इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता अल्ट्रावायलेट ऑटोमोटिव अगले पांच वर्षों में करीब 1,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। कंपनी इस निवेश का उपयोग मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने के लिए करेगी। इसमें करीब 200 करोड़ मौजूदा प्लांट के विस्तार पर और लगभग 800 करोड़ तमिलनाडु में नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पर खर्च किए जाएंगे।
कंपनी का नया प्लांट तमिलनाडु के एसआईपीसीओटी औद्योगिक पार्क, शूलागिरी में बनाया जा रहा है। इसकी शुरुआती क्षमता करीब 2.5 लाख वाहन सालाना होगी, जिसे आगे बढ़ाकर 5 लाख यूनिट सालाना किया जाएगा। अल्ट्रावायलेट के सीईओ नारायण सुब्रमण्यम के अनुसार, प्लांट के 2027 की पहली और दूसरी तिमाही के बीच पूरी क्षमता तक पहुंचने की उम्मीद है। यहां कंपनी के सभी छह इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मॉडल बनाए जा सकेंगे।
फिलहाल कंपनी F77 और X47 इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों का उत्पादन करती है और जल्द ही शॉक वेव (Shockwave) इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल तथा Tesseract इलेक्ट्रिक स्कूटर को पोर्टफोलियो में शामिल करने की तैयारी कर रही है। कंपनी का लक्ष्य चार इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल और दो स्कूटर पेश करना है। अल्ट्रावायलेट (Ultraviolette) को टेसेरैक्ट (Tesseract) से हर महीने कम से कम 10,000 यूनिट्स की मांग आने की उम्मीद है।
नया प्लांट घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भी उत्पादन करेगा। कंपनी शुरुआत में कुल वॉल्यूम का करीब 15% एक्सपोर्ट करने का लक्ष्य रखती है, जो आगे चलकर 25% तक पहुंच सकता है। अल्ट्रावायलेट (Ultraviolette) यूरोप, लैटिन अमेरिका और नॉर्थ अमेरिका में विस्तार पर फोकस कर रही है, जबकि दक्षिण-पूर्व एशिया में पायलट प्रोग्राम शुरू किए जा रहे हैं। कंपनी के अनुसार, वह पहले से करीब 20 यूरोपीय देशों में मौजूद है।
इसके अलावा, कंपनी बैटरी सेल, माइक्रोकंट्रोलर्स/चिप्स और कुछ मैग्नेट मैटेरियल्स जैसे कंपोनेंट्स के लिए घरेलू सप्लाई चेन विकसित करने पर भी काम कर रही है। अल्ट्रावायलेट (Ultraviolette) को अगले तीन से चार वर्षों में अपनी पूरी व्हीकल सप्लाई चेन को लोकलाइज करने की उम्मीद है। कंपनी ने कहा कि क्षमता विस्तार के साथ प्रॉफिटेबिलिटी भी उसकी प्रमुख प्राथमिकता बनी रहेगी और इन-हाउस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के जरिए बाहरी सप्लायर्स पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया जाएगा।