे यूजर्स आसानी से चार्जिंग स्टेशन ढूंढ सकेंगे और उपयोग कर पाएंगे।

चार्जर की उपलब्धता, चार्जिंग स्पीड और रेट की रियल-टाइम जानकारी मिलने से यूजर्स का अनुभव बेहतर होगा और खासकर निजी ईवी  मालिकों की रेंज एंग्जायटी भी कम होगी। आज कीमत के बाद रेंज एंग्जायटी ईवी खरीदने में दूसरी सबसे बड़ी चिंता है।

ऐसी पहलें लोगों का भरोसा बढ़ाती हैं और ईवी उपयोग को आसान बनाती हैं। इससे इलेक्ट्रिक वाहन केवल शुरुआती उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि आम लोग भी तेजी से ईवी अपनाने लगेंगे। हमें लगता है कि यह भारत के ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।”

ईवी  चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार की बड़ी पहल

भारत सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और देशभर में ईवी चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए कई बड़े कदम उठा रही है। केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने बेंगलुरु में आयोजित सम्मेलन ‘Enabling Nationwide EV Charging Infrastructure’ के दौरान बताया कि PM E-DRIVE योजना के तहत विभिन्न राज्यों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में 4,874 EV चार्जर लगाने के लिए अब तक 503.86 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है।

कर्नाटक में 123.26 करोड़ रुपये की लागत से 1,243 ईवी चार्जर स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी बड़े स्तर पर चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। सरकार ने ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए विशेष रूप से 2,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं।

सरकार बैटरी निर्माण और स्वच्छ वाहन तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए भी निवेश कर रही है। इसमें 18,100 करोड़ रुपये की PLI ACC योजना, 25,938 करोड़ रुपये की PLI ऑटो योजना और 7,280 करोड़ रुपये की REPM योजना शामिल हैं, जिनका उद्देश्य ईवी और हाइड्रोजन वाहनों के लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करना है।

सरकार का यूबीसी ऐप और डिजिटल इंटीग्रेशन पर ध्यान
सरकार की अगली बड़ी पहल नेशनल यूनिफाइड ईवी  चार्जिंग ऐप — यूनिफाइड भारत ई-चार्ज (UBC) — है। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य ईवी  उपयोगकर्ताओं को एक ही डिजिटल इंटरफेस के माध्यम से कई ऑपरेटरों के चार्जिंग नेटवर्क तक पहुंच उपलब्ध कराना है। इससे लोग आसानी से चार्जिंग स्टेशन ढूंढ सकेंगे, स्लॉट बुक कर सकेंगे और डिजिटल पेमेंट भी कर पाएंगे। सरकार इस प्लेटफॉर्म को यूपीआ  की तरह एक परिवर्तनकारी पहल मान रही है, जो देश के EV चार्जिंग इकोसिस्टम को अधिक आसान, भरोसेमंद और इंटरऑपरेबल बनाएगा।

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी तेल कंपनियां देशभर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर रही हैं। FAME-II योजना के तहत इन कंपनियों ने 8,932 ईवी चार्जर स्थापित किए हैं, जिनमें 721 चार्जर अकेले कर्नाटक में लगाए गए हैं।

इसके साथ ही सरकार बिजली मंत्रालय, राज्य सरकारों और उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ मिलकर ग्रिड तैयारियों, मानकीकरण और डिजिटल इंटीग्रेशन पर भी काम कर रही है, ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में भरोसेमंद और किफायती ईवी चार्जिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

सरकार की यह पहल न केवल ईवी उपयोगकर्ताओं के अनुभव को बेहतर बनाएगी, बल्कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। एकीकृत, पारदर्शी और भरोसेमंद चार्जिंग नेटवर्क के साथ भारत का ईवी सेक्टर आने वाले वर्षों में नई गति पकड़ सकता है।

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