राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर देश के प्रमुख ईवी स्टार्टअप उद्यमियों ने अपनी उद्यमिता यात्रा के अनुभव साझा किए और साथ ही शुरुआती स्टार्टअप संस्थापकों को आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी। इन उद्यमियों ने बताया कि कैसे भरोसे, नवाचार और सहयोग के जरिए भारत में ईवी और एनर्जी इकोसिस्टम को मजबूत किया जा सकता है।
ज़ेलियो ई-मोबिलिटी लिमिटेड के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर कुणाल आर्य ने कहा "जब हमने 2021 में Zelio E-Mobility Limited शुरू की, तो हमारा लक्ष्य साफ था ऐसे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाना जो हर दिन के लिए भरोसेमंद, किफायती और आसानी से उपयोग किए जा सकें। 2024 में हमने इस सोच को इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर तक बढ़ाया, ताकि लास्ट माइल मोबिलिटी और लोगों की आजीविका की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
इस सफर में हमने सीखा कि सिर्फ तकनीक से काम नहीं चलता। हमें असली ग्राहकों की समस्याओं को समझना, राइडर्स और डीलरों की बात सुनना और धैर्य के साथ व्यवसाय को बढ़ाना पड़ता है। सप्लाई चेन की चुनौतियों से निपटना और बाजार में विश्वास बनाना हर कदम ने हमारी प्रक्रिया को मजबूत किया और लंबी अवधि में मूल्य बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को बढ़ाया।
एक छोटे आइडिया से लेकर पूरे देश में 350 से ज्यादा डीलरशिप और 2 लाख से अधिक राइडर्स तक हमारी पहुंच, यह दिखाता है कि असली सफलता सिर्फ नंबरों में नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास में है। हमारा सफल SME IPO भी यह साबित करता है कि निवेशक हमारे विज़न पर भरोसा करते हैं और भविष्य के विकास में हमारा साथ देंगे। हमारा मानना है: भविष्य इलेक्ट्रिक है।"
राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस पर ईवेयम(EVeium) स्मार्ट मोबिलिटी के फाउंडर और सीईओ समीर मोइदिन ने कहा "जब हमने 2022 में EVeium शुरू किया, तो हमारा विचार यह था कि इलेक्ट्रिक वाहन सिर्फ प्रदूषण कम नहीं करेंगे, बल्कि भारत में रोज़मर्रा की यात्रा को और स्मार्ट, सुरक्षित और मजेदार बना सकते हैं। शुरू से ही हमारा ध्यान ऐसे टू-व्हीलर्स बनाने पर था जो सहज, सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार हों, और साथ ही रोज़मर्रा के लोगों के लिए किफायती और उपयोगी भी हों।
हमने जल्दी ही सीखा कि असली इनोवेशन तब आता है जब हम लोगों के असली उपयोग को समझते हैं, उनकी दिनचर्या को देखते हैं और ऐसी तकनीक बनाते हैं जो असली समस्याओं का समाधान करे, सिर्फ नए फीचर्स जोड़ने के लिए नहीं। हमने यह भी देखा कि साफ-सुथरी और टिकाऊ मोबिलिटी के लिए सिर्फ इंजीनियरिंग नहीं, बल्कि शिक्षा, आसान पहुँच और समुदाय की भागीदारी भी बहुत ज़रूरी है।
आज जब हम अपनी स्कूटर्स को सड़कों पर चलते देखते हैं, डीलर नेटवर्क बढ़ता है, और अधिक लोग इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अपनाने को तैयार हैं, तो हमें समझ आता है कि सोच-समझ कर डिजाइन, स्मार्ट तकनीक और स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता ऐसे सॉल्यूशन बना सकती है जिन्हें लोग रोज़ाना स्वाभाविक और गर्व के साथ चुनते हैं।"
काज़म के को-फाउंडर और सीईओ अक्षय शेखर ने सहयोग और इनोवेसन के ज़रिए भारत के ईवी और एनर्जी इकोसिस्टम को बनाने पर कहा “2025 ने यह साफ कर दिया कि सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना पहला कदम है। असली असर तब आता है जब पूरा इकोसिस्टम ईवी कंपनियां, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर देने वाले, बैटरी कंपनियां और बिजली व यूटिलिटी सेक्टर मिलकर सिस्टम को भरोसेमंद, बड़े स्तर पर काम करने योग्य और विश्वास के लायक बनाते हैं। ईवी को अपनाने की रफ्तार तब बढ़ती है जब चार्जिंग बिना परेशानी के काम करे सरल, अनुमान के मुताबिक और हर वाहन व नेटवर्क के साथ आसानी से जुड़ने वाली।
