इस फाउंडेशन की स्थापना कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत एक गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में की जाएगी। यह दिल्ली सरकार के उद्योग विभाग के अंतर्गत काम करेगा। फाउंडेशन हब-एंड-स्पोक मॉडल पर काम करेगा, जिसमें मौजूदा सुविधाओं और साझेदार संस्थानों का उपयोग किया जाएगा।
दिल्ली में DPIIT से मान्यता प्राप्त लगभग 21,000 स्टार्टअप्स
सरकार के अनुसार, दिल्ली में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) से मान्यता प्राप्त लगभग 21,000 स्टार्टअप्स हैं। इस फाउंडेशन का उद्देश्य स्टार्टअप्स को शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों, निवेशकों और उद्योग जगत के भागीदारों से जोड़ना है।
यह फाउंडेशन उत्पाद इंजीनियरिंग और प्रोटोटाइप तैयार करने की सुविधाओं, प्रयोगशालाओं, परीक्षण सेवाओं, तकनीकी मार्गदर्शन, मेंटरशिप और इनक्यूबेशन सहायता तक पहुंच उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा, यह छात्रों और शोधकर्ताओं को प्रोटोटाइप विकसित करने, बौद्धिक संपदा की सुरक्षा करने और शोध को व्यावसायिक रूप देने में भी मदद करेगा।
सरकारी पायलट प्रोजेक्ट्स के जरिए समाधान परखने में मदद
यह फाउंडेशन स्टार्टअप्स को उन सरकारी विभागों से जोड़कर पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू करने में मदद करेगा, जिन्हें अपनी कामकाजी चुनौतियों के समाधान के लिए तकनीक आधारित उपायों की जरूरत है। सफल समाधानों को सरकार द्वारा बड़े स्तर पर अपनाने के लिए विचार किया जा सकता है।
सरकार ने अभी तक पात्रता मानदंड, आवेदन प्रक्रिया, कार्यक्रमों की समय-सीमा या 50 करोड़ रुपये के फंड के आवंटन का तरीका घोषित नहीं किया है। साझेदार संस्थानों और पायलट प्रोजेक्ट्स के चयन की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी अभी सामने आना बाकी है।