भारत की प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) ने संभावित IPO की तैयारी के तहत अपना मुख्यालय सिंगापुर से वापस भारत स्थानांतरित कर लिया है। यह कदम कंपनी के लिए बड़ा रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि एक दशक से अधिक समय पहले उसने अपना मुख्यालय विदेश में स्थापित किया था।
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी वित्त वर्ष 2027 (मार्च 2027 तक) के दौरान भारत के शेयर बाजार में लिस्टिंग की योजना बना रही है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत का ई-कॉमर्स बाजार तेजी से बढ़ रहा है और देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या एक अरब से अधिक हो चुकी है।
यह कदम उन भारतीय स्टार्टअप्स की बढ़ती प्रवृत्ति को भी दर्शाता है जो पब्लिक लिस्टिंग से पहले अपनी विदेशी होल्डिंग संरचना को भारत में स्थानांतरित कर रहे हैं। हाल के वर्षों में जेप्टो (Zepto) और Groww जैसे स्टार्टअप्स ने भी इसी तरह के कदम उठाए हैं। Groww ने पिछले साल अपना आईपीओ (IPO) पूरा किया था, जबकि जेप्टो ने दिसंबर में गोपनीय रूप से IPO के लिए दस्तावेज दाखिल किए थे।
व्यवसाय के स्तर पर Flipkart ने हाल के वर्षों में तेज़ी से विस्तार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कंपनी का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू लगभग 30 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो 2021 में करीब 23 अरब डॉलर था। प्लेटफॉर्म वर्तमान में 50 करोड़ से अधिक ग्राहकों को सेवा दे रहा है और लगभग 16 लाख विक्रेताओं के साथ काम करता है। कंपनी की लॉजिस्टिक्स इकाई (Ekart) देशभर के 22,000 से अधिक पिनकोड तक डिलीवरी सेवाएं प्रदान करती है।
वर्ष 2007 में बेंगलुरु में स्थापित फ्लिपकार्ट (Flipkart) उन शुरुआती भारतीय स्टार्टअप्स में शामिल था जिन्होंने वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने और नियामकीय ढांचे को आसान बनाने के लिए विदेशी होल्डिंग कंपनियां बनाई थीं। 2018 में अमेरिकी रिटेल दिग्गज वॉलमार्ट (Walmart) ने 16 अरब डॉलर के सौदे में Flipkart में बहुमत हिस्सेदारी खरीदी थी।
भारत सरकार भी हाल के वर्षों में तकनीकी कंपनियों को घरेलू बाजार में सूचीबद्ध होने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जिसके तहत नियमों में स्पष्टता और सरल कर संरचना प्रदान की गई है। फ्लिपकार्ट ने अप्रैल 2025 में अपने मुख्यालय को भारत लाने की योजना की घोषणा की थी और सितंबर में इस पुनर्गठन को सिंगापुर की अदालत से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी, जबकि भारत में भी संबंधित सुनवाई हुई थी।
कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, सरकार की मंजूरी के बाद अब फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड फ्लिपकार्ट ग्रुप की होल्डिंग इकाई बन गई है। यह बदलाव कंपनी की भारत के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।