प्रल्हाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री: जानिए उनसे जुड़ी 5 अहम बातें

प्रल्हाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री: जानिए उनसे जुड़ी 5 अहम बातें

प्रल्हाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री: जानिए उनसे जुड़ी 5 अहम बातें
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी ने संभाली शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी, NEP लागू करने, परीक्षा सुधार और शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करना होगी प्राथमिकता।


राष्ट्रीय स्तर पर NEET-UG पेपर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पश्चात प्रल्हाद जोशी को भारत का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। प्रल्हाद जोशी इससे पहले केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। आइए जानते हैं उनसे जुड़ी पांच महत्वपूर्ण बातें।

1. शुरुआती जीवन और शिक्षा

प्रल्हाद जोशी का जन्म और पालन-पोषण कर्नाटक में हुआ। उन्होंने केएस आर्ट्स कॉलेज, हुबली और कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA) की पढ़ाई पूरी की।

छात्र जीवन के दौरान ही उनकी रुचि सामाजिक मुद्दों, जनसेवा और सामुदायिक विकास की ओर बढ़ी। राजनीति में आने से पहले उन्होंने उद्यमिता (Entrepreneurship) और सामाजिक गतिविधियों में भी काम किया। उनका मानना रहा कि रोजगार सृजन और जमीनी स्तर पर लोगों को सशक्त बनाना देश के विकास के लिए जरूरी है।

2. राजनीतिक सफर

प्रल्हाद जोशी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी (BJP) से की। अपनी मेहनत और संगठन क्षमता के कारण उन्होंने जल्द ही पार्टी में महत्वपूर्ण स्थान बना लिया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ भी काम किया और सामाजिक तथा राष्ट्रवादी आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1992 में उन्होंने 'सेव कश्मीर आंदोलन' में भाग लिया और हुबली के कित्तूर चेन्नम्मा सर्कल (इदगाह मैदान) में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आंदोलन का नेतृत्व किया।

इसके बाद वे 1995 से 1998 तक बीजेपी धारवाड़ जिला अध्यक्ष और 1998 से 2003 तक राज्य महासचिव रहे। वहीं वर्ष 2004 में वे पहली बार कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। संसद में उन्होंने कई महत्वपूर्ण समितियों में कार्य किया, जिनमें शामिल हैं।

} वित्त संबंधी सलाहकार समिति

} रसायन एवं उर्वरक संबंधी स्थायी समिति


} परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति संबंधी स्थायी समिति

वे 2006 से 2013 तक बीजेपी कर्नाटक के महासचिव और 2013 में कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बने। इसके बाद वे 2009, 2014, 2019 और 2024 में लगातार लोकसभा चुनाव जीतते रहे। 2019 में वे संसदीय कार्य, कोयला एवं खान मंत्री बने। 2021 में उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली। 2024 में वे फिर से केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली।

3. प्रमुख उपलब्धियां

प्रल्हाद जोशी पांच बार धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद चुने जा चुके हैं और बीजेपी कर्नाटक के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं। साथ ही केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने कोयला एवं खान मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा उपभोक्ता मामले मंत्रालय की जिम्मेदारियां संभालीं।

उन्होंने भारत के स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) अभियान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय एवं गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य को आगे बढ़ाना रहा।

उनकी देखरेख में कई प्रमुख योजनाएं आगे बढ़ीं, जिनमें शामिल हैं -

} पीएम-कुसुम योजना

} नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन

} पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना

} ऑफशोर विंड एनर्जी परियोजनाएं

इसके अलावा उन्होंने हर वर्ष 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बोली प्रक्रिया जैसी नीतियों को भी आगे बढ़ाया। संसद में भी उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में भूमिका निभाई।

4. शिक्षा मंत्री के रूप में विजन और मिशन

शिक्षा मंत्री बनने के बाद अपने शुरुआती वक्तव्य में प्रल्हाद जोशी ने कहा कि उन्होंने यह जिम्मेदारी कर्तव्य और विनम्रता के भाव से स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा शुरू किए गए सुधारों, विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रभावी क्रियान्वयन को आगे बढ़ाना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय परीक्षाओं में लोगों का भरोसा दोबारा कायम करने के लिए परीक्षा प्रणाली में सुधार किए जाएंगे। उनका जोर पारदर्शिता, निष्पक्षता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर रहेगा। हालांकि उन्होंने अभी कोई विस्तृत दीर्घकालिक योजना साझा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि उनकी पहली प्राथमिकता शिक्षा क्षेत्र में स्थिरता लाना, परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना और शिक्षा नीतियों को देश के विकास लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ाना होगी।

5. केंद्र सरकार ने प्रल्हाद जोशी को ही क्यों चुना?

प्रल्हाद जोशी की नियुक्ति यह दर्शाती है कि केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के लिए एक अनुभवी और भरोसेमंद नेता को चुना है। वे लंबे समय से बीजेपी के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के महत्वपूर्ण सदस्य रहे हैं। प्रशासनिक अनुभव, संगठन क्षमता और प्रभावी कार्यशैली के कारण उन्होंने पार्टी का विश्वास हासिल किया है।

इस संदर्भ में विशेषज्ञों का भी यह मानना है कि NEET जैसी परीक्षाओं को लेकर पैदा हुए विवादों के बाद शिक्षा व्यवस्था में लोगों का भरोसा बहाल करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में है। ऐसे समय में प्रल्हाद जोशी का अनुभव मंत्रालय को स्थिरता देने और शिक्षा सुधारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।



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