हालांकि, आने वाले वर्षों में भारत का संगठित सिंगल-स्पेशियल्टी हेल्थकेयर सेक्टर तेजी से बढ़ने के लिए तैयार है। यह बढ़त मरीजों की बदलती पसंद, खास इलाज पर केंद्रित मॉडल और आसानी से बढ़ाए जा सकने वाले ऑपरेशनल ढांचे के कारण हो रही है।
एक नई इंडस्ट्री रोडमैप रिपोर्ट के मुताबिक, यह सेक्टर पूरे हेल्थकेयर प्रोवाइडर बाजार की तुलना में कहीं ज्यादा तेज़ी से बढ़ेगा। इसकी वजह यह है कि नए उद्यमी बड़े ऑल-इन-वन अस्पतालों के बजाय बार-बार और ज्यादा संख्या में होने वाले इलाज की जरूरतों पर आधारित प्लेटफॉर्म बना रहे हैं।
यह विश्लेषण बेसेमर वेंचर पार्टनर्स द्वारा जारी किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के संगठित सिंगल-स्पेशियल्टी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स का बाजार 2025 में 4.4 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 12.3 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकता है। यानी इसमें करीब 22 प्रतिशत की सालाना ग्रोथ देखने को मिलेगी, जो पूरे हेल्थकेयर सेक्टर की रफ्तार से दोगुनी से भी ज्यादा है।
फर्म ने कहा कि यह बदलाव इस बात को दिखाता है कि भारत में हेल्थकेयर सेवाएं देने और लेने का तरीका अब संरचनात्मक रूप से बदल रहा है।
भारत का कुल हेल्थकेयर प्रोवाइडर बाजार, जिसकी कीमत करीब 54 अरब डॉलर है, लंबे समय से मल्टी-स्पेशियल्टी अस्पतालों पर निर्भर रहा है। हालांकि ये अस्पताल आज भी अहम हैं, लेकिन इनके साथ-साथ अब फोकस्ड और खास इलाज देने वाले प्रोवाइडर्स का एक नया इकोसिस्टम तेजी से बढ़ रहा है।
ये कंपनियां आमतौर पर किसी एक ही स्पेशियल्टी पर ध्यान देती हैं, स्टैंडर्ड इलाज प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करती हैं और कई बार कम संसाधनों वाले (एसेट-लाइट) मॉडल के जरिए अलग-अलग शहरों में विस्तार करती हैं। बेसेमर ने ऐसे कई स्टार्टअप्स में निवेश किया है, जिनमें डायलिसिस चेन नेफ्रोप्लस, IVF प्लेटफॉर्म प्लूरो और कंटीन्यूअम केयर प्रोवाइडर सुकिनो शामिल हैं।
रिपोर्ट में ऐसे प्लेटफॉर्म्स को “स्पेशियल्टी-नेटिव” कहा गया है। ये खास तौर पर किसी एक बीमारी या इलाज के लिए बनाए गए सेंटर होते हैं। ऐसे मॉडल मरीजों को एक-जैसा और बेहतर अनुभव देते हैं, हब-एंड-स्पोक नेटवर्क के जरिए आसानी से फैलाए जा सकते हैं और इनमें निवेश की भरपाई जल्दी हो जाती है। साथ ही, इनकी कमाई और मुनाफा भी बेहतर रहता है। ये मॉडल आंखों के इलाज, कैंसर, डेंटल केयर और अन्य खास बीमारियों जैसे क्षेत्रों के लिए खास तौर पर उपयुक्त हैं।
एक और बड़ा मौका ब्रांड बनाने में है। कई सिंगल-स्पेशियल्टी सेगमेंट अभी भी बिखरे हुए हैं और उनमें कोई राष्ट्रीय स्तर का बड़ा ब्रांड नहीं है। इससे नए संस्थापकों को क्षेत्रीय क्लीनिकों को जोड़कर मजबूत और पहचान बनाने वाले प्लेटफॉर्म खड़े करने का मौका मिलता है। रिपोर्ट के अनुसार, सफल कंपनियां आगे चलकर IPO लाने या बड़े अधिग्रहण का हिस्सा बन सकती हैं।
बेसेमर वेंचर पार्टनर्स इंडिया के पार्टनर नितिन कैमल ने कहा, “जैसे-जैसे यह बाजार 12 अरब डॉलर की ओर बढ़ रहा है, हमें उम्मीद है कि भारत की अगली पीढ़ी की बड़ी हेल्थकेयर कंपनियां एक-एक स्पेशियल्टी पर फोकस करके बनाई जाएंगी। जो प्लेटफॉर्म गहरी क्लिनिकल समझ को बड़े स्तर पर विस्तार की क्षमता के साथ जोड़ पाएंगे, वही विजेता बनेंगे।”