FADA की मांग: EV नीति में डीलर्स को मिले बड़ी भूमिका

FADA की मांग: EV नीति में डीलर्स को मिले बड़ी भूमिका

FADA की मांग: EV नीति में डीलर्स को मिले बड़ी भूमिका
एफएडीए ने ईवी नीति में डीलर्स की भागीदारी बढ़ाने और रोजगार के संतुलन पर जोर दिया है।संस्था ने इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किलिंग और नीति स्थिरता के जरिए सुचारु ईवी  ट्रांजिशन की मांग की है।

दिल्ली सरकार जहां अपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) नीति को अंतिम रूप देने की तैयारी में है, वहीं फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) ने नीति निर्माण में डीलर्स की अधिक भागीदारी की मांग की है। संगठन ने कहा कि स्वच्छ मोबिलिटी की दिशा में कदम जरूरी है, लेकिन इसके साथ जमीनी स्तर पर जुड़े रोजगार और आजीविका का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

दिल्ली में आयोजित एक उद्योग कार्यक्रम में FADA के अध्यक्ष सी. एस. विग्नेश्वर ने कहा कि दिल्ली देश के मोबिलिटी ट्रांजिशन का प्रमुख केंद्र है और यहां बनाई गई नीतियां पूरे देश के लिए उदाहरण बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि EV अपनाने को लेकर उद्योग पूरी तरह समर्थन में है, लेकिन यह बदलाव “एनाब्लिंग” होना चाहिए, न कि केवल “एनफोर्समेंट” आधारित।

एफएडीए (FADA) दिल्ली के चेयरपर्सन शैलेंद्र गुप्ता ने भी सरकार से अपील की कि आगामी नीतियों में डीलर्स के सुझावों को शामिल किया जाए, ताकि इस सेक्टर से जुड़े हजारों परिवारों के रोजगार और विकास को सुरक्षित रखा जा सके।

ऑटो रिटेल में मजबूत ग्रोथ

दिल्ली के ऑटो रिटेल बाजार में मार्च 2026 में 17% की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें दोपहिया वाहनों में 30%, पैसेंजर वाहनों में 25% और कमर्शियल वाहनों में 22% की बढ़ोतरी हुई। पिछले एक साल में करीब 8 लाख नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ। शहर में लगभग 550 डीलर आउटलेट्स हैं, जो करीब 55,000 लोगों को रोजगार देते हैं।

डीलर्स का योगदान राजस्व में भी अहम है। FADA के अनुसार, दिल्ली में ऑटो डीलर्स हर साल लगभग ₹7,150 करोड़ का योगदान देते हैं, जिसमें ₹2,650 करोड़ मोटर व्हीकल टैक्स और ₹4,500 करोड़ जीएसटी शामिल है।

EV अपनाने में तेजी

दिल्ली में EV अपनाने की रफ्तार भी तेजी से बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में 62%, पैसेंजर EV में 41% और कमर्शियल EV में करीब 700% की वृद्धि दर्ज की गई है। इस पर शैलेंद्र गुप्ता ने कहा, “भारत अब EV पर बहस नहीं कर रहा, बल्कि इसे अपना रहा है,” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सभी सेगमेंट में यह बदलाव एक समान गति से नहीं होगा।

डीलर्स को बनाया जाए ट्रांजिशन पार्टनर

एफएडीए (FADA) ने जोर दिया कि ईवी ट्रांजिशन का सबसे बड़ा प्रभाव डीलर्स पर पड़ेगा, क्योंकि वे ग्राहकों के साथ सीधे जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि डीलर्स पहले से ही कस्टमर एजुकेशन, ईवी अपनाने, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और स्किलिंग जैसी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इस बदलाव को सुचारु बनाने के लिए एफएडीए ने तीन प्रमुख सुझाव दिए हैं—पॉलिसी स्थिरता, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और रोजगार सृजन।

इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किलिंग पर जोर

संस्था ने दिल्ली में 150 पब्लिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है और इसे सरकार के साथ साझेदारी में फंड करने की पेशकश की है। साथ ही, ITI में ट्रेनिंग सेंटर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का सुझाव दिया है, ताकि ईवी सेक्टर के लिए स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार की जा सके।

स्क्रैपेज और ऑटो जोन का प्रस्ताव

एफएडीए (FADA) ने वाहन स्क्रैपेज नीति का सपोर्ट करते हुए दिल्ली में स्क्रैपेज सेंटर स्थापित करने की आवश्यकता बताई है। इसके अलावा, संस्था ने आधुनिक सुविधाओं से लैस डेडिकेटेड ऑटो जोन विकसित करने की भी पेशकश की है।

अंत में, एफएडीए (FADA) ने कहा कि ईवी ट्रांजिशन को इस तरह लागू किया जाना चाहिए कि उद्योग से जुड़े लोगों की आजीविका प्रभावित न हो। डीलर्स इस बदलाव में अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार हैं, बशर्ते नीतियां जमीनी हकीकत के अनुरूप और सहयोगात्मक हों।

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