धर्मेंद्र प्रधान ने “सबका साथ, सबका विकास जन आकांक्षाओं की पूर्ति” विषय पर आयोजित पोस्ट-बजट वेबिनार के समापन सत्र को संबोधित किया। इस वेबिनार में केंद्रीय बजट में घोषित शिक्षा सुधारों व उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को प्रधानमंत्री Narendra Modi ने संबोधित किया था, जिसमें बजट घोषणाओं को तेजी से जमीन पर लागू करने पर जोर दिया गया।
समावेशी और सुलभ शिक्षा पर जोर
समापन सत्र को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और हितधारकों की बड़ी भागीदारी सहभागी शासन (Participatory Governance) का मजबूत उदाहरण है। उन्होंने बताया कि National Education Policy 2020 का मुख्य उद्देश्य समावेशी, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, नवाचार और शोध को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिससे युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
शिक्षा से रोजगार तक मजबूत कड़ी
वेबिनार में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शिक्षा प्रणाली को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाया जाए। और चर्चाओं में निम्न विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया:
- कौशल विकास के अवसर बढ़ाना
- शिक्षा और रोजगार के बीच मजबूत संबंध बनाना
- भविष्य के लिए तैयार पाठ्यक्रम विकसित करना
- उद्योग, शिक्षाविदों और सरकार के बीच सहयोग बढ़ाना
- नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना
इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह , सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
मानव संसाधन विकास पर विशेष चर्चा
शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित सत्रों में मानव पूंजी विकास को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलों पर विचार किया गया। इनमें प्रमुख प्रस्ताव शामिल हैं: राष्ट्रीय टेलीस्कोप योजना, दिव्यांग कौशल योजना, यूनिवर्सिटी टाउनशिप की स्थापना, हर जिले में STEM संस्थानों के लिए छात्रावास, शिक्षा से रोजगार और उद्यमिता को जोड़ने के लिए स्थायी समिति और AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग व कॉमिक्स सेक्टर के लिए) आदि।
इन पहलों का उद्देश्य मानव संसाधन विकास को मजबूत करना और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
वेबिनार में यह सुझाव भी दिया गया कि STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए हर जिले में सुरक्षित और सुविधाजनक छात्रावास बनाए जाएं। साथ ही यूनिवर्सिटी टाउनशिप मॉडल के माध्यम से शिक्षा, उद्योग और शोध संस्थानों को एकीकृत करने पर भी जोर दिया गया, ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ नवाचार और उद्यमिता के अवसर मिल सकें।
कौशल और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा
वेबिनार के दौरान विशेषज्ञों ने AI आधारित नौकरियों के लिए पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाने, उद्योग-अकादमिक साझेदारी को मजबूत करने और कंटेंट क्रिएशन तथा डिजाइन जैसे उभरते क्षेत्रों को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया। इसके अलावा दिव्यांगजनों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम, खगोल विज्ञान के लिए आधुनिक दूरबीन परियोजनाएं और उन्नत अनुसंधान अवसंरचना जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
अत: सरकार का मानना है कि इन पहलों के माध्यम से भारत की शिक्षा प्रणाली को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकेगा और युवाओं के लिए रोजगार, नवाचार और उद्यमिता के नए अवसर तैयार होंगे। साथ ही विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन प्रस्तावों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो इससे शिक्षा से रोजगार तक की पूरी व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी और भारत को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकेगा।