स्टॉक एक्सचेंज में दी गई जानकारी के अनुसार, कंपनी ने योग्य संस्थागत खरीदारों (QIBs) को 35.86 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस पर 21.76 करोड़ इक्विटी शेयर आवंटित किए। इसमें 25.86 रुपये प्रति शेयर का प्रीमियम शामिल है। यह इश्यू प्राइस सेबी के नियमों के तहत तय 37.74 रुपये के फ्लोर प्राइस से 4.98% (1.88 रुपये प्रति शेयर) कम रखा गया था।
1 जून को शुरू हुए इस QIP में कई वैश्विक और घरेलू निवेशकों ने हिस्सा लिया। इनमें Goldman Sachs, BNP Paribas के क्लाइमेट फंड, Motilal Oswal Financial Services म्यूचुअल फंड, Mirae Asset म्यूचुअल फंड, Kotak Mahindra Bank म्यूचुअल फंड और JM Financial म्यूचुअल फंड शामिल रहे।
यह फंड जुटाने का कदम ऐसे समय में आया है जब ओला इलेक्ट्रिक इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बाजार में सुधार के शुरुआती संकेत दिखा रही है। कई महीनों तक बिक्री में गिरावट के कारण कंपनी की बाजार हिस्सेदारी घटकर 3.5% रह गई थी, लेकिन पिछले दो महीनों से रजिस्ट्रेशन में लगातार 20% से अधिक मासिक वृद्धि दर्ज की गई है। मई 2026 में कंपनी ने 15,139 यूनिट्स बेचीं, जिससे उसकी बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 8.88% हो गई।
हालांकि, कंपनी अभी भी वित्तीय दबाव का सामना कर रही है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में उसका परिचालन राजस्व सालाना आधार पर 56% से अधिक घटकर 265 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 611 करोड़ रुपये था। वहीं, कंपनी को इस तिमाही में लगभग 500 करोड़ रुपये का घाटा भी हुआ।
गुरुवार को ओला इलेक्ट्रिक का शेयर 43.06 रुपये पर बंद हुआ। इसके साथ कंपनी का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लगभग 18,993 करोड़ रुपये (करीब 2 अरब डॉलर) रहा।