डॉ. सोमनाथ को लॉन्च व्हीकल सिस्टम इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष मिशनों का कई दशकों का अनुभव है। उनके नेतृत्व में ISRO ने चंद्रयान-3 की सफल चंद्र लैंडिंग और आदित्य-L1 मिशन जैसे ऐतिहासिक अभियान पूरे किए थे।
Mission 02 की तैयारी को मिलेगा अनुभव का लाभ
AgniKul का Mission 02 भारत में पहली बार एक ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट की रिकवरी का प्रयास करेगा। इस मिशन का उद्देश्य स्वदेशी तकनीक के जरिए पुन: उपयोग योग्य (Reusable) रॉकेट प्रणाली विकसित करना है।
कंपनी के अनुसार, मिशन दो चरणों में पूरा होगा। पहले चरण में बूस्टर स्टेज उड़ान के बाद अलग होकर नियंत्रित तरीके से समुद्र में उतरेगा और उसकी रिकवरी की जाएगी। दूसरे चरण में अपर स्टेज पेलोड को कक्षा (Orbit) में स्थापित करने के बाद निष्क्रिय होने के बजाय एक कार्यशील इन-ऑर्बिट प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा।
स्वदेशी तकनीक पर कंपनी का फोकस
डॉ. एस. सोमनाथ ने कहा कि उन्होंने AgniKul की प्रगति को करीब से देखा है। उनके अनुसार, कंपनी की सबसे बड़ी ताकत केवल उसकी महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि उसकी मजबूत इंजीनियरिंग सोच है। उन्होंने कहा कि Mission 02 भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि साबित हो सकता है। उन्होंने विशेष रूप से कंपनी के कन्वर्टिबल अपर स्टेज, स्वदेशी सेमी-क्रायोजेनिक प्रोपल्शन सिस्टम और 3D-प्रिंटेड इंजन की सराहना करते हुए कहा कि ये तकनीकें अंतरिक्ष प्रक्षेपण को अधिक तेज़, किफायती और प्रभावी बना सकती हैं।
अंतरिक्ष क्षेत्र में नवाचार को मिलेगी नई गति
AgniKul Cosmos के, को-फाउंडर और सीईओ श्रीनाथ रविचंद्रन ने कहा कि डॉ. सोमनाथ का बोर्ड में शामिल होना कंपनी के लिए बड़ी उपलब्धि है। उनका अनुभव रॉकेट डिजाइन, बूस्टर रिकवरी और ऑर्बिटल ऑपरेशंस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कंपनी का मार्गदर्शन करेगा। वहीं कंपनी का मानना है कि डॉ. सोमनाथ के अनुभव और रणनीतिक सलाह से AgniKul अपने आगामी मिशनों को और अधिक सफलतापूर्वक आगे बढ़ा सकेगा तथा भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी।