भारत की होमग्रोन ईवी निर्माता एवोर इलेक्ट्रिक (Avore Electric) ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल Avore Electric EX लॉन्च कर भारतीय इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल बाजार में नई शुरुआत की है। स्वदेशी तकनीक, AI-आधारित इंटेलिजेंस और रोजमर्रा के उपयोग को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह मोटरसाइकिल कंपनी के "Intelligence Beyond Motion" विजन को दर्शाती है। इस विशेष बातचीत में Avore Electric के संस्थापक प्रियंक रखोलिया ने कंपनी की तकनीक, AI, भारतीय ईवी बाजार की चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
Avore Electric ने कितने मॉडल लॉन्च किए हैं और उनकी रेंज व बैटरी क्षमता क्या है?
प्रियंक रखोलिया: हमने Avore Electric EX के तीन मॉडल लॉन्च किए हैं। पहला मॉडल EX 2S है, जिसकी टॉप स्पीड 114 किमी/घंटा और 260 किमी (IDC) की रेंज है। दूसरा मॉडल EX 2 है, जिसकी रेंज 255 किमी (IDC) और टॉप स्पीड 100 किमी/घंटा है। तीसरा मॉडल EX 1 है, जिसमें 3.2 kWh का बैटरी पैक दिया गया है और इसकी 160 किमी (IDC) की रेंज है।
आपने Avore Electric में AI को किस तरह शामिल किया है?
प्रियंक रखोलिया: हमने ऐसा AI विकसित किया है जो राइडर के साथ लगातार सीखता रहता है। आप वाहन को जितना चलाते हैं, यह आपकी राइडिंग स्टाइल, आपकी पसंद और आपके उपयोग के तरीके को समझता है। उसी आधार पर यह आपको एक अधिक स्मार्ट और व्यक्तिगत राइडिंग अनुभव प्रदान करता है।
तीनों मॉडलों की कीमत क्या है?
प्रियंक रखोलिया: Avore Electric EX तीन वेरिएंट—EX 2S, EX 2 और EX 1 में उपलब्ध है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 1,24,999 है।
Avore Electric की बाइक बाजार में मौजूद अन्य इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों से कैसे अलग है?
प्रियंक रखोलिया: हमने तीन प्रमुख बातों पर सबसे अधिक ध्यान दिया है—लंबी रेंज, तेज चार्जिंग और भरोसेमंद प्रदर्शन। यही भारतीय ग्राहकों की सबसे बड़ी जरूरत है।
हमने मोटरसाइकिल में ऑनबोर्ड फास्ट चार्जर दिया है, जिससे इसे कहीं भी सामान्य घरेलू सॉकेट से चार्ज किया जा सकता है। साथ ही हमने ऐसी रेंज दी है जो रोजमर्रा की जरूरतों को आसानी से पूरा करती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमने इस मोटरसाइकिल को पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर विकसित किया है, जिससे सर्विस और मेंटेनेंस से जुड़ी ग्राहकों की चिंताओं का समाधान हो सके।
क्या AI बैटरी लाइफ बढ़ाने और चार्जिंग को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है?
प्रियंक रखोलिया: बिल्कुल। AI लगातार राइडर की ड्राइविंग शैली को समझता है और उसी के अनुसार वाहन की पावर डिलीवरी को नियंत्रित करता है। जब वाहन केवल उतनी ही ऊर्जा का उपयोग करता है जितनी आवश्यकता होती है, तो बैटरी की दक्षता बढ़ती है और वाहन की रेंज भी बेहतर हो जाती है।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने में राज्य सरकारों की क्या भूमिका होनी चाहिए?
प्रियंक रखोलिया: सरकार का सबसे बड़ा फोकस चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर होना चाहिए। यदि चार्जिंग नेटवर्क मजबूत नहीं होगा, तो EV अपनाने की गति भी सीमित रहेगी। इसके अलावा सरकारें ऋण, RTO शुल्क और अन्य प्रोत्साहनों के माध्यम से भी अच्छा सहयोग दे रही हैं। केंद्र सरकार की PM E-Drive जैसी योजनाएं भी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
शहरी क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलें लास्ट-माइल मोबिलिटी को कैसे बदल रही हैं?
प्रियंक रखोलिया: शहरी क्षेत्रों और लास्ट-माइल डिलीवरी में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। आज अधिकांश नई डिलीवरी कंपनियां और राइडर पारंपरिक पेट्रोल वाहनों की बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि उनकी परिचालन लागत कम होती है।
भारत में इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों को अपनाने की सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?
प्रियंक रखोलिया: जब हमने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया, तब हमने ग्राहकों के बीच एक सर्वे किया। उसमें तीन सबसे बड़ी चुनौतियां सामने आईं। पहली रेंज एंग्जायटी, यानी लोग अधिक रेंज चाहते हैं। दूसरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, जो अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। और तीसरी सर्विस और आफ्टर-सेल्स सपोर्ट, क्योंकि ग्राहकों की चिंता रहती है कि यदि वाहन खराब हो जाए तो उसकी सर्विस कैसे होगी। हमने अपनी मोटरसाइकिल को इन्हीं तीन प्रमुख समस्याओं का समाधान देने के उद्देश्य से विकसित किया है।