अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 131वें एपिसोड में उन्होंने खास तौर पर कक्षा 10 और 12 के बोर्ड परीक्षार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने छात्रों से पूछा कि क्या वे पढ़ाई को लेकर ज्यादा तनाव में हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा के समय घबराहट होना सामान्य बात है, लेकिन इससे डरने की जरूरत नहीं है।
प्रधानमंत्री ने छात्रों को “परीक्षा योद्धा” बताते हुए कहा कि हर पीढ़ी के बच्चों ने परीक्षा के समय घबराहट महसूस की है। कभी लगता है कि सब याद रहेगा या नहीं, कभी समय कम पड़ने का डर होता है। लेकिन ये भावनाएं सामान्य हैं और हर छात्र इससे गुजरता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी एक सवाल को लेकर ज्यादा परेशान न हों। अगर कोई प्रश्न समझ में न आए तो उसे छोड़कर आगे बढ़ें और जो आता है, उसे पूरे आत्मविश्वास के साथ लिखें। उन्होंने कहा, “आपकी कीमत आपके अंकों से तय नहीं होती। खुद पर भरोसा रखें और अपनी पूरी मेहनत के साथ परीक्षा दें।”
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि माता-पिता और शिक्षक बच्चों को सिर्फ अंकों से नहीं आंकते, बल्कि उनकी मेहनत और प्रयास को देखते हैं। इसलिए छात्रों को उनसे खुलकर बात करनी चाहिए और अपने मन की बात साझा करनी चाहिए। इससे तनाव कम होता है और आत्मबल बढ़ता है।
उन्होंने परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों को जीवन कौशल, समय प्रबंधन, लक्ष्य तय करने और दबाव से निपटने की सीख भी देता है। 2026 के संस्करण में यह कार्यक्रम कोयंबटूर, रायपुर, देवमोगरा, गुवाहाटी और नई दिल्ली जैसे कई शहरों में आयोजित किया गया। असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर क्रूज में भी एक विशेष सत्र रखा गया, जिससे यह कार्यक्रम और भी खास बन गया।
प्रधानमंत्री ने छात्रों को कुछ आसान सुझाव भी दिए
पढ़ाई के बीच-बीच में थोड़ा आराम करें, मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाएं, पर्याप्त नींद लें और संतुलित भोजन करें, समय का सही उपयोग करें और पढ़ाई की योजना बनाकर चलें और खुद की तुलना दूसरों से न करें।
उन्होंने आगे कहा कि परीक्षा जीवन की लंबी यात्रा का केवल एक छोटा सा पड़ाव है। असली सफलता वही है जो आत्मविश्वास, निरंतर प्रयास और सकारात्मक सोच से मिलती है। अंत में उन्होंने सभी छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे निडर होकर परीक्षा दें और अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ें।