राइड-हेलिंग कंपनी उबर ने भारतीय मूल के अधिकारी बालाजी कृष्णमूर्ति को अपना नया मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) नियुक्त किया है। यह नेतृत्व परिवर्तन ऐसे समय पर हो रहा है, जब कंपनी मुनाफे को बनाए रखने और लंबे समय के विकास पर ध्यान दे रही है। यह नियुक्ति 16 फरवरी से प्रभावी होगी, जब मौजूदा CFO प्रशांत महेंद्र-राजाह अपने पद से इस्तीफा देंगे।
एक नियामक फाइलिंग में उबर ने कहा “मुख्य वित्त अधिकारी प्रशांत महेंद्र-राजाह 16 फरवरी 2026 को अपने पद से हट जाएंगे। वर्तमान में स्ट्रैटेजिक फाइनेंस के वाइस प्रेसिडेंट बालाजी कृष्णमूर्ति उसी दिन CFO का पद संभालेंगे।” महेंद्र-राजाह 1 जुलाई 2026 तक सीईओ दारा खोसरोशाही को रिपोर्ट करते हुए सीनियर फाइनेंस एडवाइज़र के रूप में कंपनी का समर्थन करते रहेंगे।
उबर के सीईओ दारा खोसरोशाही ने कहा, “जो लोग बालाजी को नहीं जानते, उनके लिए बता दूं कि वे निवेशकों के भरोसेमंद हैं, उबर के बिज़नेस को गहराई से समझते हैं और एक तेज़ व निर्णायक रणनीतिकार हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि कृष्णमूर्ति कई वर्षों से लीडरशिप टीम के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
41 वर्षीय बालाजी कृष्णमूर्ति 2019 में उबर से जुड़े थे और उन्होंने कई नेतृत्व भूमिकाएं निभाई हैं। वे 2020 से 2023 तक इन्वेस्टर रिलेशंस के प्रमुख रहे और 2023 में उन्हें स्ट्रैटेजिक फाइनेंस का वाइस प्रेसिडेंट बनाया गया। इस दौरान उन्होंने उबर की वित्तीय रणनीति और निवेशकों से संवाद में अहम भूमिका निभाई।
कृष्णमूर्ति ने मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने गुरुग्राम स्थित मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट से MBA किया और कोपेनहेगन बिज़नेस स्कूल में एक एक्सचेंज प्रोग्राम भी पूरा किया। उनकी शिक्षा तकनीकी, वित्तीय और प्रबंधन ज्ञान का अच्छा मेल है।
बालाजी कृष्णमूर्ति ने कहा, “उबर के लिए इस अहम समय पर इस जिम्मेदारी को संभालना मेरे लिए सम्मान की बात है। वैश्विक मोबिलिटी और डिलीवरी में अग्रणी कंपनी होने के नाते और मजबूत कैश फ्लो के साथ, हमारे पास उबर को एक लंबे समय तक टिकने वाली टेक कंपनी बनाने का अवसर है।”
CFO के रूप में कृष्णमूर्ति को सालाना 6 लाख अमेरिकी डॉलर का मूल वेतन मिलेगा और वे उबर की एग्जीक्यूटिव बोनस योजना के लिए भी पात्र होंगे। इसके अलावा उन्हें शेयर आधारित मुआवजा मिलेगा, जिसमें रिस्ट्रिक्टेड स्टॉक यूनिट्स और स्टॉक ऑप्शंस शामिल हैं, जो फाइलिंग में बताई गई शर्तों के अनुसार लागू होंगे।
खोसरोशाही ने महेंद्र-राजाह के कार्यकाल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि महेंद्र-राजाह ने उबर को इन्वेस्टमेंट-ग्रेड दर्जा दिलाने, कंपनी का पहला शेयर बायबैक प्रोग्राम शुरू करने और कई बड़े अधिग्रहणों को सफलतापूर्वक पूरा करने में अहम भूमिका निभाई।