भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कंपनी Bounce ने Open Network for Digital Commerce (ONDC) के साथ साझेदारी की है। इस सहयोग का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों के जरिए भारत के ओपन लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और लास्ट-माइल डिलीवरी को मजबूत करना है। ओएनडीसी के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर फिलहाल 50 से ज्यादा लॉजिस्टिक्स सर्विस प्रोवाइडर्स, 60,000 से ज्यादा मर्चेंट्स और 1.5 लाख से ज्यादा डिलीवरी पार्टनर्स जुड़े हैं, जबकि नेटवर्क के जरिए रोजाना 12,000 से अधिक डिलीवरी हो रही हैं।
इस साझेदारी के तहत बाउंस की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और फ्लीट ऑपरेशंस क्षमताओं को ओएनडीसी के Open Delivery Protocol (ODP) से जोड़ा जाएगा। इससे अलग-अलग आकार के मर्चेंट्स, ब्रैंड्स और लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर्स को डिजिटल कॉमर्स के लिए एक इंटरऑपेरेबल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तक पहुंच मिल सकेगी। ओएनडीसी (ONDC) का मॉडल मर्चेंट्स को एक ही इंटीग्रेशन के जरिए कई लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर्स से जोड़ने में मदद करता है।
भारत का लॉजिस्टिक्स बाजार बड़ा होने के बावजूद काफी हद तक बिखरा हुआ है। ओएनडीसी (ONDC) का ओपन डिलीवरी प्रोटोकॉल (Open Delivery Protocol) लॉजिस्टिक्स कंपनियों को एक समान डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर देता है। इससे इंटीग्रेशन की जटिलता कम करने, फ्लीट यूटिलाइजेशन बढ़ाने और छोटे फ्लीट ऑपरेटर्स के लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाने में मदद मिल सकती है। इंटेलिजेंट राइडर अलोकेशन और FIFO (First-In-First-Out) ऑर्डर मैचिंग जैसे फीचर्स भी डिलीवरी की दक्षता बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
बाउंस (Bounce) अपने बाउंस टास्क (Bounce Task) प्लेटफॉर्म के जरिए ONDC-enabled लॉजिस्टिक्स सर्विस उपलब्ध करा रही है। कंपनी का बिजनेस मॉडल इलेक्ट्रिक वाहन मैन्युफैक्चरिंग, फ्लीट ऑपरेशंस और गिग-वर्कर सपोर्ट को एक साथ जोड़ता है। कंपनी के मुताबिक, इन-हाउस EV मैन्युफैक्चरिंग और फ्लीट ऑपरेशंस को एकीकृत करने से वाहन की परफॉर्मेंस, उपयोग और ऑपरेटिंग कॉस्ट को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।
ओएनडीसी के सीओओ रोहित लोहिया ने कहा कि मर्चेंट्स और लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर्स को अलग-अलग कंपनियों के साथ जटिल इंटीग्रेशन करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। वहीं बाउंस के सीईओ और को-फाउंडर विवेकानंद हल्लेकेरे ने कहा कि कंपनी का ध्यान राइडर्स को बेहतर इलेक्ट्रिक स्कूटर उपलब्ध कराने और उनकी कमाई बढ़ाने पर है। बाउंस के मुताबिक, उसके प्लेटफॉर्म पर 12,000 से ज्यादा राइडर्स बेंगलुरु, हैदराबाद, एनसीआर और मुंबई में काम कर रहे हैं। कंपनी ने मार्च 2026 में ग्रुप-लेवल प्रॉफिटेबिलिटी हासिल की है, जबकि भिवाड़ी स्थित उसकी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की वार्षिक क्षमता 2 लाख यूनिट है।