देश में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश बढ़ रहा है, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है और डिजिटल तकनीकों को तेजी से अपनाया जा रहा है, जिससे लगभग हर उद्योग में बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि, इन सबके बीच एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि क्या भारत वास्तव में अपनी प्रतिभा (Talent) की सही पहचान, मूल्यांकन और उपयोग कर पा रहा है? क्योंकि किसी भी बड़े विजन की सफलता उन लोगों पर निर्भर करती है जो उसे जमीन पर लागू करते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में भर्ती प्रक्रिया (Hiring) के क्षेत्र में AI आधारित टैलेंट असेसमेंट एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरे हैं। इन तकनीकों ने भर्ती प्रक्रिया को तेज किया है, पक्षपात (Bias) को कम किया है और उम्मीदवारों को सही भूमिका से जोड़ने में अधिक सटीकता प्रदान की है। आज कॉर्पोरेट और टेक उद्योगों में कई कंपनियां AI आधारित असेसमेंट को भर्ती प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही हैं।
टैलेंट गैप कम करने में मददगार हो सकता है AI
AI आधारित असेसमेंट भारत में टैलेंट की कमी और कार्यक्षमता से जुड़ी समस्याओं को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। भारत में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिनके पास कौशल तो है, लेकिन उन्हें औपचारिक पहचान नहीं मिल पाती। खासतौर पर कॉर्पोरेट ढांचे से बाहर काम करने वाले लाखों श्रमिकों की प्रतिभा अक्सर अनदेखी रह जाती है।
AI आधारित स्किल असेसमेंट बड़े स्तर पर लोगों के कौशल की पहचान और प्रमाणन (Validation) कर सकते हैं, जिससे कार्यबल की दक्षता और उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।
केवल व्हाइट-कॉलर नौकरियों तक सीमित है मौजूदा सिस्टम
आज अधिकांश AI आधारित स्किल असेसमेंट टूल्स मुख्य रूप से व्हाइट-कॉलर नौकरियों, खासकर IT और IT-enabled सेवाओं के लिए बनाए गए हैं। इन क्षेत्रों में कौशल को कोडिंग टेस्ट, एप्टीट्यूड टेस्ट और ऑनलाइन इंटरव्यू के जरिए आसानी से मापा जा सकता है।
हालांकि, समय के साथ यह मॉडल सीमित साबित होने लगा है क्योंकि इससे देश का बड़ा ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स बाहर रह गया है। भारत में निर्माण कार्य, मशीन संचालन, लॉजिस्टिक्स, तकनीकी सेवाएं और मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों लोगों के कौशल का कोई मानकीकृत मूल्यांकन नहीं हो पाता।
ब्लू-कॉलर कर्मचारियों के सामने कई चुनौतियां
ब्लू-कॉलर कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी समस्या औपचारिक मान्यता की कमी है। कई श्रमिक वर्षों के अनुभव और कौशल के बावजूद किसी प्रमाणपत्र या औपचारिक पहचान से वंचित रहते हैं। इसके अलावा महिलाओं की भागीदारी भी कई ब्लू-कॉलर क्षेत्रों में बेहद कम है। यदि स्किल असेसमेंट सिस्टम निष्पक्ष न हो, तो इससे महिलाओं और अन्य वंचित समूहों के अवसर और सीमित हो सकते हैं।
वर्तमान में कई असेसमेंट प्लेटफॉर्म केवल कॉर्पोरेट जॉब्स से जुड़े कौशल को ही प्राथमिकता देते हैं, जिससे तकनीशियन, ऑपरेटर, निर्माण श्रमिक और सर्विस सेक्टर से जुड़े कर्मचारियों के कौशल को पर्याप्त महत्व नहीं मिल पाता।
AI स्किल असेसमेंट में छिपा है बड़ा अवसर
जहां चुनौतियां होती हैं, वहीं अवसर भी मौजूद होते हैं। AI आधारित असेसमेंट ने पहले ही यह साबित कर दिया है कि वे भर्ती प्रक्रिया में तेजी, निष्पक्षता और बेहतर परिणाम दे सकते हैं। अब तकनीक के विकास के साथ स्किल टेस्टिंग को डिजिटल रूप से संभव बनाया जा रहा है। कंप्यूटर विजन, कैमरा आधारित असेसमेंट, सिमुलेशन टेस्टिंग और रिमोट प्रॉक्टरिंग जैसी तकनीकों ने इसे नई दिशा दी है।
वास्तविक बदलाव कैसे आएगा?
