EIM ने 500 इलेक्ट्रिक हेवी कमर्शियल वाहनों के लिए किया करार

EIM ने 500 इलेक्ट्रिक हेवी कमर्शियल वाहनों के लिए किया करार

EIM ने 500 इलेक्ट्रिक हेवी कमर्शियल वाहनों के लिए किया करार
एनर्जी इन मोशन ने ओडब्लयूएस और रेडियंस ग्रीन मोबिलिटी के साथ साझेदारी की है। पहले चरण में अक्टूबर 2026 से मुंबई-पुणे कॉरिडोर पर 50 इलेक्ट्रिक वाहन उतारे जाएंगे।

एनर्जी इन मोशन लिमिटेड (EIM) ने भारत के प्रमुख हाई-डेंसिटी फ्रेट रूट्स पर 500 इलेक्ट्रिक हेवी कमर्शियल व्हीकल्स (e-HCVs) तैनात करने के लिए Oil Field Warehouse & Services Limited (OWS) और Radiance Green Mobility Private Limited के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किया है। इस साझेदारी के तहत मुंबई-पुणे, मुंद्रा-मोरबी-अहमदाबाद और मुंबई-दिल्ली कॉरिडोर को इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए चुना गया है। पहले चरण में अक्टूबर 2026 से मुंबई-पुणे रूट पर 50 इलेक्ट्रिक वाहन तैनात किए जाएंगे।

इस साझेदारी के तहत EIM वाहनों के साथ बैटरी स्वैपिंग स्टेशन, चार्जिंग पॉइंट्स और एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम सहित जरूरी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएगी। वहीं, OWS और रेडियंस ग्रीन मोबिलिटी (Radiance Green Mobility) फ्लीट की तैनाती और रोजमर्रा के संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे। बाकी कॉरिडोर पर वाहनों की तैनाती EIM के बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क के तैयार होने के बाद की जाएगी। यह मॉडल वाहन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को स्थापित लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों के साथ जोड़ने की दिशा में बढ़ता कदम है।

इस साझेदारी के लिए ईआईएम (EIM) का प्रमुख वाहन Ashwa है, जो 55 टन क्षमता वाला इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर है और हाई-यूटिलाइजेशन व लॉन्ग-हॉल फ्रेट ऑपरेशंस के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें बैटरी स्वैपिंग सिस्टम दिया गया है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक चार्जिंग की तुलना में वाहन का डाउनटाइम कम करना है। कंपनी को हाल ही में Ashwa के 350 kWh बैटरी वेरिएंट के लिए होमोलोगेशन भी मिला है, जिससे ज्यादा ऊर्जा जरूरत वाले ऑपरेटरों के लिए विकल्प बढ़े हैं।

ओडब्लयूएस (OWS)  के पास लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल ऑपरेशंस का लंबा अनुभव है। कंपनी ने 2006 में भारत में SEZ आधारित वेयरहाउसिंग की शुरुआत की थी और अब कंटेनर लॉजिस्टिक्स, फ्रेट फॉरवर्डिंग, प्रोजेक्ट कार्गो, पोर्ट एवं टर्मिनल ऑपरेशंस सहित कई क्षेत्रों में काम करती है। वहीं, रेडियंस ग्रीन मोबिलिटी (Radiance Green Mobility) हेवी और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रिक ट्रांसपोर्ट पर केंद्रित है और पोर्ट इकोसिस्टम में इलेक्ट्रिक हेवी कमर्शियल वाहनों की तैनाती का अनुभव रखती है।

ओडब्लयूएस OWS के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ने का एक प्रमुख कारण कॉस्ट प्रेडिक्टेबिलिटी है। डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित होती हैं, जिससे लंबे समय के फ्रेट कॉन्ट्रैक्ट की लागत तय करना मुश्किल हो सकता है। इसके मुकाबले इलेक्ट्रिफिकेशन अधिक स्थिर ऑपरेटिंग कॉस्ट उपलब्ध करा सकता है, जिससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों को ग्राहकों के साथ लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट करने में मदद मिल सकती है।

यह साझेदारी भारत में हेवी कमर्शियल व्हीकल्स के इलेक्ट्रिफिकेशन को बढ़ावा देने वाली व्यापक सरकारी पहल के अनुरूप भी है। प्रमुख औद्योगिक और पोर्ट हब को जोड़ने वाले फ्रेट कॉरिडोर नियमित और बड़े पैमाने पर माल परिवहन के कारण शुरुआती इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मुंबई-पुणे, मुंद्रा-मोरबी-अहमदाबाद और मुंबई-दिल्ली जैसे रूट्स पर इलेक्ट्रिक हेवी वाहनों की तैनाती से भारत के फ्रेट ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बैटरी स्वैपिंग और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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