इस कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा और प्रशासन में नए विचारों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया -
यह कार्यक्रम Capacity Building Commission के स्थापना दिवस और मिशन कर्मयोगी के 5 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया। इसका मकसद सरकारी अधिकारियों और संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ाना और उन्हें आधुनिक जरूरतों के अनुसार तैयार करना है। साथ ही, डिजिटल लर्निंग और ट्रेनिंग सिस्टम को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
परंपरागत ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के मेल पर जोर
इस सत्र में कई अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया और भारतीय ज्ञान प्रणाली की आज के समय में उपयोगिता पर चर्चा की। बातचीत का मुख्य फोकस इस बात पर था कि भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा, रिसर्च और शासन में कैसे शामिल किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि यह ज्ञान प्रणाली आज के समय की समस्याओं के समाधान, इनोवेशन और बेहतर नीतियां बनाने में मदद कर सकती है।
कार्यक्रम की शुरुआत में जॉइंट सेक्रेटरी (एडमिनिस्ट्रेशन) सैयद एकराम रिजवी ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने बताया कि Capacity Building Commission डिजिटल प्लेटफॉर्म और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स के जरिए सरकारी कामकाज को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे अधिकारियों की स्किल्स में सुधार हो रहा है और वे बेहतर तरीके से काम कर पा रहे हैं।
विशेषज्ञों ने मल्टीडिसिप्लिनरी शिक्षा पर दिया जोर
इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में IIT हैदराबाद के एसोसिएट प्रोफेसर मोहन राघवन ने संबोधित किया। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा के हर क्षेत्र में शामिल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसे सिर्फ एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे फ्रेमवर्क के रूप में देखना चाहिए, जो साइंस, इंजीनियरिंग, ह्यूमैनिटीज और मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों को और मजबूत बना सकता है।
रटने की बजाय समग्र शिक्षा मॉडल अपनाने की जरूरत
मोहन राघवन ने कहा कि अगर भारतीय ज्ञान प्रणाली को सही तरीके से शामिल किया जाए, तो शिक्षा सिर्फ रटने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एक समग्र (Holistic) मॉडल बन जाएगी। इसमें ज्ञान के साथ-साथ उसका उपयोग और नैतिक मूल्यों पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे छात्रों का सर्वांगीण विकास संभव होगा और वे समाज के लिए अधिक उपयोगी बन पाएंगे।
नई शिक्षा नीति और शोध को मिलेगा बढ़ावा
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा में शामिल करना देश में चल रहे शिक्षा सुधारों के अनुरूप है। इससे रिसर्च, इनोवेशन और क्रिटिकल थिंकिंग को बढ़ावा मिलेगा, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ होगा। इससे ऐसे छात्र तैयार होंगे, जो प्रोफेशनल रूप से कुशल होने के साथ-साथ सामाजिक रूप से जागरूक भी होंगे।
कार्यक्रम के अंत में एक इंटरैक्टिव प्रश्न-उत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने आधुनिक शिक्षा और शासन में पारंपरिक ज्ञान को शामिल करने के तरीकों पर चर्चा की। इस दौरान कई नए सुझाव सामने आए, जो भविष्य की नीतियों और योजनाओं में उपयोगी हो सकते हैं।
भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणाली की दिशा में कदम
शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह पहल दिखाती है कि भारतीय ज्ञान प्रणाली आज भी प्रासंगिक है और भविष्य की शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह पहल मिशन कर्मयोगी के तहत सरकार के उस प्रयास को भी दर्शाती है, जिसमें एक ज्ञान-आधारित, लचीली और मानवीय शासन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक नीतियों और संस्थागत प्रक्रियाओं के साथ जोड़ने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह आयोजन शिक्षा और शासन दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।