AI आधारित असेसमेंट की असली ताकत तब सामने आएगी जब इन्हें केवल सीमित कॉर्पोरेट कर्मचारियों तक सीमित न रखकर पूरे कार्यबल पर लागू किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, किसी छोटे शहर या ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला व्यक्ति वर्षों से किसी तकनीकी कार्य में कुशल हो सकता है, लेकिन उसके पास कोई आधिकारिक प्रमाणपत्र नहीं होता। यदि AI आधारित असेसमेंट के जरिए उसके कौशल का मूल्यांकन किया जाए और उसे एक मानकीकृत स्किल स्कोर मिले, तो उसकी प्रतिभा देशभर के नियोक्ताओं तक पहुंच सकती है। इससे रोजगार के बेहतर अवसर, उचित वेतन और उसके कौशल को पहचान मिल सकेगी।
समय के साथ यह एक ऐसी मेरिट आधारित व्यवस्था बना सकता है, जहां नौकरी और अवसर व्यक्ति की क्षमता के आधार पर मिलें, न कि केवल संपर्कों या पारंपरिक व्यवस्था के आधार पर।
“One Nation, One Skill Score” की दिशा में कदम
AI आधारित स्किल असेसमेंट “One Nation, One Skill Score” जैसे विजन को भी मजबूत कर सकते हैं, जहां कौशल का प्रमाणन एक समान मानकों के आधार पर हो और उसे विभिन्न उद्योगों व देशों में मान्यता मिले। इस पूरे सिस्टम में समावेशन (Inclusion) भी बेहद महत्वपूर्ण है। डेटा और मशीन इंटेलिजेंस आधारित असेसमेंट पारंपरिक पक्षपात को कम कर सकते हैं और महिलाओं व अन्य वंचित समूहों को समान अवसर प्रदान कर सकते हैं।
आर्थिक विकास के लिए क्यों जरूरी है यह बदलाव?
कई नियोक्ताओं के लिए बिना प्रमाणपत्र वाले उम्मीदवारों के कौशल का सही मूल्यांकन करना मुश्किल होता है। इससे भर्ती प्रक्रिया अनिश्चित हो जाती है और कंपनियों को अतिरिक्त प्रशिक्षण पर अधिक खर्च करना पड़ता है। यदि बड़ी संख्या में लोगों के कौशल का सही मूल्यांकन और प्रमाणन नहीं हो पाएगा, तो भारत अपने कार्यबल की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर सकेगा। जबकि दुनिया में भारत को भविष्य के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस हब के रूप में देखा जा रहा है, ऐसे में कुशल कार्यबल की मांग और बढ़ेगी।
कैसा होना चाहिए भविष्य का स्किल असेसमेंट सिस्टम?
AI आधारित असेसमेंट को केवल व्हाइट-कॉलर नौकरियों तक सीमित रखने के बजाय ब्लू-कॉलर क्षेत्रों तक भी विस्तार देना होगा।
असेसमेंट को वास्तविक कार्य वातावरण के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। रिमोट प्रॉक्टरिंग जैसी तकनीकों की मदद से देश के दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोग भी आसानी से स्किल टेस्ट दे सकेंगे। इसके साथ ही स्किल असेसमेंट प्लेटफॉर्म को सरल, बहुभाषी और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाना जरूरी होगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और उद्योग जगत को मिलकर ऐसा समावेशी AI आधारित स्किल असेसमेंट सिस्टम विकसित करना चाहिए, जो हर क्षेत्र के श्रमिकों को समान अवसर दे सके। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और देश वैश्विक स्तर पर कुशल मानव संसाधन का प्रमुख केंद्र बन सकेगा।
(यह लेख - Skyljo के फाउंडर अमीत पडियार के विचारों पर आधारित है।)