Suzuki EV समेत पावरट्रेन विकास तेज करेगी

Suzuki EV समेत पावरट्रेन विकास तेज करेगी

Suzuki EV समेत पावरट्रेन विकास तेज करेगी
सुज़ुकी 2030 तक नए वाहनों के विकास में लगने वाले समय को आधा करने और डेवलपमेंट एफिशिएंसी में 30% सुधार का लक्ष्य रख रही है।

जापानी ऑटोमोबाइल कंपनी Suzuki Motor Corporation 2030 तक नई कारों को विकसित करने में लगने वाले समय को आधा करने की योजना बना रही है। कंपनी इसके लिए अपनी इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग टीमों के बीच काम करने के तरीके में बदलाव करेगी।

Suzuki ने 2030 तक डेवलपमेंट एफिशिएंसी में 30% और प्रोडक्शन एफिशिएंसी में 50% सुधार का लक्ष्य रखा है। डेवलपमेंट से जुड़े लक्ष्यों की तुलना FY20 के प्रदर्शन से की जाएगी, जबकि प्रोडक्शन एफिशिएंसी के लिए भारत में स्थित मानेसर प्लांट को बेंचमार्क बनाया गया है।

यह योजना ऐसे समय में सामने आई है जब Suzuki की भारतीय कंपनी Maruti Suzuki बड़े प्रोडक्ट प्रोग्राम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अपने वाहन विकास चक्र को 48 महीने से घटाकर 36 महीने करने पर काम कर रही है। अगले तीन वर्षों में कंपनी करीब नौ नए मॉडल पेश करने की योजना बना रही है, जिनमें सात SUV शामिल हो सकती हैं।

नई कारों के विकास में अलग-अलग पावरट्रेन विकल्पों के कारण काम और बढ़ गया है। कंपनियों को पेट्रोल, CNG, हाइब्रिड, फ्लेक्स-फ्यूल और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन के लिए अलग-अलग इंजीनियरिंग, टेस्टिंग, खरीद और सप्लायर प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इससे नए मॉडल को बाजार में लाने में अधिक समय लग सकता है।

समय कम करने के लिए Suzuki वाहन प्रोग्राम की शुरुआत से ही अलग-अलग टीमों को साथ लाने की योजना बना रही है। प्लानिंग, डिजाइन, प्रोडक्शन, क्वालिटी और प्रोक्योरमेंट टीमें समानांतर रूप से काम करेंगी। इसके साथ ही कंपनी डिजिटल इंजीनियरिंग और साझा मॉड्यूल्स का इस्तेमाल बढ़ाएगी, ताकि संभावित समस्याओं की पहचान पहले ही की जा सके और टीमों के बीच काम दोबारा भेजने में लगने वाला समय कम हो।

मारुति सुज़ुकी (Maruti Suzuki) भी इसी दिशा में काम कर रही है। कंपनी सिमुलेशन और वर्चुअल टेस्टिंग का उपयोग बढ़ा रही है, सप्लायर्स को विकास प्रक्रिया में पहले शामिल करने और कंपोनेंट्स, टूलिंग व मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं को एक साथ विकसित करने पर जोर दे रही है।

सुज़ुकी (Suzuki) जापान में मुख्य तकनीकों को विकसित करती है और इन्हें Maruti Suzuki के साथ साझा करती है। मारुति (Maruti) भारतीय ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार इन तकनीकों और उत्पादों को तैयार करने के साथ उनका उत्पादन भी करती है। भारत के मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में बढ़ते महत्व को देखते हुए इस व्यवस्था पर आने वाले समय में काम का दबाव बढ़ सकता है।

सुज़ुकी (Suzuki) का लक्ष्य वित्त वर्ष 2030 से भारत में सालाना करीब 40 लाख वाहनों की उत्पादन क्षमता हासिल करना है। हालांकि, कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि 2030 के लक्ष्य के लिए वर्तमान में ग्रुप स्तर पर नई कार विकसित करने में कितना समय लगता है।

Subscribe Newsletter
Submit your email address to receive the latest updates on news & host of opportunities