रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी इस IPO के जरिए करीब 600 से 700 मिलियन डॉलर जुटाने की योजना बना रही है, जिसकी वैल्यूएशन लगभग 5–6 बिलियन डॉलर आंकी जा रही है। यह उसकी पहले की 7.5 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन से कम है, जो करीब चार साल पहले थी।
गोपनीय फाइलिंग का मतलब है कि कंपनी अपने IPO से जुड़े दस्तावेज Securities and Exchange Board of India (SEBI) को जमा कर सकती है, बिना तुरंत अपनी वित्तीय और अन्य जानकारी सार्वजनिक किए। हाल के समय में Swiggy, Groww, Meesho और Zepto जैसे कई स्टार्टअप्स ने यह तरीका अपनाया है।
Razorpay का IPO ऐसे समय में आ रहा है जब शेयर बाजार में नई लिस्टिंग को लेकर माहौल थोड़ा सतर्क है। हाल ही में PhonePe ने पश्चिम एशिया के तनाव के कारण अपने IPO प्लान को रोक दिया था। ऐसे बाहरी कारण और निवेशकों की बढ़ती जांच, Razorpay के IPO की कीमत पर असर डाल सकते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि अब निवेशक उन कंपनियों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जिनकी ग्रोथ स्थिर हो और मुनाफा साफ दिखाई दे। इसलिए अब कंपनियों की वैल्यूएशन पहले की तुलना में थोड़ी कम रखी जा रही है।
Razorpay पिछले एक साल से अपने IPO की तैयारी कर रही है। मई 2025 में कंपनी ने अपना मुख्यालय अमेरिका से भारत शिफ्ट किया (रिवर्स फ्लिप), जिसमें उसे लगभग 150 मिलियन डॉलर का टैक्स खर्च आया। इसके अलावा, कंपनी ने खुद को पब्लिक लिमिटेड कंपनी में भी बदल लिया है, जो लिस्टिंग के लिए जरूरी होता है।
वित्तीय रूप से कंपनी की आय में अच्छा इजाफा हुआ है। FY25 में कंपनी की ऑपरेटिंग रेवेन्यू 65% बढ़कर 3,783 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल 2,296 करोड़ रुपये थी। हालांकि, कंपनी को 1,209 करोड़ रुपये का घाटा भी हुआ, जिसका कारण ESOP खर्च और रिवर्स फ्लिप से जुड़े खर्च हैं।
साल 2014 में हर्षिल माथुर और शशांक कुमार द्वारा शुरू की गई Razorpay PayU, Paytm, Pine Labs और Cashfree जैसी कंपनियों से मुकाबला करती है। कंपनी को Reserve Bank of India से पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में मंजूरी मिली हुई है। यह ऑनलाइन और ऑफलाइन पेमेंट, इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन और RazorpayX के जरिए बिजनेस बैंकिंग जैसी सेवाएं देती है। पिछले साल कंपनी ने Pop में हिस्सेदारी खरीदकर कंज्यूमर पेमेंट सेगमेंट में भी एंट्री की।
Razorpay फिलहाल करीब 180 बिलियन डॉलर के पेमेंट्स प्रोसेस करती है, जो 2023 में 150 बिलियन डॉलर और उससे पहले 100 बिलियन डॉलर थी। इसकी ग्रोथ पेमेंट गेटवे, POS मशीन, लॉयल्टी प्रोग्राम और इंटरनेशनल बिजनेस की वजह से हुई है।