NCERT के डायरेक्टर प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी ने हाल ही में एक मीडिया हाऊस को इंटरव्यू देते हुए कहा कि NCERT के यूनिवर्सिटी बनने के बाद पढ़ाई, परीक्षा और रिजल्ट का नया शेड्यूल तय होगा। शिक्षा के क्षेत्र में नये प्रयोग किए जा सकेंगे। अभी भी एनसीईआरटी के सेंटर्स से ट्रेनिंग लेने वाले टीचर्स की ज्यादा मांग होती है। एनसीईआरटी में अभी रिसर्च स्कॉलर नहीं होते, लेकिन अब पीएचडी भी करवा सकेंगे। छात्र अपने रिसर्च पेपर प्रकाशित करेंगे। रिसर्च पेपर से पॉलिसी बनाने में फायदा होगा। स्कूली शिक्षा में किस तरह की जरूरतें है, इस पर छात्र रिसर्च करेंगे। मेन कैंपस का विस्तार होगा, हॉस्टल बनाया जाएगा।
बता दें कि, सर्वप्रथम साल 2023 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी में बदलने की घोषणा करते हुए कहा था कि NCERT के रिसर्च यूनिवर्सिटी में बदलने से ग्लोबल सहयोग के रास्ते खुलेंगे और यह ग्लोबल एजुकेशनल माहौल में ज़्यादा सक्रिय रूप से योगदान दे पाएगा।
NCERT के यूनिवर्सिटी बनने से छात्रों को क्या फायदा होगा?
एनसीईआरटी डायरेक्टर प्रो सकलानी का कहना है कि अभी संस्थान के रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन (क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान) विभिन्न राज्यों के विवि से संबद्ध होते हैं। एनसीईआरटी टीचिंग एजुकेशन में काफी समय से ग्रेजुएशन लेवल पर चार साल का इंटीग्रेटिड बीए बीएड और बीएससी बीएड कोर्स चला रहा है। एनसीईआरटी भोपाल का क्षेत्रीय संस्थान नैक ए++ है, लेकिन चार वर्ष के कोर्स की डिग्री राज्य की यूनिवर्सिटी से मिलती है। यूनिवर्सिटी का अपना शेड्यूल होता है। कई बार समय पर एग्जाम व रिजल्ट नहीं आ पाता है और इससे छात्रों का नुकसान होता है।
NCERT यूनिवर्सिटी की वैश्विक स्तर पर मौजूदगी कैसे होगी?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय शिक्षा संस्थानों की वैश्विक स्तर पर मौजूदगी पर जोर दिया गया है। यूनिवर्सिटी बनने से विदेशी संस्थानों से टाईअप आसान होगा। देश के बाहर भी कैंपस खोल सकते हैं। एनसीईआरटी आउटरीच प्रोग्राम चला सकता है। विदेशों में भी छात्रों को ट्रेनिंग दे सकती है। ट्रेनिंग और रिसर्च अच्छी तरह से हो पाएंगे। यह राज्य सरकारों के लिए भी लाभकारी होगा। वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव दिखेगा।
छात्रों के लिए NCERT यूनिवर्सिटी में खास कोर्स कौन से होंगे, आइए जानें
1. एजुकेशनल टेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 डिजिटल कंटेंट और नेशनल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए शिक्षा में एक्सेस, इक्विटी और क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी के रणनीतिक इस्तेमाल पर जोर देती है। यह कोर्स इसी दिशा में कदम है।
2. एजुकेशनल असेसमेंट और साइकोमेट्रिक्स में मास्टर डिग्री
देश में स्कूल आधारित असेसमेंट, राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे और टेक्नोलॉजी आधारित मूल्यांकन जैसे सुधार लागू करने के लिए प्रोफेशनल्स की जरूरत है। यह कोर्स ऐसे विशेषज्ञ तैयार करेगा जो मान्य, विश्वसनीय और निष्पक्ष असेसमेंट टूल डिजाइन करने, बड़े पैमाने पर असेसमेंट डेटा की एनालिसिस करने में सक्षम होंगे।
3. स्कूल गवर्नेंस और लीडरशिप में मास्टर डिग्री
NEP 2020 के अनुसार स्कूल लीडरशिप का अच्छा होना एजुकेशन क्वालिटी बेहतर बनाने के लिए जरूरी है। स्कूल हेड और सिस्टम लेवल के लीडर्स का प्रोफेशनल डेवलपमेंट जरूरी है। जैसे-जैसे भारतीय स्कूल ज्यादा आजादी, जवाबदेही और सहयोग की ओर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे गवर्नेंस, इंस्ट्रक्शनल लीडरशिप और ऑर्गनाइज़ेशनल मैनेजमेंट में ट्रेन्ड लीडर्स की जरूरत बढ़ रही है।
4. मल्टीलिंगुअल एजुकेशन में मास्टर डिग्री
यह कोर्स ऐसे करिकुलम, शिक्षाशास्त्र और असेसमेंट डिजाइन करने की प्रोफेशनल क्षमता बनाएगा जो सांस्कृतिक संदर्भों का सम्मान करते हुए संबंधित भाषाओं में सीखने में मदद करें।
5. करिकुलम डेवलपमेंट और इवैल्यूएशन में मास्टर डिग्री
राष्ट्रीय फ्रेमवर्क और सीखने वालों की जरूरतों के हिसाब से करिकुलम डिजाइन, लागू और उसकी समीक्षा करने के लिए विशेषज्ञ तैयार किए जा सकेंगे।