केंद्र सरकार ने लद्दाख के पहले सरकारी मेडिकल कॉलेज के संचालन को मंजूरी दे दी है। लेह में स्थित यह मेडिकल कॉलेज शैक्षणिक सत्र 2027-28 से शुरू होगा। इससे केंद्र शासित प्रदेश के छात्रों को अपने क्षेत्र में मेडिकल शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, इस पहल से लद्दाख में क्लिनिकल ट्रेनिंग की सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के हस्तक्षेप के बाद यह मंजूरी दी है। इस निर्णय से मेडिकल कॉलेज के लिए जरूरी शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों की भर्ती का रास्ता भी साफ हो गया है। स्वीकृत 103 नियमित पदों पर शैक्षणिक जरूरतों के अनुसार चरणबद्ध तरीके से भर्ती की जाएगी।
स्थानीय छात्रों को मिलेंगे मेडिकल शिक्षा के अवसर
लद्दाख में लंबे समय से सरकारी मेडिकल कॉलेज की मांग की जा रही थी। इस संस्थान की शुरुआत से स्थानीय छात्रों को मेडिकल की पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, मेडिकल शिक्षा और क्लिनिकल ट्रेनिंग की उपलब्धता से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस मंजूरी को लद्दाख के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज शुरू होने से युवाओं को अपने घर के करीब गुणवत्तापूर्ण मेडिकल शिक्षा हासिल करने के अधिक अवसर मिलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि लद्दाख प्रशासन शैक्षणिक सत्र 2027-28 में पहले बैच के छात्रों के स्वागत के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगा।
103 पदों पर चरणबद्ध तरीके से होगी भर्ती
मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों की भर्ती शुरू करने के लिए उपराज्यपाल ने 13 जुलाई, 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा को पत्र लिखा था। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से पहले बुनियादी ढांचे के लगभग 80 प्रतिशत पूरा होने की शर्त में एक बार की छूट देने का अनुरोध किया था।
इस अनुरोध का उद्देश्य शैक्षणिक गतिविधियां शुरू होने से पहले आवश्यक मानव संसाधन की व्यवस्था करना था, जबकि कॉलेज के स्थायी शैक्षणिक बुनियादी ढांचे का निर्माण जारी है। मंत्रालय ने इस अनुरोध पर सहमति जताते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की ओर से तय शैक्षणिक जरूरतों के आधार पर 2027-28 से 103 स्वीकृत पदों पर चरणबद्ध भर्ती की जाएगी।
प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सभी पद स्वीकृत भर्ती नियमों के अनुसार नियमित आधार पर भरे जाएं। स्थायी परिसर की सुविधाएं पूरी होने के बाद मेडिकल कॉलेज को वहां स्थानांतरित किया जाएगा।
शुरुआती छात्रों के लिए अंतरिम सुविधाएं तैयार
स्थायी बुनियादी ढांचे का निर्माण पूरा होने तक कॉलेज के संचालन के लिए अंतरिम व्यवस्था की गई है। इसके तहत नवनिर्मित दो इमारतों की पहचान की गई है, जिनका इस्तेमाल अकादमिक ब्लॉक और छात्रों के हॉस्टल के रूप में किया जाएगा। इसके अलावा, 200 बिस्तरों वाला मौजूदा एसएनएम अस्पताल मेडिकल कॉलेज के पहले बैच के एमबीबीएस छात्रों को क्लिनिकल ट्रेनिंग देने में मदद करेगा। इस अस्पताल में लगभग 60 अनुभवी डॉक्टर उपलब्ध हैं, जो छात्रों को व्यावहारिक चिकित्सा प्रशिक्षण देने में सहयोग कर सकते हैं।
ये अंतरिम सुविधाएं निर्धारित शर्तों के अनुसार अस्थायी रूप से इस्तेमाल की जाएंगी। स्थायी परिसर तैयार होने तक इनका उपयोग जारी रहेगा, जिससे कॉलेज की शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने की योजना को आगे बढ़ाया जा सके।
मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा का लद्दाख में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप टीम तैयार करना और 2027-28 में कॉलेज का संचालन शुरू करने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं पूरी करना है।
लद्दाख के पहले सरकारी मेडिकल कॉलेज की शुरुआत से क्षेत्र में मेडिकल शिक्षा का विस्तार होगा। साथ ही, स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित चिकित्सा पेशेवरों को तैयार करने और लंबे समय में स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।