ईवी पावरट्रेन पर बढ़ती कच्चे माल की लागत का असर

ईवी पावरट्रेन पर बढ़ती कच्चे माल की लागत का असर

ईवी पावरट्रेन पर बढ़ती कच्चे माल की लागत का असर
दोपहिया और पैसेंजर व्हीकल बिक्री में मजबूत बढ़ोतरी के बावजूद स्टील, रबर, कॉपर और लिथियम कार्बोनेट की कीमतों में तेजी से ऑटो कंपनियों की लागत बढ़ रही है।

भारत की ऑटो कंपनियां पिछले कुछ वर्षों में कच्चे माल की कीमतों में आई सबसे तेज बढ़ोतरी का सामना कर रही हैं। वाहन बिक्री में मजबूत वृद्धि के बावजूद मेटल, रबर और बैटरी से जुड़े इनपुट की बढ़ती कीमतें कंपनियों की लाभप्रदता पर दबाव डाल रही हैं। SIAM के Commodity Price Monthly Monitor के अनुसार, दोपहिया वाहनों की बिक्री में सालाना आधार पर 24.3% और पैसेंजर व्हीकल बिक्री में 26.3% की बढ़ोतरी हुई है।

वाहनों के चेसिस और बॉडी पैनल में उपयोग होने वाले हॉट-रोल्ड स्टील की कीमत अगस्त में 60,625 से 62,463 रुपये प्रति टन रही, जो एक साल पहले की तुलना में करीब 20% अधिक है। जुलाई के मुकाबले इसमें 1.1% की बढ़ोतरी हुई और यह 12 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। वहीं, नेचुरल रबर की कीमत 42% बढ़कर ₹278.76 प्रति किलोग्राम हो गई है। टायर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सिंथेटिक पॉलीब्यूटाडीन रबर की कीमत 59% बढ़कर ₹270.61 प्रति किलोग्राम और कार्बन ब्लैक की कीमत 47% बढ़कर ₹155.42 प्रति किलोग्राम हो गई।

ईवी के लिए अहम बैटरी और इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स की लागत में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। वाहनों की वायरिंग और इलेक्ट्रिक मोटर वाइंडिंग में इस्तेमाल होने वाले कॉपर की कीमत 49% बढ़कर $14,353 प्रति टन हो गई है। वहीं, बैटरी में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख केमिकल लिथियम कार्बोनेट की कीमत 106% बढ़कर $19.30 प्रति किलोग्राम हो गई है।

कच्चे माल की यह लागत बढ़ोतरी पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल सप्लाई चेन को भी प्रभावित कर रही है। वैश्विक स्तर पर ऑटोमेकर्स का ऑपरेटिंग मार्जिन करीब 4.8% तक गिर गया है, जो कई वर्षों का निचला स्तर है। वहीं, टायर कंपनियों पर नेचुरल और सिंथेटिक रबर की बढ़ती कीमतों का दोहरा दबाव है। इसी वजह से CEAT और JK Tyre ने फेस्टिव सीजन से पहले टायरों की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है।

कच्चे माल की बढ़ती लागत और आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए भारी उद्योग मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए Auto and Auto Component Production Linked Incentive (PLI) Scheme के तहत ₹2,818.9 करोड़ का आवंटन किया है। इसका उद्देश्य हाई-वैल्यू कंपोनेंट्स के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना और आयातित इनपुट पर निर्भरता कम करना है। आने वाली तिमाहियों में ऑटो कंपनियों के लिए चुनौती बिक्री की बढ़ती मात्रा के साथ-साथ बढ़ती लागत के बीच अपने मार्जिन को बनाए रखना होगी।

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