AI से स्कूलों और विश्वविद्यालयों में सुरक्षा और डिजास्टर मैनेजमेंट शिक्षा को बढ़ावा: कुनाल तिवारी, डिप्टी कमांडेंट NDRF

AI से स्कूलों और विश्वविद्यालयों में सुरक्षा और डिजास्टर मैनेजमेंट शिक्षा को बढ़ावा: कुनाल तिवारी, डिप्टी कमांडेंट NDRF

AI से स्कूलों और विश्वविद्यालयों में सुरक्षा और डिजास्टर मैनेजमेंट शिक्षा को बढ़ावा: कुनाल तिवारी, डिप्टी कमांडेंट NDRF
शिक्षा के क्षेत्र में AI केवल पढ़ाई को आसान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह सुरक्षा व्यवस्था और डिजास्टर मैनेजमेंट शिक्षा को भी एक नई दिशा दे रहा है।


आज का युग तकनीक का युग है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस तकनीकी क्रांति का सबसे मजबूत आधार बनकर उभरा है। शिक्षा के क्षेत्र में AI केवल पढ़ाई को आसान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह सुरक्षा व्यवस्था और डिजास्टर मैनेजमेंट शिक्षा को भी एक नई दिशा दे रहा है। खासकर स्कूलों और विश्वविद्यालयों जैसे संवेदनशील संस्थानों में, जहां बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और कर्मचारी मौजूद रहते हैं, वहां सुरक्षा और आपदा प्रबंधन अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा की बढ़ती चुनौती

पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि स्कूलों और विश्वविद्यालयों में आग लगने, इमारत गिरने, बिजली से जुड़ी दुर्घटनाओं, बाढ़, भूकंप और कभी-कभी बाहरी सुरक्षा खतरों जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं। अधिकतर मामलों में नुकसान इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि समय रहते खतरे की पहचान नहीं हो पाती। यहीं पर AI एक अर्ली वार्निंग सिस्टम की तरह काम करता है।

AI आधारित कैमरे, सेंसर और स्मार्ट निगरानी सिस्टम स्कूल परिसर में असामान्य गतिविधियों, धुएं, तापमान में अचानक वृद्धि या भीड़ के असामान्य व्यवहार को तुरंत पहचान सकते हैं। इससे प्रशासन को पहले ही अलर्ट मिल जाता है और बड़ी दुर्घटना को रोका जा सकता है।

डिजास्टर मैनेजमेंट शिक्षा क्यों जरूरी है? 

आइए विस्तार से समझें कि डिजास्टर मैनेजमेंट शिक्षा क्यों जरूरी है: डिजास्टर मैनेजमेंट केवल किताबों का विषय नहीं है, बल्कि यह जीवन बचाने का कौशल है। अगर छात्रों को यह सिखाया जाए कि आपदा के समय क्या करना है और क्या नहीं करना है, तो जान-माल का नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है। परंपरागत शिक्षा पद्धति में डिजास्टर मैनेजमेंट को अक्सर थ्योरी तक सीमित रखा जाता है, जबकि वास्तविक जीवन में स्थितियां इससे कहीं अधिक जटिल होती हैं।

AI इस कमी को पूरा करता है। AI आधारित सिमुलेशन और वर्चुअल रियलिटी टूल्स के माध्यम से छात्रों को भूकंप, बाढ़, आग या औद्योगिक दुर्घटनाओं जैसी परिस्थितियों का प्रैक्टिकल अनुभव कराया जा सकता है, वह भी बिना किसी वास्तविक खतरे के।

छात्रों के लिए AI आधारित प्रशिक्षण का महत्व 

जब छात्र AI सिमुलेशन के माध्यम से आपदा की स्थिति का अभ्यास करते हैं, तो उनमें डर कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। वे सीखते हैं कि घबराने के बजाय कैसे शांत रहकर सही निर्णय लेना है। उदाहरण के लिए, आग लगने की स्थिति में कौन-सा रास्ता सुरक्षित है, किसे प्राथमिक सहायता देनी है, और कैसे दूसरों की मदद करनी है- ये सभी बातें AI आधारित ट्रेनिंग से प्रभावी ढंग से सिखाई जा सकती हैं।

इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि छात्र केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन के लिए तैयार होते हैं।

शिक्षकों और प्रशासन के लिए AI की भूमिका

AI केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षकों और स्कूल प्रशासन के लिए भी बेहद उपयोगी है। AI सिस्टम डेटा एनालिसिस के माध्यम से यह बता सकता है कि स्कूल या विश्वविद्यालय के कौन-से हिस्से ज्यादा जोखिम वाले हैं। इससे पहले ही सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।

शिक्षक AI की मदद से डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़े केस स्टडी, लाइव उदाहरण और डेटा-आधारित जानकारी छात्रों को दे सकते हैं। इससे पढ़ाई ज्यादा रोचक, व्यावहारिक और प्रभावी बनती है।

ग्रामीण और छोटे संस्थानों में AI की उपयोगिता

अक्सर यह माना जाता है कि AI केवल बड़े और महंगे संस्थानों के लिए है, लेकिन यह धारणा अब धीरे-धीरे बदल रही है। जैसे-जैसे तकनीक सस्ती और सुलभ हो रही है, वैसे-वैसे छोटे और ग्रामीण स्कूलों में भी AI आधारित सुरक्षा और प्रशिक्षण सिस्टम लागू किए जा सकते हैं।

सरकारी सहयोग और सही नीतियों के साथ, AI ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों को मजबूत कर सकता है। भविष्य की शिक्षा प्रणाली में AI की भूमिका भविष्य की शिक्षा केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि छात्रों को जीवन कौशल सिखाने पर अधिक जोर होगा। सुरक्षा और डिजास्टर मैनेजमेंट इसमें सबसे अहम हिस्सा होंगे। AI इस पूरी प्रक्रिया को अधिक स्मार्ट, तेज़ और भरोसेमंद बना सकता है।

निश्चित रूप से आने वाले समय में AI न केवल आपदाओं का पूर्वानुमान लगाएगा, बल्कि शिक्षा संस्थानों को पहले से तैयार रहने में भी मदद करेगा। इससे एक ऐसी पीढ़ी तैयार होगी जो तकनीकी रूप से सक्षम, जागरूक और संकट के समय जिम्मेदार निर्णय लेने में सक्षम होगी।

निष्कर्ष: "आज हम केवल तकनीक की बात नहीं कर रहे, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य को लेकर गहराई से चिंतित हैं। AI को जिस संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ शिक्षा से जोड़ा गया है, वह इसे एक मानवीय और दूरदर्शी पहल बनाता है।" निश्चित रूप से आने वाले समय में AI न केवल आपदाओं का पूर्वानुमान लगाएगा, बल्कि शिक्षा संस्थानों को पहले से तैयार रहने में भी मदद करेगा। इससे एक ऐसी पीढ़ी तैयार होगी जो तकनीकी रूप से सक्षम, जागरूक और संकट के समय जिम्मेदार निर्णय लेने में सक्षम होगी।

कुल मिलाकर र्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त परिवर्तनकारी उपकरण बन चुका है। स्कूलों और विश्वविद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और डिजास्टर मैनेजमेंट शिक्षा को प्रभावी बनाने में AI की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इसे सही नीति, प्रशिक्षण और दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाए, तो यह न केवल दुर्घटनाओं को कम करेगा, बल्कि समाज को एक सुरक्षित और सजग भविष्य की ओर ले जाएगा।


(लेखक: कुनाल तिवारी, डिप्टी कमांडेंट- NDRF, विचार व्यक्तिगत हैं)



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