C&I बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देगा IESA

C&I बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देगा IESA

C&I बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देगा IESA
भारत में C&I बैटरी स्टोरेज क्षमता 650 MWh तक पहुंच गई है और FY27 तक इसके करीब 4 GWh होने का अनुमान है।

भारत में कमर्शियल और इंडस्ट्रियल (C&I) बैटरी एनर्जी स्टोरेज क्षमता तेजी से बढ़ रही है। यह क्षमता मौजूदा समय में करीब 650 MWh हो गई है, जो पहले 40 MWh थी। इसके FY27 तक करीब 4 GWh तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, ऊंची शुरुआती लागत, बदलते नियम, सीमित फाइनेंसिंग विकल्प और यूजर्स के बीच जागरूकता की कमी अभी भी बड़े स्तर पर BESS अपनाने में चुनौती बनी हुई है।

इन चुनौतियों को दूर करने और C&I सेक्टर में बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देने के लिए India Energy Storage Alliance (IESA) ने मुंबई के Jio World Convention Centre में ‘BESS for C&I’ पहल शुरू की है। इस पहल के तहत अगले तीन वर्षों में 300 C&I उपभोक्ताओं को एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस अपनाने में मदद करने का लक्ष्य रखा गया है।

‘BESS for C&I’ के तहत अक्टूबर 2026 से हर महीने सेशन आयोजित किए जाएंगे। इनमें इंडस्ट्री कंपनियां, BESS डेवलपर्स और नीति निर्माता एक साथ आकर बैटरी स्टोरेज की तैनाती, लागत, बिजनेस मॉडल और बेहतर तरीकों पर चर्चा करेंगे।

आईईएसए (IESA) के प्रेसिडेंट देबमाल्या सेन ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म C&I एनर्जी कंज्यूमर्स के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने और उन्हें दूर करने के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रिड फ्लेक्सिबिलिटी और बिजनेस रेजिलिएंस के लिए बैटरी स्टोरेज महत्वपूर्ण होता जा रहा है और इसके विस्तार के लिए सहयोग, जानकारी साझा करना और इनोवेशन जरूरी है।

यह पहल C&I उपभोक्ताओं के लिए एक डेडिकेटेड और फ्री वर्कग्रुप के रूप में काम करेगी। बढ़ती बिजली मांग, बिजली की लागत को नियंत्रित करने और रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड में बेहतर तरीके से जोड़ने के लिए बैटरी स्टोरेज की भूमिका बढ़ रही है। IESA और इंडस्ट्री लीडर्स ने C&I BESS को तेजी से अपनाने के लिए नीतिगत कदमों और लक्षित इंसेंटिव की जरूरत पर जोर दिया है।

ट्रेक्स एनर्जी (Trex Energy) के डायरेक्टर भारत छित्तारका ने कहा कि भारत को बैटरी मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने के लिए सेल मैन्युफैक्चरिंग को तेज करने और आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम करने की जरूरत है। उनके मुताबिक, फिलहाल इम्पोर्टेड रॉ मटेरियल बैटरी की लागत में करीब 60-70% तक योगदान करता है। उन्होंने सभी राज्यों में Time-of-Day (TOD), एनर्जी आर्बिट्राज और पीक शेविंग से जुड़ी स्पष्ट नीतियां बनाने की सिफारिश की।

जेबीएम रिन्यूएबल्स (JBM Renewables) के एनर्जी बिजनेस के सीईओ बिमल जिंदल ने कहा कि भारत को बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में मजबूत बनने के लिए कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, लिथियम कार्बोनेट और सेल प्रोडक्शन के साथ-साथ R&D पर भी निवेश करना होगा। उन्होंने सरकार से BESS पर GST को 18% से घटाकर 5% करने और संबंधित प्रोजेक्ट्स में BESS की अनिवार्य हिस्सेदारी बढ़ाने पर विचार करने की बात कही।

आदित्य बिड़ला रिन्यूएबल्स (Aditya Birla Renewables) की हेड ऑफ बिजनेस डेवल्पमेंट (C&I) सुष्मिता आर. अजवानी ने कहा कि भारत को ग्लोबल बैटरी मैन्युफैक्चरिंग लीडर बनने के लिए केवल असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि घरेलू सेल मैन्युफैक्चरिंग और मजबूत नीतिगत व वित्तीय समर्थन पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्पष्ट रेगुलेटरी गाइडलाइंस और लक्षित इंसेंटिव से BESS अपनाने की रफ्तार बढ़ सकती है।

एनविज़न एनर्जी इंडिया (Envision Energy India) के सीओओ-बीईएसएस (COO-BESS) और चीफ बिजनेस ऑफिसर  इंदर भांबरा ने कहा कि भारत को ग्लोबल बीईएसएस (BESS) मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए सेल टेक्नोलॉजी और DC कंटेनर की घरेलू असेंबली को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने BESS चार्जिंग से जुड़े ट्रांसमिशन चार्ज और मैक्सिमम डिमांड चार्ज को हटाने सहित ओपन-एक्सेस नियमों को अधिक अनुकूल बनाने की जरूरत बताई।

हालांकि, बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स की लागत में उतार-चढ़ाव अभी भी चुनौती बना हुआ है। हाल के महीनों में यूटिलिटी-स्केल BESS की कैपेक्स लागत में करीब 15% की बढ़ोतरी हुई है। आईईएसए (IESA) के अनुसार, सही नीतिगत समर्थन और मजबूत घरेलू सप्लाई चेन C&I बैटरी स्टोरेज के अगले चरण के विकास को गति दे सकते हैं।

आईईएसए (IESA) अपने आईईएसए कनेक्ट (IESA Connect) प्लेटफॉर्म के जरिए इस पहल को देश के अलग-अलग शहरों और इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स तक ले जाने की योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य C&I उपभोक्ताओं को केवल BESS तकनीक का खरीदार बनाने के बजाय नीति, मानकों और सुरक्षा से जुड़े फैसलों में भी सक्रिय भागीदार बनाना है।

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