इसके अलावा कंपनी के मौजूदा लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स ने भी इस राउंड में हिस्सा लिया। साथ ही यह फंडिंग ऐसे समय में मिली है जब Ultraviolette ने एक नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की घोषणा की है, जिसकी प्रोडक्शन क्षमता को सालाना 5 लाख यूनिट तक बढ़ाया जा सकता है। इस पूंजी का इस्तेमाल मौजूदा F77 और X-47 इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों का प्रोडक्शन बढ़ाने और आने वाले Tesseract और Shockwave प्रोडक्ट्स के लिए किया जाएगा।
कंपनी इस फंड का इस्तेमाल अपनी अगली पीढ़ी के ग्लोबल EV प्लेटफॉर्म्स के डेवलपमेंट के लिए भी करेगी। ये प्लेटफॉर्म बैटरी टेक्नोलॉजी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, व्हीकल आर्किटेक्चर और सॉफ्टवेयर में Ultraviolette की वर्टिकली इंटीग्रेटेड टेक्नोलॉजी क्षमताओं पर आधारित होंगे।
प्रोडक्शन बढ़ाने के साथ ग्लोबल विस्तार पर फोकस
Ultraviolette फिलहाल भारत और यूरोप के 20 देशों में अपने इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल बेचती है। कंपनी 2027 में अमेरिका के बाजार में एंट्री करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही लैटिन अमेरिका और साउथईस्ट एशिया के बाजारों में भी विस्तार का लक्ष्य है।
कंपनी ने 48V से 400V तक की बैटरी आर्किटेक्चर पर टेक्निकल क्षमताएं विकसित की हैं। इसके चलते Ultraviolette अलग-अलग व्हीकल सेगमेंट और परफॉर्मेंस जरूरतों के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सॉल्यूशंस विकसित कर सकती है। कंपनी के अनुसार, इस तरह की बैटरी आर्किटेक्चर रेंज में इन-हाउस टेक्नोलॉजी रखने वाली वह दुनिया की चुनिंदा EV कंपनियों में शामिल है।
Ultraviolette की स्थापना 2016 में नारायण सुब्रमण्यम और नीरज राजमोहन ने की थी। कंपनी को Lingotto, TDK Ventures, Qualcomm Ventures, Zoho Corporation, TVS Motor और Speciale Invest जैसे निवेशकों का समर्थन मिला है। कंपनी के अनुसार, वह मोटरसाइकिलों के लिए यूरोपियन सर्टिफिकेशन हासिल करने वाली पहली भारतीय इलेक्ट्रिक मैन्युफैक्चरर भी थी।
Ultraviolette के नए EV प्लेटफॉर्म
कंपनी ने कहा कि नई फंडिंग उसके मौजूदा और आने वाले प्रोडक्ट्स के प्रोडक्शन को बढ़ाने में मदद करेगी। F77 और X-47 के साथ Tesseract और Shockwave को भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग को पूरा करने के लिए तैयार किया जा रहा है।
Ultraviolette के अनुसार, नई मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और नई पूंजी के जरिए कंपनी अपने ग्लोबल EV प्लेटफॉर्म्स के डेवलपमेंट को तेज करेगी। इन प्लेटफॉर्म्स में बैटरी, पावरट्रेन, सॉफ्टवेयर और व्हीकल टेक्नोलॉजी को एक साथ विकसित करने पर फोकस रहेगा।
कंपनी के को-फाउंडर्स नारायण सुब्रमण्यम और नीरज राजमोहन ने कहा कि यह फंडिंग Ultraviolette को एक ग्लोबल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कंपनी के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, निवेश से मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने, भविष्य के प्रोडक्ट प्लेटफॉर्म्स के डेवलपमेंट को तेज करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कंपनी की मौजूदगी मजबूत करने में मदद मिलेगी।
भारत से ग्लोबल EV ब्रांड बनने की दिशा में कंपनी
Ultraviolette ने पिछले कुछ वर्षों में बैटरी टेक्नोलॉजी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, व्हीकल आर्किटेक्चर और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में अपनी इन-हाउस टेक्नोलॉजी क्षमताओं को विकसित किया है। कंपनी अब इन क्षमताओं का इस्तेमाल अलग-अलग बाजारों के लिए ग्लोबल EV प्लेटफॉर्म तैयार करने में कर रही है।
नई फंडिंग के साथ कंपनी का फोकस मैन्युफैक्चरिंग स्केल बढ़ाने, नए इलेक्ट्रिक व्हीकल्स लॉन्च करने और भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर रहेगा। कंपनी का लक्ष्य 2027 में अमेरिका में एंट्री करने के साथ लैटिन अमेरिका और साउथईस्ट एशिया में भी विस्तार करना है।