ऑटोमोबाइल कंपनी वोल्वो ने 2030 तक दुनियाभर के बाजारों में 13 नए वाहन लॉन्च करने की योजना का ऐलान किया है। इनमें से सात मॉडल पश्चिमी बाजारों के लिए और छह मॉडल खास तौर पर चीन के लिए विकसित किए जाएंगे। कंपनी के अनुसार, यह रणनीति उसकी पहले की ग्लोबलाइज्ड प्रोडक्ट रणनीति से हटकर अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार वाहन विकसित करने की दिशा में बदलाव को दर्शाती है।
यूरोप, UK और अमेरिका के लिए तैयार किए जाने वाले मॉडल वोल्वो (Volvo) के मौजूदा SPA2 और SPA3 प्लेटफॉर्म पर आधारित होंगे और कंपनी के HuginCore कंप्यूटिंग आर्किटेक्चर का इस्तेमाल करेंगे। पश्चिमी बाजारों के लिए लाइन-अप में यूरोप के लिए नई सेडान और एस्टेट कारें, जबकि अमेरिका के लिए एक फुल-साइज इलेक्ट्रिक SUV शामिल होगी।
चीन के लिए तैयार किए जाने वाले छह मॉडल वोल्वो (Volvo) और Geely के बीच ज्यादा सहयोग से विकसित होंगे। चीन की ऑटोमोबाइल कंपनी Geely ने 2010 में Volvo का अधिग्रहण किया था। इन मॉडलों में Geely के साथ प्लेटफॉर्म, कंपोनेंट्स और सप्लाई-चेन संसाधनों को साझा किया जाएगा, जिससे Volvo स्थानीय रेगुलेटरी जरूरतों और ग्राहकों की पसंद के अनुसार वाहनों को तैयार कर सकेगी।
वोल्वो (Volvo) अपनी कारों में टचस्क्रीन कंट्रोल के इस्तेमाल की रणनीति पर भी दोबारा विचार कर रही है। कंपनी डिजिटल डिस्प्ले और फिजिकल बटन के बीच बेहतर संतुलन बनाने की योजना बना रही है। इसके तहत कुछ फंक्शंस को दोबारा डेडिकेटेड फिजिकल कंट्रोल्स पर लाया जा सकता है।
कंपनी के डिजाइन प्रमुख Thomas Ingenlath ने इसकी तुलना Leica कैमरों से की और कहा कि बार-बार इस्तेमाल होने वाले फंक्शंस के लिए फिजिकल कंट्रोल ज्यादा उपयुक्त हो सकते हैं। हालांकि, चीन के बाजार के लिए मॉडल्स में स्क्रीन-आधारित कंट्रोल को ज्यादा प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है, क्योंकि वहां ग्राहकों की अपेक्षाएं अलग हैं।
वोल्वो (Volvo) अपने 100वें वर्ष के करीब 2027 में एक कॉन्सेप्ट वाहन के जरिए नई डिजाइन लैंग्वेज पेश करने की योजना बना रही है। Ingenlath ने पुष्टि की है कि कंपनी के Ironmark बैज और डायगोनल ग्रिल स्लैश को नए डिजाइन में फिर से पेश किया जाएगा। हालांकि, कंपनी ने इसके बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है।
रणनीति के तहत Volvo का लक्ष्य 2030 तक Geely के साथ साझा किए जाने वाले कंपोनेंट्स की हिस्सेदारी 30% तक बढ़ाना है। इससे मटेरियल लागत में करीब 5% की बचत का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी कॉरपोरेट ओवरहेड्स कम करने और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के साथ 8% से अधिक के संयुक्त ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन का लक्ष्य भी हासिल करना चाहती है।
वोल्वो (Volvo) ने कहा कि उसका लक्ष्य प्योर-इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में अपनी हिस्सेदारी दोगुनी करना है। हालांकि, कंपनी उन बाजारों में हाइब्रिड पावरट्रेन की पेशकश जारी रखेगी जहां पूरी तरह इलेक्ट्रिफिकेशन की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है। कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि 2030 तक किन बाजारों में हाइब्रिड वाहनों की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है।
वोल्वो (Volvo) की स्थापना 1927 में गोटेबोर्ग (Gothenburg) में हुई थी और 2010 से इसका बहुमत स्वामित्व Geely के पास है। कंपनी वर्तमान में दुनियाभर के 100 से ज्यादा बाजारों में वाहन बेचती है।