अशोक लेलैंड (Ashok Leyland) ने कहा है कि वह वित्त वर्ष 2028 (FY28) की पहली छमाही तक अपने इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी पैक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में उत्पादन शुरू करने की योजना बना रही है। कंपनी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और लोकलाइजेशन रणनीति को मजबूत करने के तहत इस परियोजना को आगे बढ़ा रही है।
गुरुवार को आयोजित मीडिया कॉल के दौरान कंपनी प्रबंधन ने बताया कि चीनी बैटरी निर्माता CALB के साथ साझेदारी में विकसित किया जा रहा यह बैटरी पैक प्रोजेक्ट तय समय के अनुसार आगे बढ़ रहा है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर शेनू अग्रवाल ने कहा, “यह परियोजना शेड्यूल के अनुसार प्रगति कर रही है। हमें उम्मीद है कि अगले वित्त वर्ष की पहली या दूसरी तिमाही तक इस बैटरी पैक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में उत्पादन शुरू हो जाएगा।”
यह सुविधा चेन्नई के पास पिल्लईपक्कम में स्थापित की जा रही है और इसका उपयोग कंपनी के इलेक्ट्रिक बस एवं इलेक्ट्रिक लाइट कमर्शियल व्हीकल कारोबार को समर्थन देने के लिए किया जाएगा। कंपनी अपनी ईवी सहायक इकाई स्विच मोबिलिटी के माध्यम से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कारोबार का लगातार विस्तार कर रही है, जिसने FY26 में लाभप्रदता हासिल की।
कंपनी के अनुसार, स्विच इंडिया ने FY26 में इलेक्ट्रिक बस बिक्री में 238 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और 1,530 ई-बसों की बिक्री की। वहीं इलेक्ट्रिक लाइट कमर्शियल व्हीकल बिक्री 56 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1,600 यूनिट तक पहुंच गई। प्रबंधन का कहना है कि भारत में इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों, खासकर बस सेगमेंट में मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
धीरज हिंदुजा ने कहा, “बाजार लगातार अच्छा परफॉरमेंस कर रहा है। पिछले कुछ महीनों में करीब 15,000 वाहनों के लिए टेंडर जारी हुए हैं, जिससे स्पष्ट है कि इलेक्ट्रिक बसों की मांग तेजी से बढ़ रही है।” उन्होंने कहा कि लाइट CV सेगमेंट के अलावा 55 टन जैसे भारी वाहनों में भी निजी ग्राहक इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हालिया कीमतों में वृद्धि के बावजूद इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल लागत (TCO) अब अधिक आकर्षक बन रही है। कंपनी के मुताबिक, भारत वैकल्पिक ईंधन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने के मामले में वैश्विक स्तर पर तेज प्रगति कर रहा है।
बैटरी पैक लोकलाइजेशन को कमर्शियल वाहन कंपनियों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे लागत कम करने, सप्लाई चेन पर बेहतर नियंत्रण और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाने में मदद मिलती है। कंपनी ने हाल ही में लखनऊ में नया इलेक्ट्रिक बस निर्माण संयंत्र भी शुरू किया है और इलेक्ट्रिक व हाइड्रोजन आधारित कमर्शियल वाहनों में निवेश जारी रखने की बात कही है।