स्कूलों में समान और सुलभ शिक्षा को बढ़ावा, प्रशस्त पोर्टल से लाखों शिक्षक जागरूक

स्कूलों में समान और सुलभ शिक्षा को बढ़ावा, प्रशस्त पोर्टल से लाखों शिक्षक जागरूक

स्कूलों में समान और सुलभ शिक्षा को बढ़ावा, प्रशस्त पोर्टल से लाखों शिक्षक जागरूक
प्रशस्त पोर्टल के 30 मिनट के जागरूकता मॉड्यूल की राष्ट्रव्यापी स्क्रीनिंग में 60 हजार से अधिक विद्यालय शामिल; 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध पहल का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सुरक्षित, सुलभ और सहयोगी स्कूली वातावरण तैयार करना है।


देश के स्कूलों में समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सुरक्षित व सहयोगी वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय ने देशव्यापी जागरूकता पहल शुरू की है। मंत्रालय के विद्यालयी शिक्षा और साक्षरता विभाग ने ‘प्रशस्त’ (PRASHAST) पोर्टल के माध्यम से समावेशी शिक्षा पर 30 मिनट के जागरूकता और अभिमुखीकरण मॉड्यूल की राष्ट्रव्यापी स्क्रीनिंग आयोजित की। इस पहल में 60 हजार से अधिक विद्यालयों ने भाग लिया है, जबकि 72 लाख से अधिक शिक्षक पहले ही इस मॉड्यूल के माध्यम से जागरूक किए जा चुके हैं।

स्कूलों में समावेशी माहौल तैयार करने पर जोर

इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में समावेशिता के लिए समग्र दृष्टिकोण विकसित करना है। इसके तहत सामान्य शिक्षक, विशेष शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जरूरतों को समझने और उनके प्रति उचित व्यवहार अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इससे स्कूलों में ऐसा वातावरण तैयार करने में मदद मिल सकती है, जहां हर बच्चा सुरक्षित महसूस करे और शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों में भाग ले सके।

शिक्षा मंत्रालय का यह मॉड्यूल व्यावहारिक उदाहरणों और सहभागितापूर्ण गतिविधियों पर आधारित है। इसे स्कूल प्रमुखों, शिक्षकों, विशेष शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए तैयार किया गया है। इसमें आया, ड्राइवर, लिपिकीय कर्मचारी, रिसेप्शनिस्ट, डीन और वार्डन जैसे कर्मचारी भी शामिल हैं। यह मॉड्यूल 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, ताकि विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि के स्कूल कर्मचारी इसे आसानी से समझ सकें।

प्रशस्त पोर्टल से संभावित दिव्यांगता की पहचान में मदद

प्रशस्त एक विद्यालय-आधारित डिजिटल टूल है, जिसे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत आने वाली 21 दिव्यांगता श्रेणियों से संबंधित संभावित स्थितियों की शुरुआती पहचान में सहायता के लिए विकसित किया गया है। इसकी दो-भाग वाली चेकलिस्ट में पहले चरण में सामान्य शिक्षक बच्चों के व्यवहार और दिखाई देने वाले संकेतों के आधार पर स्क्रीनिंग करते हैं। दूसरे चरण में विशेष शिक्षक इन संकेतों का सत्यापन करते हैं और जरूरत पड़ने पर आगे चिकित्सीय जांच के लिए रेफरल की सुविधा देते हैं।

यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ दिव्यांगताओं की पहचान केवल बाहरी संकेतों से नहीं हो सकती। हालांकि, प्रशस्त की स्क्रीनिंग चिकित्सीय निदान का विकल्प नहीं है। इसका उद्देश्य उन बच्चों की पहचान में सहायता करना है, जिन्हें आगे विशेषज्ञ मूल्यांकन और आवश्यक शैक्षणिक सहयोग की जरूरत हो सकती है।

समावेशी शिक्षा सभी की साझा जिम्मेदारी

विद्यालयी शिक्षा और साक्षरता विभाग पिछले तीन महीनों से प्रशस्त पोर्टल के माध्यम से सामान्य शिक्षकों को लगातार जागरूक कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रव्यापी स्क्रीनिंग में विद्यालयों की भागीदारी इस महीने और बढ़ने की उम्मीद है।

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप न्यायसंगत, सुलभ और समावेशी शिक्षा को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को केवल कक्षा में ही नहीं, बल्कि स्कूल के कार्यालय, परिवहन और अन्य साझा स्थानों पर भी सम्मानजनक व्यवहार और आवश्यक सहयोग मिले। इस दृष्टिकोण के तहत समावेशी शिक्षा को केवल शिक्षकों का नहीं, बल्कि पूरे विद्यालय समुदाय का साझा दायित्व माना गया है।


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