रांची में स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मेसरा (BIT Mesra) और भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत कार्यरत नॉर्थ ईस्टर्न स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (NESAC) ने जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, जियोएआई रिसर्च, रिमोट सेंसिंग और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता BIT मेसरा कैंपस में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया गया। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह साझेदारी देश में उभरती स्पेस और जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी रिसर्च को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कार्यक्रम में एनईएसएसी के निदेशक डॉ. एस.पी. अग्रवाल, BIT मेसरा के कुलपति प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना, रिमोट सेंसिंग एंड जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग के विशेषज्ञ, शोधकर्ता, वैज्ञानिक और संस्थान के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत एसोसिएट डीन ऑफ रिसर्च, इनोवेशन एंड एक्सटेंशन डॉ. आनंद प्रसाद सिन्हा के संबोधन से हुई, जबकि विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ए.पी. कृष्णा ने सहयोगात्मक रिसर्च और उभरती जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी के महत्व पर प्रकाश डाला।
इस एमओयू के तहत दोनों संस्थान जियोएआई, रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, स्पेस टेक्नोलॉजी और इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च के क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए इंटर्नशिप, रिसर्च एक्सचेंज, स्पेशलाइज्ड इलेक्टिव कोर्स, गेस्ट फैकल्टी लेक्चर और संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट्स जैसे अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा एनईएसएसी के वैज्ञानिक BIT मेसरा के रिसर्च स्कॉलर्स का संयुक्त मार्गदर्शन भी कर सकेंगे।
NESAC संयुक्त रिसर्च गतिविधियों के लिए जियोस्पेशियल डेटाबेस, सैटेलाइट इमेजरी, मौसम संबंधी डेटा और अर्थ ऑब्जर्वेशन से जुड़ी तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। वहीं BIT मेसरा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिसर्च पहल, ट्रेनिंग प्रोग्राम्स, आउटरीच एक्टिविटीज और इंजीनियरिंग तथा रिमोट सेंसिंग क्षेत्रों में क्षमता निर्माण से जुड़े कार्यों में सहयोग करेगा।
छात्रों को मिलेगा आधुनिक रिसर्च और इंडस्ट्री एक्सपोजर
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस साझेदारी से छात्रों को आधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी और जियोस्पेशियल रिसर्च से जुड़ने का अवसर मिलेगा। मास्टर्स और पीएचडी प्रोग्राम्स से जुड़े छात्रों को रिसर्च प्रोजेक्ट्स, डेटा एनालिसिस, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी और जियोएआई एप्लीकेशंस में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का मौका मिलेगा। इससे छात्रों की रिसर्च क्षमता और तकनीकी कौशल दोनों मजबूत होंगे।
इस साझेदारी के तहत संयुक्त सेमिनार, वर्कशॉप और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स भी आयोजित किए जाएंगे, जिनका फोकस अर्थ ऑब्जर्वेशन इमेज एनालिसिस और नई जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी पर रहेगा। BIT मेसरा, एनईएसएसी के वैज्ञानिकों को गेस्ट फैकल्टी के रूप में भी शामिल कर सकता है। साथ ही NESAC के वैज्ञानिक और रिसर्च स्कॉलर्स संस्थान के नियमों के अनुसार BIT मेसरा में पार्ट-टाइम मास्टर्स और डॉक्टोरल प्रोग्राम्स भी कर सकेंगे।
NESAC के निदेशक डॉ. एस.पी. अग्रवाल ने कहा कि BIT मेसरा और NESAC के बीच लंबे समय से अकादमिक और रिसर्च सहयोग रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थानों की संयुक्त क्षमता रिसर्च, टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट और सामाजिक उपयोग से जुड़े प्रोजेक्ट्स में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
वहीं BIT मेसरा के कुलपति प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना ने कहा कि यह सहयोग प्रभावशाली रिसर्च परिणाम और उच्च गुणवत्ता वाले अकादमिक प्रकाशनों को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों, फैकल्टी और छात्रों के बीच ज्ञान साझा करने और संयुक्त रिसर्च की यह पहल देश में जियोएआई और जियोस्पेशियल रिसर्च को मजबूत बनाएगी।
कार्यक्रम का समापन डीन पीजी स्टडीज डॉ. एस.एस. सोलंकी के संबोधन और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह समझौता पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकेगा।