भारत में पब्लिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों पर बिजली की खपत FY27 में 2,500–3,000 मिलियन यूनिट को पार कर सकती है। काज़म के को-फाउंडर और सीईओ अक्षय शेखर के अनुसार, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और इलेक्ट्रिक व्हीकल फ्लीट बढ़ने से बिजली की मांग में तेजी जारी रहने की उम्मीद है। पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों पर बिजली की खपत FY24 के 465.85 मिलियन यूनिट से बढ़कर FY26 में 1,558.69 मिलियन यूनिट हो गई है।
चार्जिंग खपत में दिल्ली की हिस्सेदारी में कमी आई है, लेकिन राजधानी में कुल खपत बढ़ी है। दिल्ली की हिस्सेदारी FY24 में 43.61% से घटकर FY26 में करीब 27.9% रह गई। वहीं, इसी अवधि में दिल्ली में पब्लिक EV चार्जिंग की बिजली खपत 203.1 मिलियन यूनिट से बढ़कर 453.3 मिलियन यूनिट हो गई। इसका संकेत है कि EV चार्जिंग की मांग अब दिल्ली से बाहर भी तेजी से बढ़ रही है।
महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य EV चार्जिंग की मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कर्नाटक और तेलंगाना में बढ़ते चार्जिंग नेटवर्क और मजबूत ईवी इकोसिस्टम के कारण खपत में तेजी देखी जा रही है। EV स्टार्टअप्स, ऑटोमोबाइल कंपनियों, फ्लीट ऑपरेटर्स और डिजिटल रूप से जागरूक ग्राहकों की बढ़ती संख्या भी चार्जिंग की मांग को बढ़ावा दे रही है।
उत्तर प्रदेश भी एक प्रमुख ईवी चार्जिंग बाजार के रूप में उभर रहा है। राज्य में ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स की मजबूत मौजूदगी, NCR से नजदीकी, लॉजिस्टिक्स गतिविधियों और हाईवे व इंटरसिटी चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार से मांग बढ़ रही है। नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ में कमर्शियल व लॉजिस्टिक्स गतिविधियां, जबकि आगरा, मथुरा, अलीगढ़ और कानपुर में पर्यटन व इंटरसिटी ट्रैवल चार्जिंग मांग को बढ़ा रहे हैं।
FY27 में चार्जिंग खपत की ग्रोथ चार्जर इंस्टॉलेशन और फ्लीट इलेक्ट्रिफिकेशन की रफ्तार पर निर्भर करेगी। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए केवल नए चार्जर लगाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि भरोसेमंद बिजली सप्लाई, स्मार्ट लोड मैनेजमेंट, बेहतर चार्जर अपटाइम और इंटरऑपरेबिलिटी भी जरूरी होगी। इन सुविधाओं के साथ चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करने वाले राज्य भारत के अगले चरण के ईवी चार्जिंग ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।