भारत में हो रहे महत्वपूर्ण BRICS Summit के बीच ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हो गए हैं। BRICS अब दुनिया की करीब आधी आबादी और Purchasing Power Parity (PPP) के आधार पर वैश्विक GDP के लगभग 40% का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में समूह के सामने क्लीन एनर्जी और सप्लाई चेन सुरक्षा के क्षेत्र में अपने सामूहिक प्रभाव को ठोस नतीजों में बदलने की चुनौती है।
लंबे समय तक ऊर्जा सुरक्षा का मतलब तेल, गैस और कोयले का भंडार बनाए रखना था। हालांकि, क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन के साथ जोखिम अब सप्लाई चेन के दूसरे हिस्सों में शिफ्ट हो गए हैं। खासतौर पर क्रिटिकल मिनरल्स और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर निर्भरता नई चुनौतियां पैदा कर रही है।
इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस (IESA) के प्रेसिडेंट देबमाल्य सेन ने कहा कि भारत की अगुवाई में रूस, ईरान और यूएई जैसे प्रमुख ऊर्जा देशों की भागीदारी BRICS Summit को बातचीत से आगे बढ़ाकर ठोस कार्रवाई का मंच बना सकती है। उन्होंने कहा कि BRICS Digital Centre of Excellence for Smart Grids और Energy Storage के नए सिद्धांतों जैसी पहलें तेज प्रोजेक्ट्स, समान मानकों और मजबूत क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन का आधार तैयार कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के Energy Storage सेक्टर के लिए यह तकनीकी सहयोग, इनोवेशन और क्लीन टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस बीच, वैश्विक बैटरी बाजार एक साल में 35% से अधिक बढ़ चुका है और एक प्रमुख रिफाइनिंग देश के पास प्रमुख ऊर्जा मिनरल्स की प्रोसेस्ड सप्लाई का 72% नियंत्रण है।
सनकनेक्ट के फाउंडर और निदेशक डॉ अविषेक कुमार ने कहा कि वैश्विक बैटरी मांग 1.5 TWh से ज्यादा हो चुकी है, जिससे सप्लाई चेन की नई कमजोरियां सामने आई हैं। उनके अनुसार, लक्ष्य पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना नहीं, बल्कि लिथियम, ग्रेफाइट और रेर अर्थ जैसे महत्वपूर्ण मिनरल्स की सप्लाई चेन को diversify करना होना चाहिए। इसके लिए BRICS देशों में मैन्युफैक्चरिंग, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग क्षमताओं को बांटना जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि क्लीन एनर्जी सेक्टर में निवेश बढ़ाने के लिए पूंजी की लागत कम करना भी जरूरी है। New Development Bank के 30 अरब डॉलर से अधिक के लक्षित फंड को सक्रिय करने और local-currency lending को प्राथमिकता देने से इस दिशा में मदद मिल सकती है।
स्मार्ट ग्रिड एनालिटिक्स के संस्थापक और सीईओ कुमार एम ने कहा कि BRICS Digital Centre of Excellence for Smart Grids and Energy Storage की शुरुआत एक सकारात्मक कदम है, लेकिन अब इन पहलों को मजबूत और बड़े स्तर पर लागू होने वाले समाधानों में बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 2035 तक वैश्विक climate finance की जरूरत 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, इसलिए BRICS को क्लीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पूंजी की लागत कम करने वाले तंत्र विकसित करने चाहिए।
नवप्रकृति के सह-संस्थापक अखिलेश बागरिया ने कहा कि lithium और rare earths जैसे मिनरल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है और केवल संसाधनों को सुरक्षित करना पर्याप्त नहीं है। BRICS देशों को recycling, reprocessing और innovation की क्षमता विकसित कर critical materials का अधिकतम मूल्य हासिल करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि closed-loop supply chains और सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने वाली नीतियों में निवेश से waste कम किया जा सकता है और critical materials का lifecycle बढ़ाया जा सकता है। इससे BRICS अधिक टिकाऊ और मजबूत energy systems के लिए नए मानक स्थापित कर सकता है।
Electric mobility भी BRICS देशों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभर रही है। सदस्य देशों में consumer और commercial दोनों सेगमेंट में EV adoption बढ़ रहा है। ऐसे में renewable energy, critical minerals और digital infrastructure को एक साथ विकसित करना भविष्य के लिए मजबूत और resilient EV ecosystem बनाने में महत्वपूर्ण होगा।
बीलाइव के सीईओ संदीप मुखर्जी ने कहा कि clean transport की ओर बढ़ते BRICS देशों को सिर्फ EV deployment पर ध्यान देने के बजाय पूरे ecosystem को विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि Rio de Janeiro Declaration में benefit sharing और value addition पर जोर इस बात को रेखांकित करता है कि BRICS देशों को battery manufacturing और recycling को स्थानीय स्तर पर मजबूत करना चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साल का BRICS agenda grid modernisation, digital innovation और affordable climate finance में सहयोग को बढ़ावा देगा। इससे अलग-अलग बाजारों की जरूरतों के अनुरूप sustainable mobility और energy resilience को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
Delhi Summit के दौरान industry और energy leaders का मानना है कि BRICS को अपनी सामूहिक ताकत का इस्तेमाल diversification, circularity और energy resilience में measurable progress के लिए करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, अब जरूरत केवल रणनीतियों और घोषणाओं तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि ऐसी practical solutions विकसित करने की है जो आने वाले वर्षों में global growth और clean energy transition की दिशा तय कर सकें।