क्विक-कॉमर्स की तेज़ रफ्तार से स्विगी का राजस्व 54% बढ़ा

क्विक-कॉमर्स की तेज़ रफ्तार से स्विगी का राजस्व 54% बढ़ा

क्विक-कॉमर्स की तेज़ रफ्तार से स्विगी का राजस्व 54% बढ़ा
स्विगी को अक्टूबर–दिसंबर तिमाही में 1,065 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ, हालांकि कंपनी के राजस्व में सालाना आधार पर 54 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स कंपनी स्विगी को अक्टूबर–दिसंबर तिमाही में 1,065 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ, जो पिछले साल की समान अवधि के 800 करोड़ रुपये के नुकसान से ज्यादा है। कंपनी ने गुरुवार को बाजार बंद होने के बाद जारी वित्तीय नतीजों में यह जानकारी दी। मजबूत राजस्व वृद्धि के बावजूद घाटा बढ़ा, जिसका मुख्य कारण क्विक-कॉमर्स कारोबार में लगातार विस्तार और उससे जुड़ी लागत रही।

तिमाही के दौरान स्विगी का कंसॉलिडेटेड ऑपरेशनल रेवेन्यू साल-दर-साल 54 प्रतिशत बढ़कर 6,148 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 3,993 करोड़ रुपये था। पिछली तिमाही की तुलना में राजस्व में 10.55 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि सालाना आधार पर घाटा बढ़ा, लेकिन सितंबर तिमाही के ₹1,092 करोड़ के नुकसान के मुकाबले इसमें थोड़ी कमी आई।

मुनाफे पर दबाव का मुख्य कारण खर्चों में तेज़ बढ़ोतरी रहा। कंपनी का कुल खर्च सालाना आधार पर 49 प्रतिशत बढ़कर 7,298 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसी दौरान एडजस्टेड EBITDA घाटा भी बढ़कर 712 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 490 करोड़ रुपये था।

कंपनी का क्विक-कॉमर्स कारोबार फूड डिलीवरी से बेहतर परफॉर्म करता रहा। इस सेगमेंट का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू साल-दर-साल 103.2 प्रतिशत और तिमाही-दर-तिमाही 13 प्रतिशत बढ़कर 7,938 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह लगातार चौथी तिमाही रही, जब क्विक-कॉमर्स में 100 प्रतिशत से अधिक की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। तिमाही के दौरान स्विगी ने 8 लाख नए मासिक ट्रांजैक्टिंग यूज़र्स जोड़े और 34 नए डार्कस्टोर शुरू कर कुल संख्या 31 शहरों में 136 तक पहुंचा दी।

क्विक-कॉमर्स में औसत ऑर्डर वैल्यू सालाना आधार पर करीब 40 प्रतिशत बढ़कर 746 हो गई, जिसे नॉन-ग्रॉसरी कैटेगरी और बड़े बास्केट साइज से सपोर्ट मिला। इस सेगमेंट का योगदान मार्जिन और EBITDA मार्जिन दोनों में सुधार देखने को मिला, हालांकि घाटा क्रमिक आधार पर बढ़कर 908 करोड़ रुपये हो गया।

वहीं, फूड डिलीवरी कारोबार ने भी स्थिर वृद्धि दर्ज की। इस सेगमेंट का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू सालाना आधार पर 20.5 प्रतिशत बढ़कर 8,959 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे तेज़ वृद्धि है। मासिक ट्रांजैक्टिंग यूज़र्स की संख्या 22 प्रतिशत बढ़कर 1.81 करोड़ पहुंच गई। फूड डिलीवरी सेगमेंट का एडजस्टेड EBITDA 13.1 प्रतिशत बढ़कर 272 करोड़ रुपये हो गया, जबकि EBITDA मार्जिन बढ़कर 3 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो पिछले दो वर्षों का उच्चतम स्तर है।

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