नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) की वेंचर कैपिटल शाखा NABVENTURES ने अपने दूसरे फंड, NABVENTURES Fund II की पहली क्लोजिंग की घोषणा की है। इस चरण में फंड ने ₹450 करोड़ की निवेश प्रतिबद्धताएं हासिल की हैं। फंड का कुल लक्ष्य ग्रीन-शू विकल्प सहित ₹1,500 करोड़ जुटाना है। NABVENTURES के पिछले फंड अब तक कुल 23 उद्यमों में निवेश कर चुके हैं।
NABARD इस फंड का मुख्य निवेशक है। Fund II शुरुआती और विकास के चरण में मौजूद ऐसे कारोबारों में निवेश करेगा, जो कृषि मूल्य श्रृंखला और ग्रामीण बाजारों की चुनौतियों को हल करने के लिए Technology, विस्तार योग्य बिजनेस मॉडल और टिकाऊ समाधानों का इस्तेमाल करते हैं।
पहली क्लोजिंग की घोषणा करते हुए NABARD के चेयरमैन डॉ. शाजी कृष्णन वी ने कहा, “NABVENTURES Fund II की पहली क्लोजिंग में ₹450 करोड़ जुटाना भारत की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नवाचार को बढ़ावा देने की NABARD की प्रतिबद्धता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस क्षेत्र में बदलाव के साथ ऐसे विस्तार योग्य और Technology-आधारित समाधानों की जरूरत बढ़ रही है, जो उत्पादकता बढ़ाएं, वैल्यू चेन को मजबूत करें, किसानों की आय में सुधार लाएं और ग्रामीण उद्यमों को अधिक मजबूत बनाएं।”
उन्होंने कहा कि Fund II के माध्यम से ऐसे उद्यमियों के साथ साझेदारी करने का लक्ष्य है, जो कृषि क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों के समाधान के लिए नए विचारों और तकनीकों पर काम कर रहे हैं। फंड का फोकस ऐसे कारोबारों को समर्थन देना है, जो मजबूत व्यावसायिक नतीजों के साथ टिकाऊ विकास, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता, वित्तीय समावेशन और रोजगार व आजीविका के अवसर पैदा करने में योगदान दें।
डॉ. कृष्णन ने कहा कि नवाचार के इकोसिस्टम को मजबूत करके NABARD भारत की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव को गति देना चाहता है, ताकि यह अधिक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार बन सके।
इन क्षेत्रों में निवेश करेगा फंड
NABVENTURES Fund II एग्री-टेक, फूड और एग्रीबिजनेस, ग्रामीण फिनटेक, जलवायु-अनुकूल समाधान, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स सहित ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने वाले अन्य क्षेत्रों में निवेश करेगा। पूंजी उपलब्ध कराने के अलावा, यह फंड NABARD के देशव्यापी नेटवर्क और क्षेत्रीय विशेषज्ञता का भी लाभ उठाएगा। इससे निवेश पाने वाली कंपनियों को अपना कारोबार बढ़ाने और ग्रामीण बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।