एस्ट्रानोवा मोबिलिटी की NovaFusion Capital को RBI से NBFC लाइसेंस

एस्ट्रानोवा मोबिलिटी की NovaFusion Capital को RBI से NBFC लाइसेंस

एस्ट्रानोवा मोबिलिटी की NovaFusion Capital को RBI से NBFC लाइसेंस
एस्ट्रानोवा मोबिलिटी की सब्सिडियरी नोवाफ्यूज़न कैपिटल को आरबीआई से एनबीएफसी लाइसेंस मिल गया है, जिससे कंपनी अब इलेक्ट्रिक वाहनों की लीजिंग के साथ सीधे कर्ज भी दे सकेगी।

एस्ट्रानोवा मोबिलिटी (Astranova Mobility) की लेंडिंग सब्सिडियरी नोवाफ्यूजन कैपिटल (NovaFusion Capital) को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के रूप में काम करने की मंजूरी मिल गई है। कंपनी के अनुसार, आवेदन के 90 दिनों के भीतर यह लाइसेंस मिला है। इसके साथ ही कंपनी मौजूदा इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) लीजिंग और एसेट मैनेजमेंट कारोबार के अलावा सीधे कर्ज देने वाले उत्पाद भी पेश कर सकेगी। कंपनी ने शुरुआती चरण में ₹200 करोड़ के कर्ज वितरण के लिए पूंजी की व्यवस्था पहले ही कर ली है।

वर्ष 2023 में कुनाल मुंद्रा (Kunal Mundra) और ग्रिप इन्वेस्ट (Grip Invest) द्वारा स्थापित एस्ट्रानोवा मोबिलिटी पहले इलेक्ट्रिफाई मोबिलिटी (Electrifi Mobility) के नाम से काम करती थी। कंपनी इलेक्ट्रिक वाहनों के एसेट मैनेजमेंट और फाइनेंसिंग से जुड़ी सेवाएं प्रदान करती है। अब तक कंपनी दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों और बसों सहित 35,000 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों को फंडिंग उपलब्ध करा चुकी है। कंपनी के अपने और साझेदारों के बैलेंस शीट के माध्यम से कुल ₹450 करोड़ से अधिक की राशि तैनात की जा चुकी है। इसके निवेशकों में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB), आइवीकैप वेंचर्स (IvyCap Ventures), एडवांटएज फाउंडर्स (AdvantEdge Founders) और ट्रक्स वेंचर कैपिटल (Trucks Venture Capital) शामिल हैं।

एनबीएफसी (NBFC) लाइसेंस मिलने से कंपनी का कारोबार वाहन लीजिंग और एसेट मैनेजमेंट से आगे बढ़कर सीधे कर्ज देने तक पहुंच जाएगा। नोवाफ्यूजन कैपिटल का फोकस कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों के स्वामित्व और संचालन से जुड़े वित्तीय पहलुओं पर रहेगा। कंपनी के अनुसार, कर्ज देने के लिए केवल उधार लेने वाले व्यक्ति की क्रेडिट हिस्ट्री नहीं, बल्कि वाहन का इस्तेमाल, टेलीमैटिक्स डेटा और उससे होने वाली कमाई की क्षमता भी देखी जाएगी।

कंपनी का मानना है कि पारंपरिक कर्जदाता गिग वर्कर्स और तीन व चार पहिया वाहन चालकों को वित्तीय सहायता देने में पीछे रहे हैं। इसकी एक वजह यह है कि मौजूदा क्रेडिट मॉडल ऐसे लोगों की जरूरतों के अनुरूप नहीं बनाए गए हैं, जिनकी कमाई सीधे वाहन के इस्तेमाल पर निर्भर करती है। नोवाफ्यूजन कैपिटल इसी अंतर को दूर करने के लिए कमर्शियल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर केंद्रित फाइनेंसिंग मॉडल विकसित करना चाहती है।

भारत में कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों की फाइनेंसिंग के क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं हैं। अनुमान है कि देश में गिग वर्कर्स की संख्या 2030 तक लगभग एक करोड़ से बढ़कर तीन करोड़ हो सकती है। वहीं, कमर्शियल वाहनों को स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन में बदलने के लिए उद्योग के अनुमानों के अनुसार करीब 100 अरब अमेरिकी डॉलर की फंडिंग की जरूरत हो सकती है। फिलहाल, इस क्षेत्र के लिए विशेष रूप से तैयार फाइनेंसिंग विकल्प सीमित हैं और ज्यादातर संस्थागत कर्जदाता पारंपरिक वाहनों के लिए विकसित क्रेडिट मॉडल का इस्तेमाल करते हैं।

एस्ट्रानोवा मोबिलिटी अपने पांच वर्षों के लीजिंग कारोबार से जुटाए गए टेलीमैटिक्स और वाहन संचालन से जुड़े डेटा का इस्तेमाल कर्ज का आकलन करने के लिए करेगी। इसमें वाहन के प्रदर्शन, उसके इस्तेमाल के तरीके और उससे होने वाली कमाई से संबंधित जानकारी शामिल होगी। कंपनी के अनुसार, यह डेटा कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े कर्ज जोखिम को समझने में मदद कर सकता है।

एस्ट्रानोवा मोबिलिटी के संस्थापक और सीईओ कुनाल मुंद्रा ने कहा कि NBFC लाइसेंस मिलने से कंपनी अपनी एसेट मैनेजमेंट क्षमता को सीधे कर्ज देने के कारोबार में इस्तेमाल कर सकेगी। वहीं, नोवाफ्यूजन कैपिटल की सीईओ श्रद्धा श्रीमल (Shraddha Srimal) ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में मदद के लिए एक ऐसा क्रेडिट मॉडल तैयार करना है, जो खास तौर पर इस क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप हो।

कंपनी ने अगले पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कंपनी को अपने मौजूदा कारोबार का लगातार विस्तार करना होगा। साथ ही, लीजिंग कारोबार में बताए गए कम क्रेडिट लॉस को बनाए रखते हुए सीधे कर्ज वितरण को बढ़ाना भी उसके लिए अहम होगा। अब कंपनी की आगे की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने फाइनेंसिंग मॉडल को कितनी तेजी से और प्रभावी ढंग से विस्तार दे पाती है।

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