जैसे-जैसे इंडस्ट्री आगे बढ़ रही है, इनोवेन अकेले संभव नहीं है। आगे की प्रगति हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और एनर्जी सेक्टर के बीच गहरे सहयोग पर निर्भर करेगी, ताकि सिस्टम आपस में आसानी से जुड़ सकें, मजबूत रहें और यूज़र को सहज अनुभव मिले। वही कंपनियां सफल होंगी जो मजबूत संचालन के साथ इकोसिस्टम की सोच रखें—OEM से लेकर यूटिलिटी तक सभी के लिए काम करें और इंफ्रास्ट्रक्चर को एक भरोसेमंद, हमेशा चालू रहने वाली सेवा में बदलें, जो बड़े स्तर पर चुपचाप लेकिन प्रभावी ढंग से मूल्य देती रहे और इंडस्ट्री को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाए।”
अक्षय शेखर ने स्टार्टअप डे पर शुरुआती स्टार्टअप संस्थापकों के लिए सलाह देते हुए कहा "भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। हम संस्थापक सिर्फ कंपनियां नहीं बना रहे हैं, बल्कि नए बाजार तैयार कर रहे हैं और भारत को उन क्षेत्रों में वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद कर रहे हैं, जो अभी विकसित हो रहे हैं। ऐसे माहौल में प्रगति लचीलापन, मेहनत और जोखिम उठाने का साहस मांगती है। टिकाऊ कंपनियां वही बनती हैं जो बड़े पैमाने पर काम कर सकें, असली दुनिया की चुनौतियों से तेजी से सीख सकें और ग्राहकों और पार्टनर्स का भरोसा लगातार जीतते रहें, जैसे-जैसे उनके आर्थिक मॉडल और संचालन विकसित होते हैं।
जब हमारे स्टार्टअप बड़े होते हैं, तो उनका प्रभाव सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे इकोसिस्टम में फैलता है। वास्तविक समस्याओं—जैसे अवसंरचना, नियम और उपयोग—का समाधान करके और अपनी जमीन पर मिली जानकारी को जिम्मेदारी से उद्योग और सरकार के साथ साझा करके संस्थापक नीतियों को सबूतों के आधार पर आकार देने में मदद कर सकते हैं। जब महत्त्वाकांक्षा को सही निष्पादन और सहयोग के साथ जोड़ा जाता है, तो स्टार्टअप असली बदलाव ला सकते हैं।"
राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस क्यो मनाया जाता है
स्टार्टअप इंडिया को 16 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री द्वारा एक बदलाव लाने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत को नौकरी मांगने वालों के बजाय नौकरी देने वालों का देश बनाने के साथ, इनोवेशन को बढ़ावा देना, उद्यमिता को बढ़ावा देना और निवेश से होने वाले विकास को सक्षम बनाना था।
पिछले एक दशक में, स्टार्टअप इंडिया भारत के आर्थिक और इनोवेशन ढांचे का एक अहम हिस्सा बन गया है। इसने संस्थागत व्यवस्था को मजबूत किया है, पूंजी और मेंटरशिप तक पहुंच बढ़ाई है, और स्टार्टअप्स को सभी क्षेत्रों और जगहों पर बढ़ने और विस्तार करने के लिए एक अच्छा माहौल बनाया है। इस दौरान भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है, जिसमें देश भर में 2,00,000 से ज़्यादा स्टार्टअप्स को मान्यता मिली है। ये उद्यम रोजगार पैदा करने, इनोवेसन से होने वाले आर्थिक विकास और अलग-अलग क्षेत्रों में घरेलू वैल्यू चेन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस पर ईवी उद्यमियों की साझा की गई यात्राएँ यह स्पष्ट करती हैं कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम केवल तेज़ विकास की कहानी नहीं, बल्कि धैर्य, भरोसे, सहयोग और ज़मीनी समझ का परिणाम है। Zelio, EVeium और Kazam जैसे स्टार्टअप्स ने दिखाया है कि जब इनोवेशन को वास्तविक समस्याओं के समाधान, मजबूत निष्पादन और पूरे इकोसिस्टम के साथ साझेदारी से जोड़ा जाता है, तो टिकाऊ और प्रभावशाली व्यवसाय बनते हैं। आने वाले समय में, ऐसे ही विचारशील और जिम्मेदार प्रयास भारत को वैश्विक ईवी और एनर्जी इनोवेशन का एक मजबूत केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।