तेलंगाना में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग के क्षेत्र में एक नई पहल के तहत 150kW क्षमता वाला इथेनॉल-आधारित ईवी चार्जिंग सिस्टम लॉन्च किया गया है। इस तकनीक की खासियत यह है कि यह पारंपरिक बिजली ग्रिड पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहता, बल्कि इथेनॉल से बिजली उत्पन्न कर उसी ऊर्जा से इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करता है। इसे दुनिया का पहला इथेनॉल-आधारित ईवी चार्जिंग समाधान बताया जा रहा है।
नई प्रणाली में 150kW फास्ट ईवी चार्जर और इथेनॉल से बिजली उत्पादन करने वाली यूनिट को एकीकृत किया गया है। इससे चार्जिंग स्टेशन को हर समय ग्रिड बिजली की आवश्यकता नहीं होती और इसे उन क्षेत्रों में भी स्थापित किया जा सकता है, जहां बिजली का बुनियादी ढांचा सीमित है।
कीटो मोटर्स (Keto Motors) की 9-मीटर इलेक्ट्रिक कमर्शियल बस के लॉन्च के दौरान केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि कंपनी ने ऐसा उपकरण विकसित किया है, जिसकी मदद से इलेक्ट्रिक वाहनों को पारंपरिक बिजली के बजाय इथेनॉल से उत्पन्न बिजली के जरिए चार्ज किया जा सकेगा। उनके अनुसार, यह तकनीक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और भारत के बढ़ते इथेनॉल इकोसिस्टम को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
वर्तमान में हाईवे और दूरदराज के इलाकों में फास्ट ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए उच्च क्षमता वाले बिजली कनेक्शन, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और कई प्रशासनिक मंजूरियों की आवश्यकता होती है। ऐसे में यह इथेनॉल-आधारित सिस्टम इन चुनौतियों को काफी हद तक कम कर सकता है, क्योंकि यह स्वयं बिजली उत्पन्न करता है और ग्रिड कनेक्शन के बिना भी संचालित हो सकता है।
कंपनी का कहना है कि इस चार्जिंग यूनिट को 72 घंटे के भीतर चालू किया जा सकता है, जबकि पारंपरिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने में काफी अधिक समय लगता है। इसके अलावा, इस तकनीक से चार्जिंग स्टेशन की स्थापना लागत और सेटअप समय में 50 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।
दूरदराज के कई चार्जिंग स्टेशनों पर बिजली की कमी के कारण फिलहाल डीजल जनरेटर का उपयोग किया जाता है। कंपनी का दावा है कि इथेनॉल-आधारित यह समाधान डीजल जनरेटर की तुलना में 80 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन कम कर सकता है। यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो भविष्य में हाईवे, फ्लीट डिपो और कम बिजली उपलब्धता वाले क्षेत्रों में ईवी चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।