ईवी की बढ़ती रेंज से हाइब्रिड पर BMW का भरोसा कम

ईवी की बढ़ती रेंज से हाइब्रिड पर BMW का भरोसा कम

ईवी की बढ़ती रेंज से हाइब्रिड पर BMW का भरोसा कम
कंपनी के अनुसार बढ़ती ईवी रेंज और बेहतर परफॉर्मेंस के कारण लग्जरी सेगमेंट में हाइब्रिड का विकल्प कम आकर्षक हो रहा है

जर्मन लग्जरी कार निर्माता बीएमडब्लयू इंडिया (BMW India) को अपने पोर्टफोलियो में हाइब्रिड वाहनों के लिए फिलहाल ज्यादा संभावनाएं नहीं दिख रही हैं। कंपनी का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती रेंज और लग्जरी सेगमेंट में इलेक्ट्रिक कारों को मिल रही तेज स्वीकार्यता ने हाइब्रिड पावरट्रेन के मामले को कमजोर किया है।

बीएमडब्लयू इंडिया के प्रेसिडेंट और सीईओ हरदीप सिंह बराड़ के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों की ड्राइविंग रेंज में सुधार के चलते पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर को मिलाकर हाइब्रिड सिस्टम देने की जरूरत कम हो गई है। उन्होंने कहा कि जब ईवी करीब 728 किलोमीटर तक की रेंज दे रही हैं, तो प्लग-इन हाइब्रिड में अतिरिक्त पेट्रोल इंजन और सिस्टम जोड़ना ज्यादा फायदेमंद नहीं लगता।

बराड़ (Brar) ने कहा कि हाइब्रिड पावरट्रेन में बैटरी और इंजन दोनों होने के कारण वाहन का वजन बढ़ता है और केबिन स्पेस भी प्रभावित होता है। उनके मुताबिक, प्लग-इन हाइब्रिड की पावर और एक्सीलरेशन भी कई मामलों में ऐसी ड्राइविंग फील नहीं देती, जैसी ग्राहक एक लग्जरी कार से उम्मीद करते हैं। इसी वजह से BMW India अपने मौजूदा पोर्टफोलियो में हाइब्रिड वाहनों को शामिल करने की जरूरत नहीं देखती।

बीएमडब्लयू इंडिया की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर रणनीति कंपनी की बिक्री में भी दिखाई दे रही है। जनवरी से जून 2026 के बीच कंपनी ने 2,359 इलेक्ट्रिक वाहन बेचे, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 78% की बढ़ोतरी है। इस अवधि में EVs की हिस्सेदारी BMW Group India की कुल बिक्री में बढ़कर 26% हो गई, जो एक साल पहले 21% थी।

लग्जरी कार सेगमेंट में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। BMW India के अनुसार, कंपनी भारत के लग्जरी ईवी सेगमेंट में 69% हिस्सेदारी के साथ अग्रणी बनी हुई है। इसके मुकाबले मास-मार्केट पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में ईवी की पैठ करीब 7% है, जहां कंपनियां ईवी के साथ हाइब्रिड, CNG और बायोफ्यूल जैसे कई पावरट्रेन विकल्पों पर काम कर रही हैं।

बीएमडब्लयू इंडिया अपने पोर्टफोलियो में डीजल वाहनों को भी बनाए हुए है, हालांकि इनकी मांग में गिरावट आई है। Brar ने कहा कि कंपनी अलग-अलग सेगमेंट में ग्राहकों की पावरट्रेन पसंद के आधार पर अपनी रणनीति तय करती है। पहली छमाही में BMW की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत अंक बढ़ी, जबकि डीजल की हिस्सेदारी 3 प्रतिशत अंक और पेट्रोल की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत अंक कम हुई।

वाहन टैक्सेशन को लेकर Brar ने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि कारों पर केंद्र सरकार के GST ढांचे और राज्यों में लागू अलग-अलग टैक्स के बीच अंतर से बाजार में असमानता पैदा होती है। उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां वाहन टैक्स 10%, हरियाणा में 5% और उत्तर प्रदेश में शून्य है, जिसके कारण कुछ ग्राहक दिल्ली के बाहर वाहन रजिस्टर कराते हैं।

बीएमडब्लयू इंडिया स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग और सोर्सिंग पर भी अपना ध्यान बढ़ा रही है। Brar के अनुसार, भारत में कंपनी के 13 मॉडलों में से 95% स्थानीय स्तर पर निर्मित या लोकलाइज्ड हैं, जबकि केवल 5% मॉडल Completely Built Unit (CBU) के रूप में आते हैं। कंपनी अपने पोर्टफोलियो के विस्तार के साथ आगे भी लोकलाइजेशन बढ़ाने की योजना बना रही है।

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