करीब 90,000 वर्ग फीट में फैला यह नया आउटलेट सिर्फ खाने की जगह नहीं है, बल्कि एक खास सांस्कृतिक अनुभव भी प्रदान करता है। इस रेस्टोरेंट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां भोजन के साथ आध्यात्मिकता का भी अनुभव हो। यह जगह भक्ति और आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) का अनोखा मेल प्रस्तुत करती है।
यहां आने वाले लोगों का स्वागत आदि योगी और नंदी की मूर्तियों से किया जाता है। इसके बाद परिसर में देवी लिंग भैरवी मंदिर भी बनाया गया है। इसके अलावा यहां एक विशाल भारतीय ध्वज और दुर्लभ पुंगनूर नस्ल की गायों के लिए गौशाला भी है, जो इसे और खास बनाती है।
यहां खाने का अनुभव भी अनोखा है। भगवान विष्णु के दशावतार से प्रेरित लाइव काउंटर बनाए गए हैं, जहां भोजन को पौराणिक थीम के साथ प्रस्तुत किया जाता है। इसके बीच में एक बड़ा एम्फीथिएटर है, जिसमें भगवान श्री वेंकटेश्वर की सुंदर लकड़ी की नक्काशी की गई है, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं।
आम फास्ट फूड स्टाइल से अलग, इस रेस्टोरेंट में पारंपरिक बैठकर खाने की व्यवस्था है। यहां मेहमानों को जूते उतारकर, पैर साफ करके जमीन पर बैठकर केले के पत्ते पर भोजन परोसा जाता है, जिससे भोजन का अनुभव और भी खास और पारंपरिक बन जाता है।
इतना बड़ा और खास होने के बावजूद, यह रेस्टोरेंट क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) की तरह तेजी से सेवा देने पर भी ध्यान देता है, ताकि ग्राहक को जल्दी और अच्छा अनुभव मिल सके।
इस रेस्टोरेंट का आधिकारिक उद्घाटन 9 अप्रैल को गंगा आरती के साथ होगा। इसके बाद 10 से 15 अप्रैल तक शाम 6 बजे से लोगों के लिए मुफ्त ट्रायल रखा गया है। 16 अप्रैल से यह रेस्टोरेंट सुबह 5 बजे से आम जनता के लिए खुल जाएगा।
इस लॉन्च के साथ, द रामेश्वरम कैफे भारत में डाइनिंग के अनुभव को एक नया रूप दे रहा है, जहां भोजन, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम देखने को मिलता है।